ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिका से भारत खरीदेगा Javelin मिसाइलें, 148 एंटी-टैंक सिस्टम की डील से बढ़ेगी सेना की ताकत
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और अमेरिका के रिश्तों में कुछ मुद्दों को लेकर भले ही चर्चा तेज रही हो, लेकिन रक्षा सहयोग के मोर्चे पर दोनों देशों की साझेदारी आगे बढ़ती नजर आ रही है। भारत ने अमेरिकी Javelin एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
भारतीय सेना ने अमेरिका से 148 Javelin एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल राउंड्स खरीदने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सौदे की कुल कीमत करीब 45.7 मिलियन डॉलर बताई गई है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस डील को दोनों देशों के रक्षा संबंधों के लिए अहम बताया है।
अमेरिकी राजदूत ने बताया बड़ा कदम
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार, 28 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस डील की जानकारी साझा की। उन्होंने इसे भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि Javelin एक युद्ध में परखी जा चुकी एंटी-टैंक प्रणाली है और इसकी खरीद दोनों देशों की सेनाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगी।
अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, इस सौदे से भविष्य में भारत और अमेरिका के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग के नए अवसर भी खुल सकते हैं।
क्या है Javelin मिसाइल की खासियत?
Javelin एक मीडियम-रेंज, फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है। इसे अमेरिकी कंपनियां RTX और Lockheed Martin मिलकर तैयार करती हैं।
इस प्रणाली की खासियत यह है कि मिसाइल को लक्ष्य पर लॉक करने के बाद ऑपरेटर को लगातार उसे गाइड करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से दुश्मन के टैंक और अन्य बख्तरबंद लक्ष्यों के खिलाफ किया जाता है।
Javelin को बंकर और मजबूत किलेबंदी जैसे लक्ष्यों के खिलाफ भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी प्रभावी रेंज करीब 2.5 किलोमीटर बताई जाती है।
भारत को डील में क्या मिलेगा?
Foreign Military Sales (FMS) प्रक्रिया के तहत होने वाले इस सौदे में भारत को सिर्फ मिसाइलें ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े दूसरे उपकरण भी मिलेंगे।
डील में शामिल हैं:
148 Javelin मिसाइल राउंड्स
एक FGM-148 Javelin मिसाइल
25 Lightweight Command Launch Units
संबंधित उपकरण और सपोर्ट सिस्टम
इससे भारतीय सेना की एंटी-टैंक क्षमता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के लिए क्यों अहम है डील?
भारत लंबे समय से अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने और अलग-अलग देशों से अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियां हासिल करने पर जोर दे रहा है। Javelin की खरीद इसी व्यापक आधुनिकीकरण प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है।
वहीं अमेरिका के लिए भारत एक महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा तकनीक, सैन्य अभ्यास और हथियार प्रणालियों को लेकर सहयोग लगातार बढ़ा है।
ऐसे में Javelin सौदा सिर्फ एक हथियार खरीदने की डील नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और रक्षा संबंधों का भी संकेत माना जा रहा है।

