VIDEO इंदिरा गांधी नहर ने कैसे बदला थार VIDEO रेत के टीलों से हरे खेतों तक की पूरी कहानी
राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में फैला थार का रेगिस्तान लंबे समय से पानी की कमी के लिए जाना जाता है। कम बारिश और सीमित जल स्रोतों के कारण यहां खेती और जनजीवन कठिन रहा है। लेकिन इंदिरा गांधी नहर परियोजना के विस्तार के साथ इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला। नहर ने कई मरुस्थलीय इलाकों में सिंचाई और पेयजल की नई संभावनाएं पैदा कीं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया।
हरिके बैराज से शुरू होती है जल यात्रा
इंदिरा गांधी नहर को पहले राजस्थान नहर के नाम से जाना जाता था। यह पंजाब के हरिके बैराज से निकलती है और राजस्थान के थार मरुस्थल की ओर बढ़ती है। 1948 में इंजीनियर कंवर सेन द्वारा परियोजना की कल्पना की गई थी और 31 मार्च 1958 को निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस परियोजना का उद्देश्य ही ऐसा क्षेत्र था जहां पानी की सबसे ज्यादा जरूरत थी। राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में नहर का पानी पहुंचने के साथ सिंचाई व्यवस्था का विस्तार शुरू हुआ।
जहां पानी की बूंद थी कीमती, वहां खेत हुए हरे
नहर से पहले पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में कृषि पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी। बारिश कम होने की वजह से खेती जोखिम भरी रहती थी। नहर से मिलने वाले पानी ने कई क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई। इसका असर फसलों के उत्पादन और किसानों की आय पर भी पड़ा। जिन क्षेत्रों में पहले मरुस्थलीय परिस्थितियां प्रमुख थीं, वहां कई जगह कृषि गतिविधियां बढ़ीं और खेतों में हरियाली दिखाई देने लगी। India Water Portal भी नहर को पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में कृषि और सामाजिक बदलाव से जोड़ता है।
गांवों और अर्थव्यवस्था को मिला नया आधार
पानी की उपलब्धता बढ़ने से केवल खेती ही नहीं बदली। ग्रामीण इलाकों में पशुपालन, स्थानीय कारोबार और रोजगार की गतिविधियों को भी नई संभावनाएं मिलीं। पेयजल की उपलब्धता ने उन क्षेत्रों के लोगों के जीवन को भी प्रभावित किया जहां पहले पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। इंदिरा गांधी नहर का कमांड क्षेत्र बड़े भूभाग में फैला है और परियोजना के तहत सिंचाई के साथ पेयजल की जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया।
राजस्थान के लिए क्यों है इतनी महत्वपूर्ण
राजस्थान में पानी हमेशा से सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में रहा है। राज्य के बड़े हिस्से में मरुस्थलीय और अर्ध-मरुस्थलीय परिस्थितियां होने के कारण जल प्रबंधन की चुनौती बनी रहती है। ऐसे में इंदिरा गांधी नहर ने बाहरी जल स्रोतों से पानी लाकर पश्चिमी राजस्थान में विकास की संभावनाएं बढ़ाईं। हालांकि नहर परियोजना के साथ जलभराव, मिट्टी में लवणता और जल प्रबंधन जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों पर भी लगातार ध्यान देने की जरूरत बताई जाती रही है। इसलिए नहर के पानी का संतुलित और टिकाऊ उपयोग महत्वपूर्ण है।
मरुभूमि में विकास की बड़ी कहानी
इंदिरा गांधी नहर को केवल एक सिंचाई परियोजना के रूप में देखना इसके प्रभाव को सीमित कर देगा। इसने पश्चिमी राजस्थान में कृषि, पेयजल और ग्रामीण जीवन के लिए नई संभावनाएं पैदा कीं। इसी वजह से यह परियोजना राजस्थान के आधुनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बन चुकी है। रेत के बीच पानी की धार पहुंचाने का सपना आज राजस्थान के कई हिस्सों में खेतों की हरियाली और आबादी के विस्तार के रूप में दिखाई देता है। यही कारण है कि इंदिरा गांधी नहर को मरुस्थलीय राजस्थान के परिवर्तन की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जाता है।

