जिस सुपरसोनिक मिसाइल ने नूर खान को सेकेंड्स में बनाया कबाड़, कोई नहीं जानता उसका सच, जानिए ब्रह्मोस बनने की रोचक कहानी और पूरा सफर
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की रक्षा क्षमता को दुनिया ने देखा। पाकिस्तान ने शुरू में दावा किया था कि उसने चार दिन की लड़ाई जीत ली है। लेकिन अब लगता है कि उसकी पोल खुल रही है। पाकिस्तान के नेता और रक्षा विशेषज्ञ अपने देश की सेना के लिए दरवाजे खोल रहे हैं। वहां के विशेषज्ञ मान रहे हैं कि भारत की रक्षा तैयारी पाकिस्तान से कहीं आगे है। उन्हें समझ आ गया है कि भारतीय सेना ने जो तरीका अपनाया, उससे पाकिस्तानी सेना परास्त हो गई। अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने माना है कि भारत की ब्रह्मोस मिसाइल के सामने पाकिस्तानी सेना बेबस थी। हालांकि ब्रह्मोस मिसाइल के आगे पूरी दुनिया नतमस्तक है। जानिए इस मिसाइल की क्षमताओं के बारे में और यह कितनी ताकतवर है।
शहबाज के सलाहकार ने क्या कहा, पहले जान लेते हैं
राणा सनाउल्लाह ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल दागी थी। उस समय पाकिस्तानी सेना के पास यह पता लगाने के लिए सिर्फ 30 से 45 सेकंड का समय था कि मिसाइल में परमाणु हथियार है या नहीं। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा बहुत ज्यादा था। उनके अनुसार, जब नूर खान एयरबेस पर ब्रह्मोस दागा गया, तो पाकिस्तानी सेना के पास यह जांचने के लिए कुछ ही सेकंड थे कि मिसाइल में परमाणु हथियार है या नहीं। 30 सेकंड में कुछ भी तय करना बहुत खतरनाक था।
यानी पाकिस्तान के पास जवाबी हमला करने के लिए कम समय है
इसका मतलब है कि पाकिस्तान को यह तय करने के लिए बहुत कम समय मिला कि भारत ने जो ब्रह्मोस मिसाइल दागी है, वह कितनी खतरनाक है। इतने कम समय में जवाबी हमला करना है या नहीं, यह तय करना बहुत मुश्किल था। इससे पता चलता है कि भारत की मिसाइल तकनीक कितनी आधुनिक है और पाकिस्तान इससे निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। पाकिस्तान के नेता भी अब इस बात को स्वीकार कर रहे हैं।
रूस-भारत मैत्री का बेहतरीन उदाहरण है ब्रह्मोस
eletimes.com पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ब्रह्मोस मिसाइल आधुनिक तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है। यह भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का प्रतीक है। इसे 1998 में भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस के NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया ने संयुक्त रूप से विकसित किया था। इस मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। ब्रह्मोस नाम दोनों देशों की तकनीकी ताकत को दर्शाता है।
सबसे खतरनाक विशेषता: कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है
ब्रह्मोस मिसाइल की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसे जमीन, हवा और समुद्र कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है। इसे नवंबर 2005 से भारतीय सेना में शामिल किया गया है। इसके बाद 2012 में इसका एयर-लॉन्च वर्जन भी बनाया गया। इसे Su-30MKI फाइटर जेट से लॉन्च किया जा सकता है। यह 2019 में पूरी तरह से चालू हो गई है।

