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कौन हैं नाइजेल फराज? ब्रिटेन के PM दावेदार का पाकिस्तान पर कड़ा रुख, जाने भारत को लेकर क्या है राय ? 

कौन हैं नाइजेल फराज? ब्रिटेन के PM दावेदार का पाकिस्तान पर कड़ा रुख, जाने भारत को लेकर क्या है राय ? 

कीर स्टारमर के इस्तीफ़े के बाद, नाइजेल फ़ाराज ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में एक मज़बूत दावेदार के तौर पर उभरे हैं। 'रिफॉर्म यूके' के नेता फ़ाराज, इमिग्रेशन (प्रवास) पर अपने कड़े रुख़ के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है और वह प्रधानमंत्री बनते हैं, तो विदेशियों पर पाबंदियां और कड़ी कर दी जाएंगी। उन्होंने ख़ास तौर पर पाकिस्तानी समुदाय का ज़िक्र किया है और भारत के साथ मज़बूत रिश्तों की वकालत भी की है।

**नाइजेल फ़ाराज ने क्या कहा?**

एक इंटरव्यू में नाइजेल फ़ाराज ने कहा, "ब्रिटेन में हमारी समस्या भारतीय समुदाय से नहीं, बल्कि पाकिस्तानी समुदाय से है; बड़ी संख्या में लोग यहां आए हैं और मुख्यधारा में घुलने-मिलने से बच रहे हैं।" उन्होंने कहा कि अगर 'रिफॉर्म यूके' सत्ता में आती है, तो इमिग्रेशन नीतियों में बदलाव किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार कुशल लोगों को प्राथमिकता देते हुए प्रवासियों की संख्या को सीमित करने पर ध्यान देगी।

**फ़ाराज ने माइग्रेशन को एक अहम मुद्दा बताया**

उन्होंने टिप्पणी की, "माइग्रेशन ब्रिटेन के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है; देश अपनी बढ़ती आबादी को संतुलित करने में नाकाम रहा है। बुनियादी सुविधाओं पर दबाव एक बड़ी समस्या है।" फ़ाराज ने आगे कहा, "हमें ऐसे कुशल लोगों की ज़रूरत है जो यहां आएं, कानून का पालन करें, टैक्स दें और काम करें।"

**भारत के साथ रिश्तों का ज़िक्र**

भारतीयों की तारीफ़ करते हुए, दक्षिणपंथी नेता ने उनकी कड़ी मेहनत, सामाजिक मेल-जोल और उद्यमी भावना जैसे गुणों का ज़िक्र किया। उन्होंने भारत और यूके के बीच मज़बूत रिश्तों का समर्थन किया, उन्हें जारी रखने की वकालत की और दोनों देशों के बीच हुए व्यापार समझौते का स्वागत किया।

कीर स्टारमर के इस्तीफ़े के बाद, नाइजेल फ़ाराज यूके के प्रधानमंत्री पद की दौड़ में एक प्रमुख व्यक्ति के तौर पर उभरे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री की भूमिका संभालने को लेकर उम्मीद जताई है और दावा किया है कि उनकी पार्टी का एजेंडा वोटरों को पसंद आ रहा है। कंज़र्वेटिव और लेबर, दोनों सरकारों की आलोचना करते हुए फ़ाराज ने तर्क दिया कि दोनों पार्टियों की नीतियों में कोई खास फ़र्क नहीं है। दोनों ही सरकारें कोई बड़ा बदलाव लाने में नाकाम रही हैं।

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