36 दिन के छात्र आंदोलन के आगे झुकी सरकार, वीडियो में जाने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने बताया ऐतिहासिक मोड़
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति और छात्र आंदोलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। नीट पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के बीच आया यह घटनाक्रम अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया की भी सुर्खियां बन गया है। कई वैश्विक मीडिया संस्थानों ने इसे मोदी सरकार के कार्यकाल की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना बताया है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रमुखता से छाई खबर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को BBC, The Guardian, The New York Times, CNN, Al Jazeera और Dawn समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। रिपोर्टों के अनुसार, BBC ने लिखा कि छात्र आंदोलन के लगातार बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा। वहीं The Guardian ने इसे मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में पहली ऐसी घटना बताया, जब जनदबाव के चलते किसी केंद्रीय मंत्री ने इस्तीफा दिया।
छात्र आंदोलन ने बढ़ाया सरकार पर दबाव
नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक लगातार प्रदर्शन जारी रहा। शुरुआत में आंदोलन को सीमित माना गया, लेकिन समय के साथ देश के कई राज्यों से छात्रों और युवाओं का समर्थन मिलने लगा।स्थिति तब और गंभीर हो गई जब संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर व्यापक प्रतिक्रिया सामने आई। इसके बाद विपक्ष, सामाजिक संगठनों और विभिन्न छात्र समूहों ने भी आंदोलन का समर्थन किया, जिससे सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता गया।
पहले भी किसान आंदोलन के बाद बदला था फैसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद अधिकांश विरोध प्रदर्शनों पर सख्त रुख अपनाया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इससे पहले सरकार ने केवल किसान आंदोलन के दौरान बड़ा नीति परिवर्तन किया था, जब लगभग एक वर्ष तक चले आंदोलन के बाद तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की गई थी। अब शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को भी कई विश्लेषक जनदबाव और लंबे छात्र आंदोलन के प्रभाव के रूप में देख रहे हैं।
छात्रों में जीत का माहौल
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन में शामिल छात्रों के बीच उत्साह का माहौल है। बड़ी संख्या में छात्रों ने इसे अपनी लोकतांत्रिक लड़ाई की सफलता बताया। खासकर वे युवा, जो पहली बार किसी बड़े सार्वजनिक आंदोलन का हिस्सा बने, इसे अपनी सामूहिक आवाज की जीत मान रहे हैं।हालांकि, आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनकी मांग केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है। उनका जोर परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पेपर लीक पर सख्त कानून, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और जवाबदेही तय करने जैसे मुद्दों पर भी है।
आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सबकी नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। नया शिक्षा मंत्री कौन होगा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार क्या फैसले लेगी, इस पर आने वाले दिनों में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। वहीं छात्र संगठनों ने संकेत दिए हैं कि उनकी बाकी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक वे सरकार पर दबाव बनाए रखेंगे।

