गाजा पीस बोर्ड पर वीटो पावर वाले देशों का अलग रुख, क्या भारत इस बोर्ड में होगा शामिल ?
डोनाल्ड ट्रंप के गाजा शांति बोर्ड को दुनिया की बड़ी शक्तियों का समर्थन नहीं मिल रहा है। फ्रांस के बाद, ब्रिटेन और चीन ने भी इसमें हिस्सा न लेने का फैसला किया है। इन तीनों देशों के पास संयुक्त राष्ट्र में वीटो पावर है। इस बीच, रूस और भारत जैसे बड़े देशों ने अभी तक गाजा शांति बोर्ड के बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बयान में कहा कि अगर उन्हें यूक्रेन युद्ध के संबंध में कोई रियायत दी जाती है, तो वे गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने पर विचार करेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा, फिलिस्तीन में शांति बहाल करने और पुनर्निर्माण में मदद करने के लिए गाजा शांति बोर्ड का गठन किया है। इसमें शामिल होने के लिए 58 देशों को आमंत्रित किया गया है। द हिंदू के अनुसार, भारत ट्रंप के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है। 30-31 जनवरी को अरब देशों के विदेश मंत्रियों के साथ एक बैठक होनी है, जिसमें इस मामले पर भी चर्चा हो सकती है। दुनिया की महाशक्तियों ने गाजा शांति बोर्ड से उस समय मुंह मोड़ लिया है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में अरब देशों के साथ मिलकर इसके गठन की आधिकारिक पुष्टि की थी।
चीन ने ट्रंप के प्रस्ताव को खारिज किया
चीन ने डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता यू जिंग ने कहा कि उन्हें इसमें शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन वे संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यू जिंग ने आगे कहा कि चीन हमेशा से सच्चे बहुपक्षवाद का पालन करता रहा है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा, "अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में चाहे जो भी बदलाव हों, चीन संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय कानून पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों की रक्षा के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध रहेगा।"
फ्रांस और ब्रिटेन ने भी झटका दिया
फ्रांस और ब्रिटेन ने भी गाजा शांति बोर्ड पर अमेरिका को झटका दिया है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों देशों को अमेरिका का सहयोगी माना जाता है। ब्रिटेन का कहना है कि इस शांति बोर्ड में रूस को आमंत्रित करना गलत है। रूस खुद युद्ध लड़ रहा है, तो वह शांति का दूत कैसे हो सकता है? फ्रांस ने नीतिगत कारणों से इसमें हिस्सा न लेने का फैसला किया है।
पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर इसमें शामिल होने का फैसला किया है, लेकिन इससे देश के अंदर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व गृह मंत्री फजल-उर-रहमान के अनुसार, जब तक नेतन्याहू इसमें शामिल हैं, गाजा शांति बोर्ड में कोई न्याय नहीं हो सकता। पाकिस्तान ने यह फैसला करके पाप किया है और अपने लोगों के साथ विश्वासघात किया है।
बड़े देश खुद को दूर क्यों कर रहे हैं?
1. डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा शांति बोर्ड बनाने में संयुक्त राष्ट्र की सहमति नहीं ली। कहा जा रहा है कि अगर गाजा पीस बोर्ड सफल होता है, तो यह UN के लिए एक झटका होगा। UN पहले से ही ट्रंप की आलोचना का निशाना बना हुआ है।
2. वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, गाजा पीस बोर्ड में सभी शक्तियां डोनाल्ड ट्रंप को दी गई हैं। ट्रंप के पास वीटो पावर है। दूसरे सदस्य सिर्फ अपनी राय दे सकते हैं। ट्रंप इस बोर्ड के लाइफटाइम चेयरमैन रहेंगे।
3. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने इस बोर्ड में शामिल होने के लिए कोई फीस नहीं लगाई है, लेकिन उन्होंने उन देशों से 1 बिलियन डॉलर की मांग की है जो स्थायी सदस्य बनना चाहते हैं।

