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एक आवारा कुत्ते को लेकर आमने-सामने आए ब्राजील और मेक्सिको, वीडियो में जाने ‘कैरामेलो’ पर छिड़ी अनोखी बहस

एक आवारा कुत्ते को लेकर आमने-सामने आए ब्राजील और मेक्सिको, वीडियो में जाने ‘कैरामेलो’ पर छिड़ी अनोखी बहस

ब्राजील और मेक्सिको के बीच इन दिनों किसी राजनीतिक या आर्थिक मुद्दे को लेकर नहीं, बल्कि एक भूरे रंग के आवारा कुत्ते को लेकर विवाद छिड़ गया है। इस कुत्ते का नाम कैरामेलो (Caramelo) है, जिसे ब्राजील में सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। अब मेक्सिको के एक फैसले ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बहस का रूप दे दिया है।

ब्राजील में खास पहचान रखता है कैरामेलो

ब्राजील के लोगों के लिए कैरामेलो सिर्फ एक आवारा कुत्ता नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। देश की सड़कों, मोहल्लों और कस्बों में बड़ी संख्या में दिखाई देने वाले इस भूरे रंग के कुत्ते को ब्राजीलियाई समाज में खास स्थान प्राप्त है।

कई लोग मानते हैं कि कैरामेलो ब्राजील की पहचान का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा है जितना फुटबॉल, सांबा संगीत और कार्निवल उत्सव। सोशल मीडिया पर भी कैरामेलो से जुड़े मीम्स और तस्वीरें काफी लोकप्रिय हैं।

मेक्सिको के फैसले से शुरू हुआ विवाद

विवाद तब शुरू हुआ जब मेक्सिको ने इसी साल अप्रैल में कैरामेलो को अपनी स्थानीय नस्ल के रूप में मान्यता देने का फैसला किया। इस घोषणा के बाद ब्राजील में नाराजगी फैल गई और बड़ी संख्या में लोगों ने इसका विरोध किया।

ब्राजीलियाई नागरिकों का कहना है कि कैरामेलो उनकी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है और उसे किसी दूसरे देश की स्थानीय नस्ल घोषित करना उचित नहीं है। उनका मानना है कि इससे उनकी पहचान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रतीक उनसे छीनने की कोशिश की जा रही है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

मामले ने सोशल मीडिया पर भी जोर पकड़ लिया है। दोनों देशों के लोग अपने-अपने पक्ष में तर्क दे रहे हैं। ब्राजील के कई यूजर्स का कहना है कि कैरामेलो की लोकप्रियता और पहचान सबसे पहले ब्राजील में बनी, इसलिए इसे ब्राजील की सांस्कृतिक धरोहर माना जाना चाहिए।

वहीं, मेक्सिको में कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि इस तरह के कुत्ते उनके यहां भी लंबे समय से पाए जाते हैं और उन्हें स्थानीय नस्ल का दर्जा देना गलत नहीं है।

सांस्कृतिक पहचान का बन गया मुद्दा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ एक कुत्ते की नस्ल तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और विरासत से जुड़ा भावनात्मक विषय बन गया है। यही वजह है कि एक साधारण दिखने वाला आवारा कुत्ता अब दो देशों के बीच चर्चा और बहस का केंद्र बन गया है।

फिलहाल, कैरामेलो को लेकर शुरू हुई यह अनोखी जंग सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय मीडिया तक सुर्खियों में बनी हुई है, और दोनों देशों के लोग अपने-अपने दावे मजबूती से पेश कर रहे हैं।

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