नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर तबाही, अचानक आई बाढ़ में 273 लोगों की मौत; फुटेज में जाने 1500 अब भी लापता, सैकड़ों भारतीय फंसे
नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 273 पहुंच गया है। इनमें नेपाल में 270 और तिब्बत में 3 लोगों की मौत हुई है। हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक करीब 1500 लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चला रहे हैं।
नेपाल में सबसे ज्यादा तबाही
अचानक आई बाढ़ से नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। नेपाल में ही 900 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि 32 देशों के करीब 525 विदेशी पर्यटक इस आपदा की चपेट में आए हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इन लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।आपदा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में संचार और आवागमन भी प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में रास्ते बाधित होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं। स्थानीय प्रशासन के साथ सुरक्षा बल और बचाव दल लापता लोगों को खोजने में जुटे हैं।
तिब्बत में 550 से ज्यादा लोग लापता
चीन की सरकारी वेबसाइट CCTV के अनुसार, तिब्बत में भी आपदा का व्यापक असर देखने को मिला है। यहां 550 से ज्यादा लोगों के लापता होने की सूचना है। हालांकि तिब्बत में अब तक 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान जारी है।इस प्राकृतिक आपदा के चलते बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में मौजूद 288 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें 73 लोग त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी बताए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि अब तक 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
तिब्बत में करीब 200 भारतीयों से संपर्क की कोशिश
नेपाल के अलावा तिब्बत में भी करीब 200 भारतीय नागरिकों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। भारतीय अधिकारियों की ओर से इन लोगों से लगातार संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार प्रभावित भारतीय नागरिकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है।
भूकंप नहीं, पहाड़ का हिस्सा नदी में गिरने से आई तबाही
बुधवार सुबह करीब पौने 9 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए थे। शुरुआती जानकारी में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था। हालांकि बाद में सामने आया कि इन झटकों की वजह भूकंप नहीं, बल्कि पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिरना था।पहाड़ का बड़ा हिस्सा नदी में गिरने के बाद अचानक पानी का प्रवाह बढ़ गया और बाढ़ जैसे हालात बन गए। ल्हेंदे खोला नदी भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी नदी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है। इसी नदी तंत्र में अचानक पानी बढ़ने से सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी तबाही मची और बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ गए। राहत और बचाव अभियान के बीच लापता लोगों की संख्या और नुकसान का आंकड़ा बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

