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BREAKING: भारत से अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने का बड़ा षड्यंत्र! मुंबई के शख्स का कनेक्शन आया सामने; हर पोस्ट के मिलते थे $15

BREAKING: भारत से अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने का बड़ा षड्यंत्र! मुंबई के शख्स का कनेक्शन आया सामने; हर पोस्ट के मिलते थे $15

अमेरिका में चुनाव के दौरान मतदाताओं की राय प्रभावित करने के लिए सोशल मीडिया पर कथित तौर पर एक अभियान चलाया गया। इसमें आम लोगों के वीडियो के जरिए एक राजनीतिक उम्मीदवार का समर्थन किया गया। वीडियो इस तरह तैयार और पोस्ट किए गए थे, जैसे लोग अपनी मर्जी से उम्मीदवार की तारीफ कर रहे हों। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, इन वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाने के लिए अकाउंट संचालकों को पैसे दिए जा रहे थे। इस अभियान में भारत से संचालित कई अकाउंट्स की भूमिका सामने आने का दावा किया गया है।

हर पोस्ट के मिल रहे थे करीब 15 डॉलर

रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई में रहने वाले आयुष जैन ने बताया कि उन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर वीडियो पोस्ट करने के लिए हर पोस्ट के करीब 15 डॉलर यानी लगभग 1,400 रुपये दिए गए। भुगतान का एक हिस्सा वीडियो को मिलने वाले व्यूज पर भी निर्भर था। कथित तौर पर हर 1,000 व्यूज के बदले 1 से 5 डॉलर तक दिए जाते थे।वीडियो में लोग महंगाई, रोजी-रोटी और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय देते हुए एक उम्मीदवार का समर्थन करते दिखाई देते थे। हालांकि, दर्शकों को यह जानकारी नहीं दी गई थी कि इन पोस्ट की पहुंच बढ़ाने के लिए भुगतान किया जा रहा था।

मिशिगन के चुनाव से जुड़ा बताया गया मामला

रिपोर्ट के अनुसार, यह अभियान अमेरिकी राज्य मिशिगन में 4 अगस्त को हुए डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी चुनाव से पहले सामने आया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर कम से कम 36 वीडियो पोस्ट किए गए, जिन्हें लाखों बार देखा गया।इन वीडियो में मुख्य रूप से सांसद हेली स्टीवंस का समर्थन किया गया था। वह डॉ. अब्दुल एल-सैयद के खिलाफ चुनाव लड़ रही थीं। हालांकि, चुनाव में एल-सैयद ने जीत हासिल की।रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि इन वीडियो को फैलाने के पीछे स्टीवंस के चुनाव अभियान या उनके समर्थक समूहों का हाथ होने का कोई सबूत सामने नहीं आया।

पेंसिल्वेनिया की कंपनी से जुड़ा नेटवर्क

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य की 'लुमिना क्लिपर्स' नामक कंपनी ने आयुष जैन को इस काम के लिए नियुक्त किया था। कंपनी पर सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए पोस्ट की पहुंच बढ़ाने का काम करने का आरोप है।कंपनी चलाने वाले राइस मैके ने कथित तौर पर मिशिगन के वीडियो फैलाने में अपनी कंपनी की भूमिका स्वीकार की। हालांकि, उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि इस अभियान के पीछे किसने पैसा लगाया था और कुल कितना खर्च किया गया।

रिसर्चर्स ने 28 अकाउंट्स की पहचान की

इस अभियान का पता लगाने वाले एक रिसर्च समूह ने एक्स पर ऐसे 28 अकाउंट्स की पहचान की, जिनके जरिए कथित तौर पर भुगतान लेकर वीडियो पोस्ट किए जा रहे थे। इन पोस्ट को 70 लाख से ज्यादा बार देखे जाने का दावा किया गया है।बाद में क्लेमसन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर भी ऐसे अकाउंट्स की पहचान की। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ अकाउंट पहले चीन से जुड़े कथित बॉट नेटवर्क अभियानों में भी सामने आए थे।

शोधकर्ताओं ने पाया कि ये अकाउंट आमतौर पर मनोरंजन और कार्टून से जुड़ा कंटेंट पोस्ट करते थे, लेकिन चुनाव के दौरान अचानक राजनीतिक वीडियो साझा करने लगे। चुनाव के बाद भी कुछ अकाउंट्स से राजनीतिक पोस्ट जारी रहीं, जिनमें कैलिफोर्निया के रिपब्लिकन गवर्नर पद के उम्मीदवार स्टीव हिल्टन के समर्थन वाले वीडियो भी शामिल थे।

सोशल मीडिया पर चुनावी प्रचार को लेकर उठे सवाल

इस मामले ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक प्रचार की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अगर किसी उम्मीदवार के समर्थन में वीडियो पोस्ट करने के लिए पैसे दिए जाते हैं और दर्शकों को इसकी जानकारी नहीं होती, तो आम लोगों के लिए वास्तविक जनसमर्थन और भुगतान किए गए प्रचार के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है।हालांकि, वीडियो के पीछे पैसा लगाने वाले व्यक्ति या संगठन की पहचान अब तक स्पष्ट नहीं हुई है। इसलिए इस अभियान को किसी खास उम्मीदवार या राजनीतिक दल से जोड़ने से पहले ठोस सबूत जरूरी हैं।

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