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नेपाल में बाढ़ ने मचाई भारी तबाही, 157 मौतें; भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
 

नेपाल में बाढ़ ने मचाई भारी तबाही, 157 मौतें; भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ


नेपाल में बुधवार सुबह तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में आई अचानक और भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक 157 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल और चीन की सीमा से जुड़े क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया गया है।

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा, धादिंग और आसपास के जिलों में देखने को मिला। तेज बहाव में कई पुल, सड़कें, वाहन और इमारतें बह गईं। करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी है।

भूकंप के तीन मिनट बाद बढ़ा नदी का जलस्तर

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके लगभग तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ की सूचना मिली। अधिकारियों को आशंका है कि भूकंप के झटकों के कारण हिमनद या चट्टानों के खिसकने से नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा आया।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा पर लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानों के खिसकने से रसुवा जिले के तिमुरे क्षेत्र में भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इसके बाद बाढ़ त्रिशूली नदी के रास्ते आगे बढ़ी।बाढ़ का असर नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व सहित कई जिलों तक पहुंचा। प्रभावित इलाके काठमांडू से करीब 70 से 200 किलोमीटर की दूरी तक फैले हुए हैं।

तबाही के वीडियो ने दिखाई बाढ़ की भयावहता

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में तेज बहाव के साथ कीचड़, चट्टानें और मलबा बहता दिखाई दे रहा है। कई जगह पानी ने कुछ ही मिनटों में पुलों और सड़कों को अपनी चपेट में ले लिया।एक वीडियो में चार मंजिला इमारत बाढ़ के तेज बहाव में बहती नजर आई। रसुवा में एक कार पानी के तेज बहाव में बह गई। वहीं, धादिंग में बाढ़ के दबाव से एक लंबा पुल टूटकर बहता दिखाई दिया।

100 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू

अधिकारियों के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों से करीब 100 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें से लगभग 30 लोगों का इलाज काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है।नेपाल सरकार ने राहत एवं बचाव कार्य के लिए सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने आपात बैठक कर स्थिति की समीक्षा की और अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए।

133 भारतीय और 37 एनआरआई भी लापता

नेपाल सरकार के अनुसार करीब 500 लोग अभी लापता हैं। इनमें कम से कम 133 भारतीय नागरिक और 37 अप्रवासी भारतीय शामिल बताए जा रहे हैं। लापता भारतीयों में करीब 50 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं।ईशा फाउंडेशन ने भी अपने 77 सदस्यों के लापता होने की जानकारी दी है। संस्था के अनुसार ये लोग एक आव्रजन केंद्र में मौजूद थे। हालांकि, बाद में संस्था ने बताया कि उसके 495 सदस्य सुरक्षित लौट चुके हैं।तमिलनाडु के अधिकारियों ने बताया कि लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं। उत्तर प्रदेश, केरल समेत कई राज्यों ने नेपाल में फंसे भारतीयों की जानकारी जुटाने के लिए हेल्पलाइन जारी की है।लापता लोगों में अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका और नीदरलैंड समेत दो दर्जन से ज्यादा देशों के नागरिक भी शामिल हैं।

80 सुरक्षाकर्मियों का भी पता नहीं

विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग स्थानों पर करीब 80 सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं। इनमें नेपाल सेना के 44 जवान शामिल हैं। राहत दल दुर्गम और बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार तलाश अभियान चला रहे हैं।

भारत ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत कर संकट की इस घड़ी में हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। भारत की ओर से नेपाल के लिए राहत सामग्री की पहली खेप भी भेजी गई है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नेपाल की आपदा बेहद दुखद है और भारत इस मुश्किल समय में नेपाल के साथ खड़ा है। उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी बात की है। नेपाल की बाढ़ का असर सीमावर्ती भारतीय इलाकों में पड़ने की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन, राहत-बचाव दल और एनडीआरएफ को हाई अलर्ट पर रखा गया है।नेपाल में बचाव अभियान अभी जारी है और लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने का काम तेज किया गया है।
 

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