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लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करने की तैयारी, वीडियो में देंखे 2029 से लागू होगा 33% महिला आरक्षण

लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करने की तैयारी, वीडियो में देंखे 2029 से लागू होगा 33% महिला आरक्षण

केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनावों से महिला आरक्षण अधिनियम लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित सीटों में से 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित की जाएंगी। वर्तमान में लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं।सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र के दौरान इस संबंध में महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की योजना बना रही है। इस सत्र में 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाया जाएगा। यह कदम देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिहाज से ऐतिहासिक माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने इस प्रस्ताव से जुड़े तीन प्रमुख विधेयकों के ड्राफ्ट सभी सांसदों को भेज दिए हैं। इनमें संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन विधेयक (संशोधन) बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 शामिल हैं। इन विधेयकों के जरिए लोकसभा सीटों के पुनर्गठन और आरक्षण व्यवस्था को लागू करने की रूपरेखा तय की जाएगी।इस प्रस्ताव में एक और अहम बदलाव “जनसंख्या” की परिभाषा को लेकर किया गया है। इसके तहत संसद को यह अधिकार दिया जाएगा कि वह तय करे कि सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन के लिए किस जनसंख्या आंकड़े को आधार बनाया जाए। फिलहाल, 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात सामने आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीटों की संख्या बढ़ाने का यह प्रस्ताव जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। साथ ही, महिला आरक्षण लागू होने से संसद में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो सकती है, क्योंकि परिसीमन और सीटों के पुनर्वितरण का असर विभिन्न राज्यों के राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है। दक्षिण और उत्तर भारत के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चाएं तेज होने की संभावना है।

कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम देश की लोकतांत्रिक संरचना में बड़ा बदलाव ला सकता है। अब सभी की नजरें संसद के विशेष सत्र पर टिकी हैं, जहां इन विधेयकों पर चर्चा और संभावित मंजूरी का रास्ता साफ होगा।

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