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BREAKING:तिब्बत में 5 दिन में दूसरी बार तेज भूकंप, चीन और नेपाल तक महसूस हुए झटके; हिमालयी क्षेत्र में क्यों कांपती है धरती?

तिब्बत में 5 दिन में दूसरी बार तेज भूकंप, चीन और नेपाल तक महसूस हुए झटके; हिमालयी क्षेत्र में क्यों कांपती है धरती?

तिब्बत में रविवार को 5.9 तीव्रता का भूकंप आया। इसकी गहराई जमीन से करीब 9 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई। पिछले पांच दिनों में तिब्बत में यह दूसरा बड़ा भूकंप बताया जा रहा है। इससे पहले 22 अक्टूबर को यहां 7 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 16 लोगों की मौत होने की जानकारी दी गई थी।

तिब्बत में आए भूकंप के बीच चीन के छिंगहाई क्षेत्र में भी 5.7 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। वहीं, नेपाल के बैतड़ी जिले में 4.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। फिलहाल नेपाल में आए भूकंप से किसी बड़े नुकसान की तत्काल जानकारी सामने नहीं आई है।

तिब्बत में पहले भी भूकंप से मच चुकी है तबाही

तिब्बत और इसके आसपास का हिमालयी क्षेत्र भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है। यहां समय-समय पर आने वाले शक्तिशाली भूकंप बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान कर चुके हैं।

जनवरी 2025 में तिब्बत के तिंगरी काउंटी में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। इस घटना में तिब्बत में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी। पड़ोसी नेपाल में भी 13 लोगों की जान गई थी। इसके झटके उत्तर भारत सहित दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में महसूस किए गए थे।

इससे पहले 2010 में चीन के छिंगहाई प्रांत के युशू क्षेत्र में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। इस आपदा में कम से कम 2,698 लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 300 लोग लापता हो गए थे।

आखिर तिब्बत में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप?

तिब्बत में भूकंप आने की प्रमुख वजह भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार होने वाली हलचल है। भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़ते हुए यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। इसी भूगर्भीय प्रक्रिया से हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ है।

इस टकराव के कारण जमीन के नीचे मौजूद चट्टानों में तनाव और दबाव जमा होता रहता है। जब चट्टानें अचानक खिसकती हैं या भूगर्भीय दरारों में हलचल होती है, तो ऊर्जा निकलती है और धरती कांपने लगती है। इसी प्रक्रिया को भूकंप कहा जाता है।

हिमालय और तिब्बत के आसपास सक्रिय भूगर्भीय संरचनाओं के कारण इस क्षेत्र में भूकंप का खतरा बना रहता है।

नेपाल के बैतड़ी जिले में भी महसूस हुए झटके

नेपाल के भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र के अनुसार, रविवार दोपहर बैतड़ी जिले के दिलासैनी इलाके में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया।

बैतड़ी जिला नेपाल के सुदूरपश्चिम प्रांत में भारत की सीमा के पास स्थित है। भूकंप के झटके बैतड़ी और दार्चुला जिलों के आसपास के क्षेत्रों में भी महसूस किए गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं थी।

नेपाल में बाढ़ ने भी मचाई थी तबाही

नेपाल हाल के महीनों में प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता रहा है। खबर में दिए गए विवरण के मुताबिक, 26 अगस्त को चीन के तिब्बत से लगी सीमा के पास आई बाढ़ का असर भोटेकोशी नदी और आसपास के इलाकों में पड़ा था।

तेज बहाव के कारण घरों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा था। हालांकि, इस घटना में 1,455 मौतों और 5,285 लोगों के लापता होने के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

नेपाल में भूकंप का खतरा क्यों ज्यादा है?

नेपाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के बीच टकराव लगातार जारी है। इस कारण देश के कई हिस्सों में भूकंप आने का खतरा अधिक रहता है।

भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण, भवनों की मजबूती, आपदा प्रबंधन और समय पर चेतावनी व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हैं। तिब्बत, नेपाल और हिमालय के आसपास लगातार दर्ज हो रही भूगर्भीय हलचल इस क्षेत्र में आपदा से निपटने की तैयारी की जरूरत को रेखांकित करती है।

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