Samachar Nama
×

डेनमार्क की PM बोलीं ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे की कोशिश से नैटो होगा खत्म, फुटेज में जानें ट्रम्प के खिलाफ हुए 7 यूरोपीय देश

https://youtu.be/B7zN51HfJS4

ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं के बीच डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश की, तो इससे नैटो (NATO) सैन्य गठबंधन का अंत हो जाएगा। फ्रेडरिकसन ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी नैटो सदस्य देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पूरे गठबंधन की नींव को हिला देगी।

सोमवार रात एक टीवी इंटरव्यू में डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने कहा कि नैटो आपसी विश्वास और सामूहिक सुरक्षा के सिद्धांत पर टिका है। यदि अमेरिका जैसे प्रभावशाली सदस्य देश ने ही किसी अन्य नैटो सहयोगी या उससे जुड़े क्षेत्र पर सैन्य कार्रवाई की, तो नैटो की पूरी व्यवस्था ही खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका किसी नैटो सदस्य देश के खिलाफ सैन्य कदम उठाता है, तो फिर नैटो जैसा कोई ढांचा बचा ही नहीं रहेगा। सब कुछ खत्म हो जाएगा।”

फ्रेडरिकसन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की मंशा पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है और वह डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है। बीते कुछ वर्षों में अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड में दिलचस्पी दिखाने को लेकर कई बार बयान सामने आ चुके हैं, जिससे यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ी है।

डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड डेनमार्क और वहां के लोगों का हिस्सा है और उसके भविष्य से जुड़ा कोई भी फैसला बाहरी दबाव में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड के लोगों को अपने भविष्य का निर्णय लेने का पूरा अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।

इस मुद्दे पर यूरोप के कई बड़े देशों ने भी एकजुटता दिखाते हुए डेनमार्क और ग्रीनलैंड का समर्थन किया है। फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन और ब्रिटेन के नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा है कि ग्रीनलैंड वहां के लोगों का है। इन देशों ने साफ किया कि ग्रीनलैंड और डेनमार्क से जुड़े किसी भी फैसले का अधिकार केवल ग्रीनलैंड और डेनमार्क को ही है, किसी तीसरे देश को नहीं।

यूरोपीय नेताओं ने यह भी संकेत दिया कि ग्रीनलैंड पर किसी तरह का दबाव या हस्तक्षेप न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि नैटो जैसे सैन्य गठबंधन के भीतर गंभीर मतभेद पैदा कर सकता है। उनका कहना है कि नैटो का उद्देश्य सदस्य देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि उनके बीच टकराव पैदा करना।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फ्रेडरिकसन का बयान अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में बढ़ते तनाव को दर्शाता है। यदि ग्रीनलैंड को लेकर विवाद और गहराता है, तो इसका असर ट्रांस-अटलांटिक संबंधों और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि नैटो के भीतर इस तरह का टकराव गठबंधन की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

फिलहाल, डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों का रुख साफ है कि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह का फैसला केवल लोकतांत्रिक और आपसी सहमति के आधार पर ही होना चाहिए। आने वाले समय में इस मुद्दे पर अमेरिका की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की दिशा पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

Share this story

Tags