राजस्थान के नेशनल डेजर्ट पार्क से जुड़े इन रहस्यों को जान लगेगा 404 वाल्ट का झटका, जानिए रेगिस्तान का ये पहलू
जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है। हाल ही में पार्क क्षेत्र में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावन) की नई पीढ़ी के कुछ चूजों को देखा गया है, जिससे इस संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिली है।
संकट में थी गोडावन की पहचान
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारत के सबसे दुर्लभ पक्षियों में से एक है, जिसे IUCN की रेड लिस्ट में "गंभीर रूप से संकटग्रस्त" श्रेणी में रखा गया है। एक समय में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे कई राज्यों में पाया जाने वाला यह पक्षी अब लगभग 150 की संख्या में ही बचा है, जिनमें अधिकांश जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में ही हैं।
नई पीढ़ी की झलक बनी आशा की किरण
वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय गाइड्स ने पुष्टि की है कि पार्क के संरक्षित क्षेत्रों में 2 से 3 नवजात गोडावन चूजे देखे गए हैं। यह न केवल प्रजनन सफलता का संकेत है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि संरक्षण के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
संरक्षण केंद्र और मानव सहयोग की भूमिका
गोडावन के प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए जैसलमेर में रेगिस्तानी राष्ट्रीय पक्षी प्रजनन केंद्र (Desert National Breeding Centre) की स्थापना की गई थी। यहाँ कृत्रिम तरीके से अंडों को सेकर चूजों को पाला जाता है और बाद में उन्हें प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जाता है।
इसके साथ ही, स्थानीय ग्रामीणों, किसानों और चरवाहों को भी इस पक्षी के महत्व के बारे में शिक्षित किया गया है, जिससे खेतों में अंडों या चूजों को नुकसान पहुँचने की घटनाएँ कम हुई हैं।
विशेषज्ञों की राय
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह दृश्य संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र में जीवन के पुनर्जन्म का प्रतीक है। अगर इसी प्रकार की निरंतर निगरानी, प्रजनन और सामुदायिक सहयोग बना रहा, तो आने वाले वर्षों में गोडावन की संख्या में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
निष्कर्ष
डेजर्ट नेशनल पार्क में दिखाई दी गोडावन की नई पीढ़ी, न केवल राजस्थान बल्कि पूरे भारत के लिए वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक उम्मीद की रौशनी है। यह खबर इस बात का संकेत है कि यदि समर्पित प्रयास किए जाएं, तो संकटग्रस्त प्रजातियाँ भी पुनर्जीवित हो सकती हैं।

