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अमेरिका में अवैध भारतीय प्रवासियों में खौफ! 30 हजार ने छोड़ा काम, फल और सब्जियों के दाम आसमान छूने की आशंका

अमेरिका में अवैध भारतीय प्रवासियों में खौफ! 30 हजार ने छोड़ा काम, फल और सब्जियों के दाम आसमान छूने की आशंका

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का असर अब खेती-किसानी पर भी दिखाई देने लगा है। कैलिफोर्निया में करीब 30 हजार भारतीय मजदूरों के खेती का काम छोड़ने की खबर है। इनमें से कई मजदूरों के पास अमेरिका में रहने और काम करने के जरूरी दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे में इमिग्रेशन एजेंसी ICE की छापेमारी और हिरासत में लिए जाने के डर से मजदूर खेतों में जाने से बच रहे हैं।इसका असर अमेरिकी कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। रिपोर्ट के मुताबिक, खेतों में मजदूरों की कमी बनी रही तो फल और सब्जियों की कीमतों में 30 से 32 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, यह संभावित अनुमान है, कीमतों में इतनी बढ़ोतरी होना अभी निश्चित नहीं है।

कैलिफोर्निया में ICE की कार्रवाई से मजदूरों में डर

कैलिफोर्निया अमेरिका के प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां बड़े पैमाने पर फल, सब्जियां और दूसरी फसलें उगाई जाती हैं। खेती के कई कामों के लिए बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत होती है, जिनमें प्रवासी श्रमिकों की अहम भूमिका है।रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में इमिग्रेशन एजेंसी ICE की कार्रवाई तेज होने के बाद हजारों खेत मजदूरों को हिरासत में लिया गया है। कुछ लोगों को अमेरिका से वापस भी भेजा गया है।

कैलिफोर्निया में डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने राज्य सरकार पर अवैध प्रवासियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। इसके बाद राज्य में इमिग्रेशन कार्रवाई को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ा है।छापेमारी के डर से कई मजदूर काम पर जाने से बच रहे हैं। इसका असर केवल उनकी कमाई पर नहीं, बल्कि किसानों की फसल तैयार करने और समय पर बाजार तक पहुंचाने की क्षमता पर भी पड़ सकता है।

अमेरिका में करीब एक लाख भारतीय खेती से जुड़े काम करते हैं

अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं। इनमें खेती और कृषि से जुड़े काम करने वाले मजदूर भी शामिल हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका में लगभग एक लाख भारतीय कृषि क्षेत्र में काम करते हैं।कैलिफोर्निया से लेकर कंसास जैसे राज्यों तक खेतों में मजदूरों की कमी की शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। फसल की बुवाई, देखभाल, कटाई और पैकिंग जैसे कामों में श्रमिकों की जरूरत होती है। अगर पर्याप्त मजदूर उपलब्ध नहीं होते, तो किसानों को फसल की कटाई में देरी और उत्पादन के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।राष्ट्रपति ट्रम्प अपनी इमिग्रेशन नीति के तहत अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों को देश से निकालने की कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि बताते रहे हैं। लेकिन इस नीति के आर्थिक प्रभावों को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

छापों से बचने के लिए काम बदल रहे भारतीय मजदूर

रिपोर्ट के मुताबिक, ICE की कार्रवाई के डर से कुछ भारतीय मजदूरों ने खेती छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में काम करना शुरू कर दिया है। इनमें पेट्रोल पंप, किराना दुकान और निर्माण क्षेत्र से जुड़े काम शामिल हैं।कुछ मजदूर मैक्सिको भी चले गए हैं, हालांकि उनकी संख्या सीमित बताई गई है। मैक्सिको में खेती के काम के लिए मिलने वाली मजदूरी अमेरिका की तुलना में कम होने के कारण वहां जाना हर मजदूर के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं है।दूसरी तरफ, खेतों में काम करने वाले मजदूरों की कमी से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खासकर उन फसलों को समय पर काटना जरूरी होता है, जो पकने के बाद जल्दी खराब हो जाती हैं।

फल और सब्जियों की कीमतें क्यों बढ़ सकती हैं?

खेती में मजदूरों की कमी होने पर फसल की कटाई और पैकिंग में देरी हो सकती है। इससे उत्पादन का एक हिस्सा खराब होने या बाजार तक समय पर नहीं पहुंचने का खतरा रहता है।अगर किसानों को मजदूर नहीं मिलते, तो उन्हें अधिक मजदूरी देकर दूसरे श्रमिकों को बुलाना पड़ सकता है। इससे खेती की लागत बढ़ सकती है। कुछ परिस्थितियों में यह बढ़ी हुई लागत उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकती है।

स्ट्रॉबेरी जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों पर इसका असर अधिक पड़ सकता है, क्योंकि इन्हें सही समय पर तोड़कर बाजार तक पहुंचाना जरूरी होता है।हालांकि, फलों और सब्जियों की कीमतों में वास्तविक बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि मजदूरों की कमी कितनी गंभीर रहती है, किसान कितने वैकल्पिक श्रमिक जुटा पाते हैं और बाजार में मांग व आपूर्ति की स्थिति कैसी रहती है।

बिना वकील के अपना पक्ष रखना मुश्किल

अमेरिका में इमिग्रेशन मामलों का सामना कर रहे लोगों के पास कुछ कानूनी अधिकार होते हैं। लेकिन इन अधिकारों का इस्तेमाल करना कई प्रवासियों के लिए मुश्किल हो सकता है, खासकर तब जब उनके पास वकील रखने के लिए पर्याप्त पैसे न हों।रिपोर्ट में पॉलिटिको के शोध का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि 40 से अधिक अदालतें करीब 5,000 प्रवासियों के पक्ष में फैसला सुना चुकी हैं। इसके बावजूद इमिग्रेशन मामलों में कानूनी सहायता हासिल करना कई लोगों के लिए चुनौती बना हुआ है।कानूनी प्रक्रिया की जानकारी और पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने के कारण कुछ प्रवासियों को अपना पक्ष प्रभावी तरीके से रखने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे मामलों में हिरासत और देश से निकाले जाने का डर उनके रोजगार और पारिवारिक जीवन को भी प्रभावित करता है।

ट्रम्प की चुनावी रणनीति और खेती पर असर

मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर टॉम जुराविच के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यावधि चुनावों से पहले प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई राजनीतिक समर्थन जुटाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।ट्रम्प प्रशासन अवैध प्रवासियों को देश से निकालने को अपनी प्रमुख नीतियों में शामिल करता रहा है। लेकिन कृषि क्षेत्र में प्रवासी मजदूरों की भूमिका को देखते हुए इस कार्रवाई के आर्थिक परिणामों पर सवाल उठ रहे हैं।

अमेरिका के कई कृषि क्षेत्रों में लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया से आए मजदूर काम करते हैं। कई श्रमिक अपने मूल देशों की तुलना में अमेरिका में बेहतर कमाई करते हैं, जबकि कुछ कृषि नौकरियों में उनकी मजदूरी अमेरिकी कर्मचारियों की तुलना में कम हो सकती है।रिपोर्ट में अमेरिकी कृषि क्षेत्र को सालाना करीब 6 लाख करोड़ रुपये तक के संभावित नुकसान का अनुमान भी बताया गया है। हालांकि, इस आंकड़े का आधार और वास्तविक नुकसान कितना होगा, इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

अमेरिकी खेती प्रवासी मजदूरों पर कितनी निर्भर है?

नेशनल एग्रीकल्चरल वर्कर्स सर्वे के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका के खेतों में काम करने वाले लगभग 45 प्रतिशत मजदूर दूसरे देशों से आए हैं।रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पिछले साल किसानों ने खेतों में मजदूरों की भर्ती के लिए करीब 4.15 लाख पद निकाले थे, लेकिन इन नौकरियों के लिए केवल 182 श्वेत लोगों ने आवेदन किया।इन आंकड़ों से जुड़े सर्वेक्षण की अवधि, नौकरी के प्रकार और आवेदकों की श्रेणी को ध्यान में रखना जरूरी है। फिर भी, अमेरिकी खेती में प्रवासी श्रमिकों की भूमिका को लेकर यह मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है।

आगे क्या होगा?

अमेरिका में इमिग्रेशन कार्रवाई और कृषि क्षेत्र की जरूरतों के बीच टकराव बढ़ने की आशंका है। यदि मजदूरों की कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो किसानों की लागत बढ़ सकती है, फसल की कटाई प्रभावित हो सकती है और कुछ कृषि उत्पादों की आपूर्ति घट सकती है।वहीं, ट्रम्प प्रशासन के सामने अपनी इमिग्रेशन नीति लागू करने के साथ कृषि क्षेत्र की श्रमिक जरूरतों को पूरा करने की चुनौती भी रहेगी।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका में खेतों के लिए पर्याप्त मजदूर उपलब्ध हो पाएंगे या प्रवासी श्रमिकों के खिलाफ कार्रवाई का असर खाद्य कीमतों और किसानों की कमाई पर और गहरा होगा।

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