BREAKING: इजराइल में राजनीतिक गतिरोध! बहुमत न मिलने पर सीधे पीएम चुनने के फॉर्मूले पर विचार, विपक्ष की नई चाल
इजराइल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ देखने को मिल रहा है। चुनाव के बाद किसी भी खेमे को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से सरकार गठन को लेकर गतिरोध पैदा हो गया है। इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के विरोधी दलों के बीच प्रधानमंत्री का सीधे चुनाव कराने के नए प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। इस फॉर्मूले को राजनीतिक संकट से बाहर निकलने के संभावित रास्ते के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, अभी यह केवल एक प्रस्ताव है, कोई लागू हो चुका फैसला नहीं।
बहुमत के बिना सरकार बनाना बनी बड़ी चुनौती
इजराइल की 120 सदस्यीय संसद यानी नेसेट में सरकार बनाने के लिए बहुमत का समर्थन जरूरी होता है। हालिया चुनाव के बाद नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि विपक्षी खेमे के पास कुल 67 सीटें बताई गई हैं। लेकिन विपक्ष के भीतर अलग-अलग विचारधाराओं और अरब दलों के साथ सहयोग को लेकर मतभेद सरकार गठन की राह में बड़ी बाधा बने हुए हैं।
ऐसे में विपक्ष के सामने चुनौती केवल नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की नहीं, बल्कि एक स्थिर सरकार बनाने की भी है।
क्या है सीधे प्रधानमंत्री चुनने का प्रस्ताव?
विपक्षी खेमे में जिस विकल्प पर चर्चा हो रही है, उसके तहत मतदाता संसद के चुनाव से अलग सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव कर सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकार गठन में पैदा होने वाले गतिरोध को दूर करने का रास्ता तलाशना है।
हालांकि, इजराइल की मौजूदा व्यवस्था में प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार को संसद में विश्वास मत हासिल करना होता है। सीधे प्रधानमंत्री के चुनाव की व्यवस्था लागू करने के लिए संबंधित बुनियादी कानून में संशोधन की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए संसद में कम से कम 61 सदस्यों का समर्थन आवश्यक होगा।
इसलिए यह प्रस्ताव राजनीतिक चर्चा से आगे बढ़कर कानून बनेगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
नेतन्याहू के सामने क्या हैं चुनौतियां?
बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी संसद में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, लेकिन उनका गठबंधन बहुमत के आंकड़े से पीछे है। दूसरी ओर, विपक्ष के पास अधिक सीटें होने के बावजूद सभी दलों को एक साथ लाना आसान नहीं है।
विपक्ष के सामने अरब दलों के समर्थन को लेकर सहमति बनाने, संभावित गठबंधन के साझा एजेंडे पर फैसला करने और स्थिर सरकार का रास्ता निकालने जैसी चुनौतियां हैं। यदि कोई भी पक्ष आवश्यक समर्थन जुटाने में नाकाम रहता है, तो सरकार गठन की प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है और नए चुनाव की संभावना भी बनी रह सकती है।
आगे क्या होगा?
इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग की भूमिका सरकार गठन की प्रक्रिया में अहम होगी। आधिकारिक चुनाव परिणामों के बाद संबंधित दलों से विचार-विमर्श और सरकार बनाने के लिए उम्मीदवार को अवसर देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
फिलहाल सीधे प्रधानमंत्री के चुनाव का प्रस्ताव इजराइल के राजनीतिक संकट का संभावित विकल्प है, लेकिन इसके लागू होने को लेकर कई कानूनी और राजनीतिक बाधाएं हैं।

