अमेरिका–ईरान तनाव के बीच खुफिया एजेंसियों की चेतावनी: जंग के बाद और मजबूत हुआ ईरान, वीडियो में जाने वैश्विक व्यापार मार्गों पर मंडराया खतरा
अमेरिका और Iran के बीच चल रहे तनाव और हालिया समझौते के बीच एक नई खुफिया रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय चिंता को और बढ़ा दिया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन के हवाले से CNN की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हालिया संघर्ष के बाद ईरान पहले की तुलना में और अधिक शक्तिशाली स्थिति में आ गया है।CNN की रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान अब इतनी क्षमता हासिल कर चुका है कि वह जरूरत पड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है। यह वही समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और ऊर्जा व्यापार संचालित होता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट से परिचित तीन सूत्रों के अनुसार, हालिया संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं में वृद्धि हुई है, जिससे वह अब वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करने की स्थिति में आ गया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान ने ऐसी “रणनीतिक ताकत” विकसित कर ली है जो कई मामलों में परमाणु हथियारों से भी अधिक प्रभावी साबित हो सकती है, क्योंकि यह सीधे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर सकती है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसी Central Intelligence Agency सहित अन्य एजेंसियों के आकलन में यह भी कहा गया है कि यदि ईरान और पश्चिमी देशों के बीच परमाणु वार्ता विफल होती है, तो क्षेत्रीय तनाव और अधिक बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में ईरान अपने प्रभाव का उपयोग यमन में सक्रिय Ansar Allah (Houthi movement) के माध्यम से कर सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, हूती विद्रोहियों के जरिए बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में संकट पैदा किया जा सकता है। यह दूसरा महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग है जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों ही मार्गों पर तनाव उत्पन्न होता है, तो वैश्विक समुद्री व्यापार पर दोहरी मार पड़ सकती है।
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यह स्थिति न केवल ऊर्जा बाजार को अस्थिर करेगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग, तेल कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक मंदी का जोखिम भी बढ़ सकता है।हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष ने इस रिपोर्ट पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में इसे गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव और संघर्षों के बीच यह नई खुफिया रिपोर्ट वैश्विक स्थिरता को लेकर चिंता और बढ़ा रही है।

