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सत्ता बचाने का दांव या चुनावी फायदा? एक्स्ट्रा सीटों के विवादित बिल पर मेलोनी की सरकार दांव पर, आज संसद में मतदान

सत्ता बचाने का दांव या चुनावी फायदा? एक्स्ट्रा सीटों के विवादित बिल पर मेलोनी की सरकार दांव पर, आज संसद में मतदान

इटली में प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के एक नए चुनावी कानून को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रस्ताव में चुनाव जीतने वाली पार्टी या गठबंधन को संसद में 105 बोनस सीटें देने का प्रावधान है। हालांकि, इसका लाभ तभी मिलेगा जब विजेता पार्टी या गठबंधन को कम से कम 42% वोट हासिल हों।

सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से चुनाव जीतने वाले गठबंधन को संसद में पर्याप्त बहुमत मिलेगा और इटली में राजनीतिक स्थिरता आएगी। वहीं विपक्ष का आरोप है कि इससे विजेता गठबंधन को जरूरत से ज्यादा ताकत मिल जाएगी और लोकतांत्रिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।इस प्रस्ताव पर आज संसद में वोटिंग होनी है। प्रधानमंत्री मेलोनी ने कहा है कि अगर कानून पास नहीं हुआ तो वह इस्तीफा दे देंगी। ऐसे में यह वोटिंग उनकी सरकार के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

600 सीटों वाली संसद में कैसे मिलेगा बोनस?

इटली की संसद में कुल 600 सीटें हैं। इनमें निचले सदन में 400 और सीनेट में 200 सीटें हैं।प्रस्तावित नियम के तहत अगर कोई पार्टी या गठबंधन कम से कम 42% वोट हासिल करके चुनाव में सबसे आगे रहता है, तो उसे निचले सदन में 70 और सीनेट में 35 बोनस सीटें मिलेंगी।हालांकि, इन सीटों को संसद की मौजूदा कुल सीटों के भीतर ही बांटा जाएगा। यानी निचले सदन की 400 सीटों के ऊपर 70 नई सीटें नहीं जोड़ी जाएंगी।

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए किसी चुनाव में:

  • पार्टी A के गठबंधन को 43% वोट मिले

  • पार्टी B को 35% वोट मिले

  • बाकी पार्टियों को 22% वोट मिले

ऐसी स्थिति में 42% की सीमा पार करने और सबसे ज्यादा वोट पाने के कारण पार्टी A के गठबंधन को बोनस सीटों का लाभ मिल सकता है।इससे उसकी संसद में सीटों की संख्या उसके वोट प्रतिशत के हिसाब से मिलने वाली सीटों से ज्यादा हो सकती है और उसे सरकार चलाने के लिए मजबूत बहुमत मिल सकता है।

80 साल में इटली में बनीं 68 सरकारें

सरकार इस प्रस्ताव को इटली की राजनीतिक अस्थिरता से जोड़कर देख रही है। 1946 में गणराज्य बनने के बाद से इटली में अब तक 68 सरकारें बन चुकी हैं। कई सरकारें बेहद कम समय तक चलीं। 1954 में एक सरकार का कार्यकाल महज 22 दिन रहा था।वहीं जॉर्जिया मेलोनी ने सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी सरकार को इटली के इतिहास की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बनाने का रिकॉर्ड बनाया है।मेलोनी सरकार का मौजूदा पांच साल का कार्यकाल अगले साल पूरा होना है। हालांकि, अगर चुनावी कानून को लेकर सत्ताधारी गठबंधन में मतभेद बढ़ते हैं, तो समय से पहले चुनाव की स्थिति भी बन सकती है।

विपक्ष का आरोप- लोकतांत्रिक संतुलन बिगड़ेगा

विपक्षी दलों का कहना है कि बोनस सीटों की वजह से चुनाव जीतने वाले गठबंधन के पास संसद में जरूरत से ज्यादा ताकत आ सकती है। इससे उसे दूसरे दलों और सांसदों का समर्थन लिए बिना महत्वपूर्ण फैसले लेने में आसानी होगी।विरोधियों का दावा है कि इसका असर जजों और राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पदों से जुड़े फैसलों पर भी पड़ सकता है। उनका कहना है कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच संतुलन कमजोर होने का खतरा है।वामपंथी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मासिमो जियानिनी ने इस प्रस्ताव की तुलना 1923 में बने एक चुनावी कानून से की है। उनके मुताबिक, उस समय के कानून ने नेशनल फासिस्ट पार्टी को संसद में भारी बहुमत हासिल करने में मदद की थी।

कानून के नाम पर भी सियासी तकरार

इस प्रस्ताव को सरकार के समर्थकों ने 'स्टैबिलिकम' नाम दिया है, जिसका अर्थ स्थिरता से जुड़ा है। सरकार का कहना है कि कानून का मकसद बार-बार सरकार गिरने की स्थिति को रोकना और मतदाताओं के जनादेश को मजबूत बनाना है।वहीं विरोधियों ने इसे प्रधानमंत्री मेलोनी के नाम से जोड़ते हुए 'मेलोनेल्लुम' नाम दिया है। उनका आरोप है कि यह कानून सत्ताधारी गठबंधन को चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है।अगर कानून संसद से पास हो जाता है तो विपक्षी दल और संगठन इसे इटली की संवैधानिक अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

चुनाव से पहले ही घोषित होगा प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार

प्रस्ताव में एक और अहम प्रावधान है। इसके तहत चुनाव लड़ने वाला गठबंधन मतदान से पहले ही अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम घोषित करेगा।सरकार का कहना है कि इससे मतदाताओं को पहले से पता रहेगा कि गठबंधन के जीतने पर प्रधानमंत्री कौन होगा। इससे चुनाव प्रक्रिया में स्पष्टता और पारदर्शिता बढ़ेगी।लेकिन विपक्ष का तर्क है कि इटली में प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में आती है। ऐसे में चुनाव से पहले प्रधानमंत्री का उम्मीदवार तय करने की व्यवस्था राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका को कमजोर कर सकती है।

बोनस सीटों का प्रावधान पहले भी विवादों में रहा

इटली में राजनीतिक स्थिरता लाने के लिए 1993 के बाद से कई चुनावी कानून बनाए जा चुके हैं। इनमें जीतने वाली पार्टी या गठबंधन को अतिरिक्त सीटें देने की व्यवस्था भी शामिल रही है।2005 के एक चुनावी कानून में भी बोनस सीटों का प्रावधान था। हालांकि, 2013 में इटली की संवैधानिक अदालत ने उस व्यवस्था को असंवैधानिक करार दिया था। अदालत की प्रमुख आपत्ति यह थी कि अतिरिक्त सीटें देने के लिए वोट का कोई न्यूनतम प्रतिशत तय नहीं किया गया था।अब मेलोनी सरकार के नए प्रस्ताव ने एक बार फिर इटली में स्थिर सरकार बनाम लोकतांत्रिक संतुलन की बहस छेड़ दी है। संसद में होने वाली वोटिंग से यह तय होगा कि सरकार का यह बड़ा चुनावी सुधार आगे बढ़ता है या नहीं।

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