BREAKING:Yemen Conflict: हूतियों ने राष्ट्रपति भवन और एयरपोर्ट पर दागीं मिसाइलें, सऊदी अरब की ओर भेजा ड्रोन; बढ़ा तनाव
यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। शुक्रवार को हूती विद्रोहियों ने अदन स्थित राष्ट्रपति भवन पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके अलावा अदन एयरपोर्ट को भी निशाना बनाया गया। इसी दौरान सऊदी अरब के मदीना इलाके की ओर भेजे गए एक ड्रोन को सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने हवा में ही मार गिराने का दावा किया।
यमन सरकार के एक सैन्य प्रवक्ता के मुताबिक, राष्ट्रपति भवन और एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले किए गए। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मिसाइलें अपने लक्ष्य पर लगीं या नहीं। अधिकारियों ने किसी के मारे जाने या घायल होने की पुष्टि नहीं की है। न्यूज एजेंसी AFP के अनुसार, हमले के बाद राष्ट्रपति भवन परिसर की ओर एंबुलेंस जाती देखी गईं।
गौरतलब है कि करीब 15 दिन पहले भी राष्ट्रपति भवन परिसर पर हुए हमले में चार लोगों की मौत हुई थी।
अदन यमन की सरकार का प्रमुख केंद्र
अदन शहर यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का मुख्य ठिकाना है। साल 2014 में हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद सरकार को वहां से हटकर अदन में अपना केंद्र बनाना पड़ा।
पिछले कुछ महीनों से अदन में हमलों की घटनाएं फिर बढ़ी हैं। इससे पहले 28 अक्टूबर को हूतियों ने अदन एयरपोर्ट को निशाना बनाया था। हमले से पहले संगठन ने लोगों को इलाके से हटने की चेतावनी भी दी थी। यह एयरपोर्ट दक्षिणी यमन में राहत सामग्री और मानवीय सहायता पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण रास्ता है।
मदीना और मक्का की ओर ड्रोन भेजने का दावा
सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने मदीना के ऊपर एक ड्रोन को मार गिराया। इससे पहले गठबंधन ने मक्का के पास भी एक ड्रोन नष्ट करने की जानकारी दी थी।
मक्का में ग्रैंड मस्जिद और काबा स्थित हैं, जबकि मदीना में पैगंबर मोहम्मद की मस्जिद है। ये दोनों शहर इस्लाम के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में शामिल हैं।
सऊदी अरब ने अक्टूबर में हूतियों पर मदीना के बिजली वितरण केंद्र को निशाना बनाने का आरोप लगाया था। यह केंद्र पैगंबर की मस्जिद को बिजली आपूर्ति करता है। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने इस आरोप को खारिज कर दिया था।
हूती संगठन मक्का और मदीना को निशाना बनाने से इनकार करता रहा है। उसका कहना है कि उसके हमले सऊदी अरब के सैन्य और तेल से जुड़े ठिकानों पर केंद्रित होते हैं।
सऊदी अरब के समर्थन से लड़ रही यमन की सरकार
यमन में हूती विद्रोहियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है। सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन करता है और हूतियों के खिलाफ लड़ रही सरकारी सेनाओं को सैन्य तथा हवाई सहायता देता रहा है।
दूसरी ओर, ईरान पर हूती विद्रोहियों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं। इस वजह से यमन का संघर्ष क्षेत्रीय राजनीति और सऊदी-ईरान तनाव से भी जुड़ा हुआ है।
राष्ट्रपति भवन और एयरपोर्ट पर ताजा हमलों से यमन में हालात और बिगड़ने की आशंका है। हालांकि, हमलों के नुकसान और आगे की सैन्य कार्रवाई को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
2015 से जारी है सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष
यमन में संघर्ष की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए पिछले घटनाक्रम पर नजर डालना जरूरी है।
- 2014: हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को वहां से हटना पड़ा।
- 2015: सऊदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। इसका उद्देश्य यमन की सरकार को दोबारा सत्ता में लाना था।
- इसके बाद: कई वर्षों तक सऊदी गठबंधन ने हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए, लेकिन विद्रोहियों को पूरी तरह पीछे नहीं धकेला जा सका।
- मौजूदा स्थिति: हूती अब भी यमन के बड़े हिस्से में प्रभाव रखते हैं और समय-समय पर मिसाइल तथा ड्रोन हमलों के जरिए सऊदी अरब को चुनौती देते रहे हैं।
आधुनिक हथियारों के बावजूद हूतियों को क्यों नहीं हरा पाया सऊदी अरब?
सऊदी अरब के पास आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल और मजबूत सैन्य संसाधन हैं। उसे अमेरिका से भी हथियार और रक्षा उपकरण मिलते रहे हैं। इसके बावजूद 2015 से जारी सैन्य अभियान में हूतियों को पूरी तरह हराना आसान साबित नहीं हुआ।
इसके पीछे कई वजहें हैं:
सस्ते ड्रोन और मिसाइल: हूती अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल करते हैं। इन्हें रोकने के लिए सऊदी अरब को कई बार महंगे एयर डिफेंस इंटरसेप्टर इस्तेमाल करने पड़ते हैं। इससे रक्षा पर खर्च बढ़ता है।
पहाड़ी इलाका: यमन का बड़ा हिस्सा पहाड़ी और दुर्गम है। ऐसे क्षेत्रों में विद्रोहियों के ठिकानों का पता लगाना और उन पर प्रभावी कार्रवाई करना मुश्किल होता है।
जमीनी अभियान का जोखिम: हूतियों को पूरी तरह हटाने के लिए बड़े स्तर पर जमीनी सैन्य कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है। इसमें सैनिकों के हताहत होने और संघर्ष के लंबे समय तक जारी रहने का खतरा है।
स्थानीय पकड़: हूती यमन के बड़े हिस्से में अपनी राजनीतिक और सैन्य पकड़ बनाए हुए हैं। इसलिए केवल हवाई हमलों से उनका प्रभाव खत्म करना मुश्किल है।
ताजा मिसाइल और ड्रोन हमलों ने एक बार फिर संकेत दिया है कि यमन का संघर्ष अभी समाप्त होने से दूर है।

