ड्रोन हमलों से बचने के लिए पाकिस्तान में मछली पकड़ने वाले जाल का सहारा, वीडियो में जाने पुलिस चौकियों पर लगाए जा रहे कई मीटर ऊंचे नेट
पाकिस्तान में ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे के बीच पुलिस और सेना ने इससे बचाव के लिए मछली पकड़ने वाले जाल का इस्तेमाल शुरू किया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के संवेदनशील इलाकों में पुलिस चौकियों और सुरक्षा ठिकानों के ऊपर कई मीटर की ऊंचाई पर बड़े-बड़े जाल लगाए जा रहे हैं। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि हमलावर ड्रोन इन जालों में फंस सकते हैं। इससे ड्रोन को सीधे सुरक्षा ठिकानों तक पहुंचने से रोका जा सकता है और हमले से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
40 से 50% तक नुकसान कम होने का दावा
पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मुताबिक, इन जालों के इस्तेमाल से ड्रोन हमले में होने वाले नुकसान को 40 से 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञ इस तरीके को पूरी तरह भरोसेमंद नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि ड्रोन तकनीक में लगातार बदलाव हो रहा है, ऐसे में केवल जाल के भरोसे सुरक्षा करना पर्याप्त नहीं हो सकता।
आतंकियों ने बदला हमले का तरीका
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जाल लगाने की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि आतंकियों ने हमले के तरीकों में बदलाव किया है। पहले जहां गोलीबारी और मोर्टार का इस्तेमाल किया जाता था, वहीं अब ड्रोन को भी हमलों में शामिल किया जा रहा है।खैबर पख्तूनख्वा के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों के ठिकाने और पुलिस चौकियां ड्रोन हमलों के संभावित निशाने माने जा रहे हैं। ऐसे में सुरक्षाकर्मी कम लागत वाले इस उपाय के जरिए ड्रोन को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञ ने बताया सस्ता और नासमझी वाला तरीका
इस उपाय पर इस्लामाबाद स्थित सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज के कार्यकारी निदेशक इम्तियाज गुल ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे नासमझी वाला सस्ता तरीका बताया है।सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रोन से निपटने के लिए केवल भौतिक अवरोध पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए आधुनिक निगरानी और ड्रोन-रोधी तकनीक की भी जरूरत होती है। फिलहाल पाकिस्तान के संवेदनशील इलाकों में इन जालों को सुरक्षा के अतिरिक्त उपाय के तौर पर लगाया जा रहा है।

