सऊदी अरब में एयरपोर्ट और तेल ठिकाने पर ड्रोन हमले, 3 की मौत; भारतीय समेत कई घायल, अमेरिकी राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश
सऊदी अरब में बुधवार देर रात एयरपोर्ट और तेल ठिकाने को निशाना बनाकर किए गए हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 लोग घायल हो गए। दम्माम स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक व्यक्ति की जान गई और आठ लोग घायल हुए। वहीं, अरामको के तेल ठिकाने पर ड्रोन हमले में नेपाल और फिलीपींस के नागरिकों की मौत हो गई। इस हमले में एक भारतीय नागरिक समेत दो लोग घायल बताए गए हैं।लगातार हो रहे हमलों के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब में तैनात अपने कुछ राजनयिकों और सरकारी कर्मचारियों को परिवारों के साथ देश छोड़ने का निर्देश दिया है। इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
एयरपोर्ट पर हमले के बाद विमानों के रास्ते बदले
सऊदी अरब की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने गुरुवार को दम्माम एयरपोर्ट पर हुए हमले की जानकारी दी। हमले में एयरपोर्ट को भी नुकसान पहुंचा है। दम्माम फारस की खाड़ी के तट पर स्थित है और बहरीन तथा कतर के करीब है।फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटरडार24 के मुताबिक, हमले के बाद विमानों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा जा रहा है। वहीं, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने दावा किया कि उसने देश के पूर्वी हिस्से में चार ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया।
अक्टूबर में सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर लगातार हमले
सऊदी अरब में अक्टूबर के दौरान एयरपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर कई हमलों की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है।
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6 अक्टूबर: जिजान और नजरान के एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने की खबर आई। सऊदी एयर डिफेंस ने एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने का दावा किया।
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7 अक्टूबर: रियाद और अभा एयरपोर्ट पर हमले हुए। अधिकारियों के मुताबिक, तीन विदेशी नागरिकों की मौत हुई और 36 लोग घायल हुए।
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8 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर एक और हमले की सूचना मिली। अधिकारियों के अनुसार, तीन सऊदी नागरिकों की मौत हुई और सरकारी एयरलाइन सऊदिया का एक विमान क्षतिग्रस्त हो गया।
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10 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले में एक भारतीय नागरिक समेत 13 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। इसके बाद एयरपोर्ट पर उड़ानें रोकनी पड़ीं।
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11 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल या ड्रोन गिरने की सूचना मिली। इस घटना में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए।
इन लगातार घटनाओं के चलते सऊदी अरब के प्रमुख हवाई अड्डों और अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच अमेरिका का बड़ा कदम
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब में तैनात अपने कुछ राजनयिकों और कर्मचारियों को परिवारों के साथ देश छोड़ने का आदेश दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अमेरिकी प्रशासन ने नागरिक एयरपोर्ट और दूसरी महत्वपूर्ण सुविधाओं पर हूती विद्रोहियों की ओर से किए जा रहे हमलों को इस फैसले की वजह बताया है।रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के आखिर में ईरान के खिलाफ शुरू हुए अमेरिकी सैन्य अभियान के शुरुआती दौर में अमेरिकी दूतावास को भी भारी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद वहां सीमित संख्या में कर्मचारी काम कर रहे थे। हाल के हफ्तों में कुछ राजनयिक दोबारा वहां लौटे थे।
UAE, जॉर्डन, कतर और बहरीन में भी सुरक्षा को लेकर चिंता
अमेरिकी राजनयिकों को सऊदी अरब से हटाने के बीच अमेरिकी मीडिया में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जॉर्डन, कतर और बहरीन से भी अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों को वापस बुलाने की खबरें आईं।न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन ईरान पर दोबारा हमले शुरू करने की योजनाओं पर विचार कर रहा है। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने दूसरे देशों से कर्मचारियों को हटाने की खबरों को गलत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश छोड़ने का निर्देश केवल सऊदी अरब में तैनात कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए जारी किया गया है।
पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी भी घटाई जा रही
NBC की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना हाल के दिनों में पश्चिम एशिया के कई सैन्य ठिकानों पर अपनी मौजूदगी धीरे-धीरे कम कर रही है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के एक प्रवक्ता ने कहा कि सैन्यकर्मियों को मिशन की तैयारी बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित रूप से अलग-अलग स्थानों पर भेजा जाता है।सऊदी अरब में एयरपोर्ट और तेल ठिकानों पर हुए हमलों, अमेरिकी कर्मचारियों को वापस बुलाने और ईरान पर संभावित नई सैन्य कार्रवाई की खबरों के बीच पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली सैन्य गतिविधियों पर सभी की नजर रहेगी।

