France Student Protest: शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर छात्र, 24 स्कूलों में आगजनी; हजारों गिरफ्तार
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब देशव्यापी रूप ले चुका है। सितंबर में शुरू हुए इस प्रदर्शन में हाई स्कूल और विश्वविद्यालयों के छात्र शामिल हो गए हैं। छात्रों का आरोप है कि स्कूलों में बढ़ती संख्या के बावजूद पर्याप्त शिक्षक, कक्षाएं और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
पिछले कुछ दिनों में आंदोलन के दौरान कई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आई हैं। हिंसक घटनाओं में छात्रों के घायल होने की खबरों ने सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ा दी है।
प्रदर्शन में सैकड़ों छात्र घायल
प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 190 छात्रों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब 5,060 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें बड़ी संख्या नाबालिगों की बताई गई है।
लेंस शहर में एक स्कूल के पास हुए धमाके में 15 वर्षीय छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया और उसका हाथ बुरी तरह प्रभावित हुआ। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले 14 वर्षीय ईडन नाम के छात्र के सिर पर आंसू गैस का गोला लगने की खबर सामने आई थी। घटना में उसके जबड़े में फ्रैक्चर हुआ और उसे सर्जरी करानी पड़ी।
मंगलवार को देशव्यापी प्रदर्शन की तैयारी
छात्र संगठनों ने मंगलवार को बड़े स्तर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। प्रमुख छात्र संगठन यूनियन सिंडिकेल लिसेन ने छात्रों और अन्य समर्थकों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। शिक्षकों के संगठनों ने भी प्रदर्शन में भाग लेने का समर्थन किया है।
आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के एक स्कूल से हुई थी। शुरुआत में छात्रों ने स्टाफ और संसाधनों की कमी को लेकर विरोध किया था। बाद में अन्य स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्र भी इससे जुड़ते चले गए।
स्कूलों की हालत और शिक्षकों की कमी बनी बड़ा मुद्दा
प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य शिकायत स्कूलों में बढ़ती भीड़, जर्जर इमारतों और शिक्षकों की कमी को लेकर है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के बावजूद शिक्षा व्यवस्था के संसाधनों में उसी अनुपात में विस्तार नहीं हुआ।
आंकड़ों के मुताबिक 2008 की तुलना में माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की संख्या कम हुई है, जबकि विद्यार्थियों की संख्या में करीब 2.5 लाख की वृद्धि हुई है। छात्रों का कहना है कि इसका सीधा असर पढ़ाई और स्कूलों की सुविधाओं पर पड़ रहा है।
24 स्कूलों में आगजनी और तोड़फोड़ का दावा
प्रदर्शन के दौरान स्कूलों की नाकेबंदी के अलावा कई जगह आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी हुई हैं। शिक्षा मंत्री एडुआर जॉफ्रे के मुताबिक आंदोलन शुरू होने के बाद से 24 स्कूलों में आगजनी या तोड़फोड़ हुई है।
प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने शिक्षा क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ कदमों की घोषणा की है। सरकार ने स्कूलों में बदलाव और संसाधनों को लेकर कार्रवाई का भरोसा दिया है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने हिंसा के मामलों में नरमी बरतने से इनकार किया है।
आंदोलन का राजनीतिक असर भी चर्चा में
फ्रांस में जारी छात्र आंदोलन का असर राजनीति पर भी पड़ने की चर्चा है। देश में आगामी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला तेज होने की पृष्ठभूमि में यह आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
फ्रांस का इतिहास भी बड़े छात्र आंदोलनों का गवाह रहा है। 1968 का छात्र आंदोलन बाद में व्यापक सामाजिक और श्रमिक विरोध में बदल गया था। ऐसे में मौजूदा आंदोलन के आगे किस दिशा में जाने को लेकर सरकार और राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

