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एक महीने बाद अमेरिका ने ईरान पर फिर किया हमला, फुटेज में देंखे लारक द्वीप पर रॉकेट लॉन्चर्स तबाह; जवाब में जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें

एक महीने बाद अमेरिका ने ईरान पर फिर किया हमला, फुटेज में देंखे लारक द्वीप पर रॉकेट लॉन्चर्स तबाह; जवाब में जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें

अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से जारी अपेक्षाकृत शांति के बाद एक बार फिर सैन्य टकराव तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के रणनीतिक लारक द्वीप पर हमला कर दो रॉकेट लॉन्चर्स को निशाना बनाया। यह जुलाई के बाद ईरानी जमीन पर अमेरिका का पहला ज्ञात हमला बताया जा रहा है। लारक द्वीप होर्मुज स्ट्रेट के बेहद करीब स्थित है, जिसके जरिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

अमेरिका ने क्यों किया हमला?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर मौजूद दो लॉन्चर्स को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के जवान इनका इस्तेमाल समुद्री बारूदी सुरंगें ले जाने वाले रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे। अमेरिका का दावा है कि इन गतिविधियों से होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए तत्काल खतरा पैदा हो सकता था।अमेरिकी पक्ष ने हमले को सीमित और सटीक कार्रवाई बताया है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है और यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है।

ईरान ने बताया बड़ा नुकसान

अमेरिकी हमले के बाद ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि हमले में सैनिकों और नागरिकों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए हैं। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में दोनों पक्षों की ओर से नुकसान के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।ईरानी पक्ष ने अमेरिकी कार्रवाई को उकसावे वाला कदम बताया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके कुछ ही समय बाद ईरान की ओर से जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा सामने आया।

जॉर्डन के अमेरिकी एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के मुताबिक, ईरान ने जॉर्डन में स्थित किंग हुसैन और अल-अजराक एयरबेस को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। ईरान का दावा था कि इन ठिकानों के तकनीकी और रखरखाव ढांचे के साथ-साथ लड़ाकू विमानों की तैनाती वाले क्षेत्रों को निशाना बनाया गया और भारी नुकसान हुआ।हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। अमेरिकी अधिकारियों ने भी कहा कि जॉर्डन में अमेरिकी बलों की ओर आने वाली मिसाइलों को रोक लिया गया और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

UAE तक पहुंचा तनाव

ईरान की ओर से संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अल-मिनहाद एयरबेस को भी ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया गया। हालांकि, UAE ने ईरान के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उसकी वायु रक्षा ने एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया था। इससे साफ है कि लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खाड़ी क्षेत्र के दूसरे देशों पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी दुनिया की नजर

अमेरिका और ईरान के बीच ताजा सैन्य टकराव का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज स्ट्रेट है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां सैन्य तनाव बढ़ने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने की आशंका बढ़ गई है।

ताजा घटनाक्रम के बाद वैश्विक बाजारों में भी चिंता बढ़ी है। रिपोर्टों के मुताबिक तनाव बढ़ने के साथ ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। यदि होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक आवाजाही बाधित रहती है, तो इसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों में ईंधन कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से अधिक समय बाद हुई यह सीधी सैन्य कार्रवाई क्षेत्र में संघर्ष के फिर से तेज होने का संकेत मानी जा रही है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की अगली कार्रवाई पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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