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न्यूयॉर्क के बाद यूरोप में दिखने लगा ममदानी इफेक्ट, वीडियो में जाने बर्लिन में महंगे किराए के मुद्दे पर जीती एलिफ एराल्प

न्यूयॉर्क के बाद यूरोप में दिखने लगा ममदानी इफेक्ट, वीडियो में जाने बर्लिन में महंगे किराए के मुद्दे पर जीती एलिफ एराल्प

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की राजनीति का असर अब यूरोप में भी दिखाई देने लगा है। ममदानी ने 2025 में न्यूयॉर्क मेयर का चुनाव जीतते समय महंगाई, बढ़ते किराए और आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को अपने अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाया था। उनका जोर न्यूयॉर्क को आम लोगों के लिए ज्यादा किफायती बनाने पर था। अब इसी तरह के मुद्दे यूरोप की वामपंथी राजनीति में भी प्रमुखता हासिल कर रहे हैं।

इसका सबसे ताजा उदाहरण जर्मनी की राजधानी बर्लिन है, जहां लेफ्ट पार्टी की नेता एलिफ एराल्प ने सितंबर 2026 के चुनाव में बड़ी जीत हासिल की। एराल्प ने अपने अभियान में बढ़ते किराए और सस्ते आवास की कमी को प्रमुख मुद्दा बनाया था। उनकी जीत के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उनकी तुलना ममदानी से की जा रही है। 

बर्लिन में किराया बना बड़ा चुनावी मुद्दा

बर्लिन में आवास की बढ़ती कीमतें लंबे समय से लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई हैं। एराल्प ने चुनाव अभियान के दौरान सस्ते आवास और किराए पर नियंत्रण की मांग को प्रमुखता से उठाया। उनकी पार्टी ने निजी आवास कंपनियों के नियंत्रण वाले करीब 2.20 लाख मकानों को सार्वजनिक नियंत्रण में लाने का प्रस्ताव भी रखा है।  एराल्प ने खुद भी कहा कि ममदानी की सफलता उनके लिए एक उदाहरण रही। उन्होंने बताया कि ममदानी ने कुछ प्रमुख सामाजिक मुद्दों पर फोकस करते हुए अलग-अलग समुदायों को साथ जोड़ा और यही रणनीति बर्लिन में भी अपनाई गई। 

‘जर्मनी की ममदानी’ क्यों कहा जा रहा?

एराल्प के अभियान में महंगाई, महंगा किराया, सार्वजनिक परिवहन और शहर की बुनियादी सुविधाओं जैसे रोजमर्रा से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। उनकी पार्टी ने घर-घर जाकर प्रचार किया और सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल किया। इसी वजह से उनकी राजनीतिक शैली में ममदानी के अभियान से समानता देखी जा रही है।  जर्मनी में बढ़ती आवास लागत के बीच यह मुद्दा काफी प्रभावी साबित हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले डेढ़ दशक में बर्लिन में आवास की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है और सस्ते घरों की उपलब्धता एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।

यूरोप की वामपंथी राजनीति में बढ़ती दिलचस्पी

बर्लिन के चुनाव परिणाम के बाद स्पेन समेत यूरोप के दूसरे हिस्सों में भी वामपंथी समूहों के बीच इस तरह की राजनीति को लेकर चर्चा बढ़ी है। स्पेन में वामपंथी दलों ने बर्लिन में आवास के मुद्दे पर मिली सफलता को अपनी आगामी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना है। हालांकि न्यूयॉर्क और यूरोप के शहरों की राजनीतिक व्यवस्था और स्थानीय परिस्थितियां अलग हैं। खुद एराल्प ने भी कहा है कि बर्लिन और न्यूयॉर्क में अंतर है, लेकिन दोनों जगहों पर आम लोगों की किफायती जिंदगी, सामाजिक न्याय और महंगे आवास जैसे मुद्दों को चुनावी राजनीति के केंद्र में लाने की समानता जरूर है। इस तरह ममदानी की राजनीति का सबसे बड़ा प्रभाव फिलहाल यह दिख रहा है कि महंगाई, किराया और आम लोगों की आर्थिक परेशानियां यूरोप के कई शहरों में वामपंथी दलों के चुनावी एजेंडे का अहम हिस्सा बन रही हैं।

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