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चकराता छोड़ इस खूबसूरत हिल स्टेशन की ओर खिंचे चले जा रहे टूरिस्ट, दिल्ली से सिर्फ 6.5 घंटे की दूरी पर हैं बर्फीली वादियां

चकराता छोड़ इस खूबसूरत हिल स्टेशन की ओर खिंचे चले जा रहे टूरिस्ट, दिल्ली से सिर्फ 6.5 घंटे की दूरी पर हैं बर्फीली वादियां

अगर आप उत्तराखंड घूमने का प्लान बना रहे हैं और चकराता के अलावा किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां शांति के साथ बर्फबारी का खूबसूरत नजारा भी देखने को मिले, तो लोखंडी आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। चकराता से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लोखंडी सर्दियों के मौसम में पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

करीब 8,500 फीट की ऊंचाई पर बसा यह इलाका घने बांज, बुरांश और देवदार के जंगलों से घिरा हुआ है। ऊंचाई अधिक होने की वजह से यहां आसपास के कई इलाकों की तुलना में बर्फबारी की संभावना ज्यादा रहती है। यही कारण है कि बर्फ देखने की चाह रखने वाले पर्यटक अब चकराता के साथ-साथ लोखंडी का रुख भी करने लगे हैं।

दिसंबर से फरवरी तक दिखती है बर्फ की सफेद चादर

लोखंडी में आमतौर पर सर्दियों के दौरान बर्फबारी देखने को मिलती है। खासकर दिसंबर के आखिरी सप्ताह से फरवरी तक यहां बर्फबारी के अच्छे मौके मिल सकते हैं। अगर आपका मकसद पहाड़ों पर बर्फ का खूबसूरत नजारा देखना है, तो इस अवधि में यहां जाने का प्लान बनाया जा सकता है।

हालांकि, पहाड़ों का मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए यात्रा से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

चकराता से लोखंडी क्यों हो रहा है फेमस?

लोखंडी और आसपास का इलाका प्राकृतिक खूबसूरती के साथ शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। इस साल जनवरी में जब चकराता के कुछ हिस्सों में अपेक्षाकृत कम बर्फबारी देखने को मिली, तब लोखंडी इलाके में अच्छी बर्फ जमा हुई थी। इसके बाद बर्फ देखने आने वाले पर्यटकों की दिलचस्पी इस जगह के प्रति और बढ़ गई।

सर्दियों में यहां चारों तरफ बर्फ से ढकी पहाड़ियां, देवदार के पेड़ और शांत वातावरण मिलकर इस जगह को बेहद खूबसूरत बना देते हैं।

दिल्ली से करीब 330-350 किलोमीटर की दूरी

दिल्ली से लोखंडी की सड़क दूरी करीब 330 से 350 किलोमीटर के आसपास है। सामान्य परिस्थितियों में सड़क मार्ग से यहां पहुंचने में लगभग 6 से 7 घंटे लग सकते हैं। दिल्ली से देहरादून एक्सप्रेसवे की ओर बढ़ते हुए विकासनगर, कालसी और चकराता के रास्ते लोखंडी पहुंचा जा सकता है।

हालांकि, पहाड़ी इलाकों में मौसम, बर्फबारी और सड़क की स्थिति के कारण यात्रा का समय बढ़ सकता है। सर्दियों में जाने वाले यात्रियों को खासतौर पर सड़क की ताजा स्थिति की जानकारी लेकर ही निकलना चाहिए।

बस और ट्रेन से कैसे पहुंचें?

अगर आप बस से जाना चाहते हैं, तो दिल्ली के ISBT कश्मीरी गेट से देहरादून या विकासनगर के लिए बस ले सकते हैं। वहां से चकराता तक बस या शेयरिंग टैक्सी मिल सकती है। इसके बाद स्थानीय टैक्सी के जरिए लोखंडी पहुंचा जा सकता है।

ट्रेन से जाने वालों के लिए देहरादून रेलवे स्टेशन प्रमुख विकल्प है। दिल्ली से देहरादून के लिए कई ट्रेनें चलती हैं। देहरादून पहुंचने के बाद टैक्सी या स्थानीय परिवहन की मदद से लोखंडी जाया जा सकता है।

सर्दियों में बन रहा है पर्यटकों का पसंदीदा ठिकाना

गर्मियों में चकराता का टाइगर फॉल और आसपास की प्राकृतिक खूबसूरती पर्यटकों को आकर्षित करती है, वहीं सर्दियों में लोखंडी की बर्फ और शांत पहाड़ी माहौल लोगों को अपनी ओर खींच रहा है।

पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ यहां होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे जैसी सुविधाएं भी विकसित हो रही हैं। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

लोखंडी नाम पड़ने की कहानी भी है खास

लोखंडी की पहचान सिर्फ इसकी प्राकृतिक खूबसूरती तक सीमित नहीं है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, आसपास के इलाकों में कभी लोहे की खदानें हुआ करती थीं। यहां रहने वाले लोग लोहे से घरेलू सामान और खेती में इस्तेमाल होने वाले औजार तैयार करते थे।

इसी वजह से लोहारी और लोखंडी नाम प्रचलित होने की बात कही जाती है। स्थानीय स्तर पर आज भी पुराने खनन से जुड़े अवशेषों का जिक्र मिलता है।

अगर आप भी सर्दियों में भीड़भाड़ से दूर किसी शांत पहाड़ी जगह पर बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं, तो लोखंडी को अपनी उत्तराखंड ट्रिप की लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।

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