Housing Protest: बुजुर्ग महिला की बेदखली से भड़का स्पेन, किराए के संकट पर सरकार के बिल फेल, अब चुनाव
स्पेन में बढ़ते हाउसिंग और रेंट क्राइसिस ने अब राजनीतिक संकट का रूप ले लिया है. मैड्रिड में 87 साल की एक बुजुर्ग महिला को करीब सात दशक पुराने घर से बेदखल किए जाने के बाद देशभर में विरोध तेज हो गया. महंगे किराए और किराएदारों की बेदखली के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे.
मामला इतना बढ़ा कि प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज की सरकार को किराएदारों को राहत देने के लिए संसद में दो इमरजेंसी बिल लाने पड़े. हालांकि, सरकार इन प्रस्तावों को पास कराने के लिए जरूरी समर्थन नहीं जुटा सकी. इसके बाद सांचेज ने तय समय से करीब आठ महीने पहले आम चुनाव कराने का फैसला किया. स्पेन में 29 नवंबर 2026 को मतदान होना है.
70 साल पुराने घर से क्यों निकाली गईं मारिया?
विवाद का केंद्र बनीं 87 वर्षीय मारिया डेल कार्मेन अबास्कल करीब 70 वर्षों से मैड्रिड स्थित अपने घर में रह रही थीं. परिवार ने इस मकान को लंबे समय से किराए पर ले रखा था.
2018 में इमारत के मूल मालिक ने पूरी प्रॉपर्टी एक रियल एस्टेट कंपनी को बेच दी. इसके बाद नए मालिक और अबास्कल के बीच किराए को लेकर विवाद शुरू हुआ.
कंपनी ने किराया करीब 500 यूरो से बढ़ाकर 2,650 यूरो प्रति माह कर दिया. दूसरी ओर, अबास्कल की मासिक पेंशन लगभग 1,350 यूरो थी. यानी प्रस्तावित किराया उनकी पूरी मासिक आय से भी काफी ज्यादा था. मामला आगे चलकर अदालत तक पहुंचा और अंततः उन्हें घर खाली करना पड़ा.
बुजुर्ग की बेदखली बनी आंदोलन का चेहरा
अबास्कल को घर से बाहर किए जाने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से राष्ट्रीय मुद्दा बन गया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब एक बुजुर्ग अपनी पूरी पेंशन खर्च करने के बाद भी घर का किराया नहीं चुका सकतीं, तो यह देश के व्यापक आवास संकट को दिखाता है.
मैड्रिड सहित कई शहरों में महंगे किराए और बेदखली के खिलाफ प्रदर्शन हुए. धीरे-धीरे अबास्कल का मामला स्पेन में बढ़ती आवास समस्या का प्रतीक बन गया.
सरकार के दो इमरजेंसी बिल भी नहीं हुए पास
बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने 29 सितंबर को संसद में किराएदारों के लिए दो आपातकालीन प्रस्ताव पेश किए.
पहले प्रस्ताव में कमजोर और असुरक्षित किराएदारों की बेदखली को 2030 तक रोकने, किराए में बढ़ोतरी पर कुछ सीमाएं लगाने और बड़े निवेशकों द्वारा मकान खरीदने पर नियंत्रण जैसे उपाय शामिल थे. छोटे मकान मालिकों और किराएदारों को टैक्स राहत देने की योजना भी प्रस्ताव का हिस्सा थी.
दूसरे प्रस्ताव का उद्देश्य किराए के मौजूदा समझौतों को आगे बढ़ाना था. इससे अनुबंध खत्म होने के बाद किराएदारों को तुरंत घर खाली करने के बजाय अतिरिक्त समय मिल सकता था.
लेकिन सांचेज सरकार के पास संसद में स्पष्ट बहुमत नहीं है. ऐसे में दोनों प्रस्तावों को पारित कराने के लिए दूसरी पार्टियों का समर्थन जरूरी था. 2 अक्टूबर को हुई वोटिंग में सरकार को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला और दोनों प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सके.
विरोधी दलों ने क्यों किया विरोध?
सरकार के प्रस्तावों का विरोध करने वाली पार्टियों की दलील थी कि मकान मालिकों पर ज्यादा प्रतिबंध लगाने से किराए के लिए उपलब्ध मकानों की संख्या घट सकती है.
उनका तर्क था कि अगर लोग घर किराए पर देने से पीछे हटते हैं, तो बाजार में उपलब्ध प्रॉपर्टी कम होगी और इसका सीधा असर किराए पर पड़ सकता है. कुछ दलों ने छोटे मकान मालिकों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं होने पर भी आपत्ति जताई.
विपक्षी PP और Vox भी सांचेज सरकार की आवास नीति का विरोध कर रहे थे. वहीं, कैटेलोनिया की पार्टी Junts, जिसके समर्थन से सांचेज 2023 में दोबारा प्रधानमंत्री बने थे, अब सरकार के कई फैसलों से दूरी बना रही है.
संसद में कमजोर स्थिति ने बढ़ाई मुश्किल
सांचेज सरकार के सामने सिर्फ आवास संकट ही चुनौती नहीं है. संसद में बहुमत की कमी के कारण बजट और दूसरे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना भी मुश्किल रहा है.
सरकार 2023 के बाद से नया बजट पारित कराने में संघर्ष कर रही है. इसके अलावा भ्रष्टाचार के आरोपों और प्रवासन जैसे मुद्दों को लेकर भी विपक्ष सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है.
ऐसे राजनीतिक माहौल में आवास संबंधी दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों का गिरना सांचेज सरकार के लिए बड़ा झटका माना गया.
Spain Housing Crisis: समस्या कितनी गंभीर?
स्पेन में सस्ते और सरकारी आवास की कमी लंबे समय से बड़ी समस्या बनी हुई है. कम आय वाले लोगों के लिए उपलब्ध सोशल हाउसिंग का हिस्सा बेहद कम है.
किराए में बढ़ोतरी का दबाव खासतौर पर युवाओं और कम आय वाले परिवारों पर पड़ा है. कुछ मामलों में किराया औसत युवा आय के लगभग पूरे हिस्से तक पहुंचने की बात सामने आई है.
स्पेन के केंद्रीय बैंक ने भी आवास की आपूर्ति और मांग के बीच बढ़ते अंतर को लेकर चिंता जताई है. अगर निर्माण और उपलब्धता की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में घरों की कमी और बढ़ सकती है.
अब चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता है घर का किराया
87 वर्षीय मारिया अबास्कल की कहानी ने स्पेन के आवास संकट को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है. सरकार की ओर से राहत देने की कोशिशों को संसद में समर्थन न मिलना और उसके बाद समय से पहले चुनाव का ऐलान इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना देता है.
अब 29 नवंबर 2026 के चुनाव में महंगा किराया, घरों की कमी और किराएदारों की सुरक्षा जैसे मुद्दे मतदाताओं के लिए अहम बन सकते हैं.

