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फिर लौट रहा है कोविड? तेजी से फैल रहा कोरोना का XFG वैरिएंट, जानें किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा?

भारत में इस समय कोविड के मामलों में उछाल देखने को मिल रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 10 जून को जारी आंकड़ों के अनुसार, 324 नए मामलों के कारण भारत में सक्रिय मामलों की संख्या 6815 हो गई है। इसके साथ ही, तीन राज्यों दिल्ली, झारखंड और...
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भारत में इस समय कोविड के मामलों में उछाल देखने को मिल रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 10 जून को जारी आंकड़ों के अनुसार, 324 नए मामलों के कारण भारत में सक्रिय मामलों की संख्या 6815 हो गई है। इसके साथ ही, तीन राज्यों दिल्ली, झारखंड और केरल में 3 मौतें भी हुईं। ओमीक्रॉन के सब-वेरिएंट JN.1 के अलावा, भारत में अन्य नए वेरिएंट भी हैं जो संक्रमण में वृद्धि के लिए जिम्मेदार हैं। भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) के अनुसार, भारत में अब तक नए उभरते XFG वेरिएंट के 163 मामले भी पाए गए हैं। यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि यह नया वेरिएंट कितना जोखिम पैदा कर सकता है ताकि इसकी गंभीरता को समझा जा सके। XFG वेरिएंट क्या है?

द लैंसेट जर्नल के अनुसार, XFG वेरिएंट ओमीक्रॉन सब-वेरिएंट का वंशज है, जो सबसे पहले कनाडा में पाया गया था। LF.7 और LP.8.1.2 से प्राप्त XFG वेरिएंट में चार प्रमुख स्पाइक म्यूटेशन (His445Arg, Asn487Asp, Gln493Glu, और Thr572Ile) हैं। शोध से पता चला है कि यह दुनिया भर में तेजी से फैल गया है। XFG वेरिएंट में मजबूत प्रतिरक्षा से बचने की क्षमता भी है जो वायरस को जीवित रहने और फैलने की अनुमति देती है क्योंकि यह शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली से बच सकता है।

भारत में XFG कहाँ पाया जाता है?

INSACOG के नवीनतम डेटा के अनुसार: महाराष्ट्र में XFG के सबसे अधिक मामले (89) दर्ज किए गए हैं, इसके बाद तमिलनाडु (16), केरल (15), गुजरात (11), और आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल (6 प्रत्येक) हैं। इनमें से अधिकांश मामले (159) मई 2024 में रिपोर्ट किए गए थे, जबकि अप्रैल और जून में 2-2 मामले रिपोर्ट किए गए थे।

XFG वेरिएंट पिछले वेरिएंट से किस तरह अलग है?

भारतीय वैज्ञानिक XFG पर कड़ी नज़र रख रहे हैं क्योंकि इसके स्पाइक प्रोटीन में कुछ उत्परिवर्तन हैं। यह वायरस का वह हिस्सा है जो इसे मानव कोशिकाओं से जुड़ने और उनमें प्रवेश करने में मदद करता है। ये उत्परिवर्तन इस बात को प्रभावित कर सकते हैं कि वायरस कितनी आसानी से मानव कोशिकाओं में प्रवेश करता है और यह कितनी तेज़ी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।

जबकि कुछ उत्परिवर्तन वायरस की मानव कोशिकाओं से जुड़ने की क्षमता को कम करते हैं (जिसे विशेषज्ञ ACE2 रिसेप्टर बाइंडिंग में कमी कहते हैं), अन्य उत्परिवर्तन इसे प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से बचने में मदद करते हैं, जिसका अर्थ है कि यह शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली या वैक्सीन से बच सकता है। इस संयोजन का मतलब है कि XFG पहले के वेरिएंट जितना संक्रामक नहीं है, लेकिन प्रतिरक्षा से बचने की इसकी क्षमता शरीर के लिए संक्रमण से लड़ना कठिन बना देती है। खासकर बुज़ुर्ग, लंबे समय से बीमार और बिना टीकाकरण वाले लोगों में।

कितना जोखिम हो सकता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में यह दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं है कि XFG अधिक गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने का कारण बनता है। हालाँकि, इस XYG में प्रतिरक्षा से बचने और चुपचाप फैलने की इसकी क्षमता चिंता का विषय हो सकती है अगर यह और बढ़ जाती है। हालांकि, अगर इन वेरिएंट पर बारीकी से नजर नहीं रखी गई तो ये आगे चलकर जोखिम पैदा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जितने भी वेरिएंट सामने आ रहे हैं, वे सभी ओमीक्रॉन वेरिएंट और सब-वेरिएंट हैं। भारत में इनकी वृद्धि दर कम है और मृत्यु दर भी बहुत कम है। इन वेरिएंट से कोई बड़ा खतरा नहीं जुड़ा है। हालांकि, देश में डबल सीजन (गर्मी) होने के कारण मरीजों में फ्लू जैसे लक्षण बढ़ गए हैं और इस कारण मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। वहीं, फ्लू और कोविड दोनों के लक्षण लगभग एक जैसे ही हैं, इसलिए लोग ज्यादा चिंतित हो रहे हैं। लेकिन फिलहाल डरने की जरूरत नहीं है।

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