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नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, वीडियो में देंखे पूर्व प्रधानमंत्रियों से लेकर राष्ट्रपति तक जांच के दायरे में

नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, वीडियो में देंखे पूर्व प्रधानमंत्रियों से लेकर राष्ट्रपति तक जांच के दायरे में

नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और व्यापक कार्रवाई शुरू होने की खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार ने एक 5 सदस्यीय न्यायिक पैनल का गठन किया है, जिसे देश में सार्वजनिक पदों पर रहे बड़े नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति और कार्यकाल की गहन जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।सूत्रों के अनुसार, यह जांच वर्ष 2006 तक सार्वजनिक पदों पर रहे व्यक्तियों की संपत्ति और आय के स्रोतों की पड़ताल करेगी। इसके साथ ही 2005 के बाद के सभी सात पूर्व प्रधानमंत्रियों को भी इस जांच के दायरे में शामिल किया गया है। इनमें Sushil Koirala, Pushpa Kamal Dahal, Madhav Kumar Nepal, Jhalanath Khanal, Baburam Bhattarai, KP Sharma Oli और Sher Bahadur Deuba जैसे प्रमुख राजनीतिक चेहरे शामिल हैं।

इसके अलावा, देश की दो अंतरिम सरकारों के प्रमुख रहे Khil Raj Regmi और Sushila Karki भी जांच के दायरे में आ गए हैं। इस कदम को नेपाल की राजनीति में एक अभूतपूर्व कार्रवाई माना जा रहा है, क्योंकि इसमें लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक हस्तियां शामिल हो गई हैं।जांच केवल पूर्व प्रधानमंत्रियों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व राजा Gyanendra Shah के कार्यकाल से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही नेपाल के तीन पूर्व राष्ट्रपतियों—Ram Baran Yadav, Bidya Devi Bhandari और मौजूदा राष्ट्रपति Ram Chandra Poudel—को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

सरकारी जानकारी के अनुसार, यह जांच अभियान सिर्फ शीर्ष नेतृत्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें मंत्री, संवैधानिक पदों पर रहे 100 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी और कई उच्च स्तरीय नौकरशाह भी शामिल होंगे। जांच समिति को संपत्ति के स्रोत, आय-व्यय के रिकॉर्ड और कार्यकाल के दौरान संभावित भ्रष्टाचार मामलों की विस्तृत जांच करने का अधिकार दिया गया है।इस फैसले को नेपाल में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के सबसे बड़े कदमों में से एक माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता लाना और वर्षों से लंबित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच को आगे बढ़ाना है।

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की व्यापक जांच से देश की राजनीति में बड़ा तनाव पैदा हो सकता है। विपक्षी दलों ने भी इस कदम पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है, कुछ इसे ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई करार दे रहे हैं। फिलहाल, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह जांच कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ती है और इसका नेपाल की राजनीतिक स्थिरता पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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