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बांग्लादेश में 20 साल का सबसे बड़ा बिजली संकट, अस्पताल में मोबाइल टॉर्च से मरीजों की देखभाल; रोज 3500 MW तक कमी

बांग्लादेश में 20 साल का सबसे बड़ा बिजली संकट, फुटेज में देंखे अस्पताल में मोबाइल टॉर्च से मरीजों की देखभाल; रोज 3500 MW तक कमी

बांग्लादेश इन दिनों करीब दो दशक के सबसे गंभीर बिजली संकट से गुजर रहा है। देश के कई हिस्सों में रोजाना कई घंटे बिजली कटौती हो रही है। बिजली की कमी का असर आम लोगों के साथ-साथ अस्पतालों और जरूरी सेवाओं पर भी पड़ रहा है। बारिशाल के एक अस्पताल में स्थिति इतनी खराब हो गई कि बैकअप जनरेटर का डीजल खत्म होने के बाद नर्सों को मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में मरीजों की देखभाल करनी पड़ी।

रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में इस समय बिजली की मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। देश में रोजाना करीब 3 हजार से 3,500 मेगावाट तक बिजली की कमी बताई जा रही है। इसका सीधा असर बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ रहा है और कई इलाकों में निर्धारित समय के अलावा भी कटौती की स्थिति बन रही है।

अगस्त में मांग और उत्पादन में बड़ा अंतर

बांग्लादेश के बिजली संकट को आंकड़ों से समझें तो स्थिति की गंभीरता सामने आती है। अगस्त में देश में रोजाना औसतन करीब 13 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ, जबकि मांग 16 हजार मेगावाट से ज्यादा रही। यानी उत्पादन और मांग के बीच करीब 3 हजार मेगावाट का औसत अंतर रहा। बिजली की यह कमी केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। उद्योगों, अस्पतालों, कारोबार और दूसरी जरूरी सेवाओं पर भी इसका असर पड़ रहा है। लगातार बिजली कटौती के कारण लोगों को वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

अस्पताल में मोबाइल की रोशनी में मरीजों की देखभाल

बिजली संकट का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं में देखने को मिला। बारिशाल के एक अस्पताल में बैकअप जनरेटर के लिए डीजल खत्म हो गया। इसके बाद अस्पताल में बिजली नहीं रही और नर्सों को मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में मरीजों की देखभाल करनी पड़ी।यह घटना बिजली संकट के स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले असर को दिखाती है। अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, वेंटिलेटर और दूसरी मेडिकल मशीनों के लिए लगातार बिजली की जरूरत होती है। ऐसे में लंबे समय तक बिजली कटौती स्वास्थ्य सेवाओं के लिए चुनौती बन सकती है।

भारत से भी तत्काल बड़ी राहत मुश्किल

बांग्लादेश को संकट के बीच भारत से अतिरिक्त बिजली मिलने की उम्मीद है, लेकिन तत्काल बड़ी मात्रा में अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा। भारत पहले से ही बांग्लादेश को 2,656 मेगावाट से अधिक बिजली की आपूर्ति कर रहा है। अतिरिक्त बिजली देने के लिए भारत को अपनी उत्पादन क्षमता और ट्रांसमिशन व्यवस्था का भी आकलन करना होगा।ऐसे में बांग्लादेश के लिए तत्काल राहत के विकल्प सीमित नजर आ रहे हैं। बिजली की बढ़ती मांग और सीमित उत्पादन क्षमता के बीच देश को आपूर्ति और मांग के अंतर को कम करने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाने होंगे।

2022 से करीब चार गुना बड़ी कमी

बांग्लादेश पहले भी बिजली संकट का सामना कर चुका है। वर्ष 2022 में देश में बिजली की कमी करीब 750 मेगावाट तक पहुंच गई थी। मौजूदा स्थिति में 3,000 मेगावाट या उससे अधिक की कमी बताई जा रही है। यानी वर्तमान संकट में बिजली की कमी 2022 के मुकाबले करीब चार गुना तक हो गई है।लगातार कटौती और उत्पादन में कमी ने बांग्लादेश की बिजली व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब सरकार के सामने उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ईंधन की उपलब्धता, बिजली संयंत्रों की क्षमता और ट्रांसमिशन नेटवर्क को बेहतर करने की चुनौती है। आने वाले दिनों में बिजली आपूर्ति में सुधार होता है या कटौती का दौर जारी रहता है, इस पर लोगों और उद्योगों की नजर बनी हुई है।

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