होर्मुज के बाद अब बाब-अल-मंदेब पर संकट, हूती विद्रोहियों ने किया कब्जे का दावा; तेल सप्लाई पर बढ़ा खतरा
दुनिया के अहम समुद्री तेल मार्गों में शामिल बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को लेकर नया संकट खड़ा हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े तनाव के बाद अब यम के हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में नियंत्रण का दावा किया है। यह समुद्री रास्ता एशिया और यूरोप के बीच जहाजों की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया है कि सऊदी अरब समर्थित सेनाओं ने बाब-अल-मंदेब के बीच स्थित पेरिम द्वीप पर अपना नियंत्रण खो दिया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
5,400 वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्जे का दावा
हूती प्रवक्ता के अनुसार, संगठन का अब करीब 5,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर नियंत्रण हो गया है। उन्होंने कहा कि इस समुद्री मार्ग से सऊदी अरब को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जाएगी।हूतियों का आरोप है कि सऊदी अरब ने लंबे समय से उनके खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी कर रखी है। इसी वजह से उन्होंने क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं।
बाब-अल-मंदेब क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। यूरोप और एशिया के बीच जाने वाले बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाज इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।तेल और गैस की आपूर्ति के लिहाज से भी यह मार्ग बेहद अहम है। अगर इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका असर पड़ सकता है।
ईरान पर हूतियों की मदद का आरोप
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने हूती विद्रोहियों को सैन्य सलाह और सहायता दी थी। एक राजनयिक के हवाले से बताया गया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कई वरिष्ठ कमांडर यमन में मौजूद रहे हैं।रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी बड़े अभियान से पहले ईरान और हूतियों के बीच कई बैठकें हुई थीं। हालांकि, मोखा बंदरगाह पर हमले का फैसला हूती संगठन ने खुद लिया था।
मध्य-पूर्व में बढ़ रहा समुद्री तनाव
मध्य-पूर्व में पहले ही होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बना हुआ है। अब बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर संकट की स्थिति ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों प्रमुख समुद्री रास्तों पर लंबे समय तक व्यवधान रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है।फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस क्षेत्र में हो रही गतिविधियों पर टिकी हुई हैं। हूती दावों और समुद्री सुरक्षा स्थिति को लेकर आने वाले दिनों में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

