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“ग्रीनलैंड पर हमला किया तो NATO खत्म,” ट्रम्प के खिलाफ खड़े हुए 7 यूरोपीय देश, Video

“ग्रीनलैंड पर हमला किया तो NATO खत्म,” ट्रम्प के खिलाफ खड़े हुए 7 यूरोपीय देश, Video

डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने एक विवादास्पद बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि किसी ने ग्रीनलैंड पर हमला किया, तो यह NATO (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) की नींव को हिला सकता है। उनका यह बयान वैश्विक सुरक्षा और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

ग्रीनलैंड, जो कि डेनमार्क का स्वशासित क्षेत्र है, रणनीतिक और भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय सुरक्षा पर हमला केवल डेनमार्क का मामला नहीं है, बल्कि NATO के सभी सदस्य देशों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। उन्होंने कहा, “यदि ग्रीनलैंड पर हमला होता है, तो यह केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि NATO के अस्तित्व के लिए खतरा बनेगा।”

इसके अलावा, अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन के दौरान उठाए गए नीतिगत कदमों और ग्रीनलैंड को खरीदने की उनकी पिछली कोशिशों पर भी कई यूरोपीय देशों ने विरोध जताया है। 7 यूरोपीय देश – जिनमें जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, बेल्जियम, इटली, स्पेन और नॉर्वे शामिल हैं – ने ट्रम्प के प्रस्ताव का विरोध किया और इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई।

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीनलैंड का भू-रणनीतिक महत्व उत्तरी अटलांटिक, आर्कटिक और विश्व ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से बढ़ गया है। NATO में यह क्षेत्र राजनीतिक और सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है। इसलिए किसी भी बाहरी हस्तक्षेप की चेतावनी यूरोप और अमेरिका दोनों के लिए गंभीर है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि डेनमार्क की पीएम का बयान यह स्पष्ट संकेत है कि यूरोप अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय संप्रभुता के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि NATO केवल सामूहिक रक्षा का मंच नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय शांति और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने का भी साधन है।

सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस बयान को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे डेनमार्क की ठोस रुख की मिसाल बता रहे हैं, तो कुछ इसे अमेरिका और NATO के बीच बढ़ती खींचतान का संकेत मान रहे हैं।

इस घटना ने यह दिखा दिया है कि ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र भविष्य में वैश्विक राजनीति और सुरक्षा रणनीति में कितनी अहम भूमिका निभा सकते हैं। NATO और यूरोप की सजगता इस क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे के खिलाफ एक मजबूत संदेश देती है।

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