रहस्यमयी झील जहाँ पानी बदलता है रंग: कैसे पहुँचें और कब जाना रहेगा सबसे बेस्ट, जानें सब कुछ
लद्दाख की खूबसूरत वादियों में स्थित पैंगोंग त्सो झील भारत की सबसे आकर्षक और चर्चित झीलों में से एक है। इसकी सबसे खास बात है पानी का बदलता रंग। कभी झील हल्के फिरोजी रंग में दिखाई देती है तो कभी इसका पानी गहरे नीले या हरे रंग का नजर आता है।
सूरज की रोशनी, मौसम और आसमान में बादलों की स्थिति बदलने के साथ झील के रंगों में भी बदलाव दिखाई देता है। फिल्म '3 इडियट्स' के क्लाइमैक्स सीन की शूटिंग के बाद यह जगह देशभर के पर्यटकों के बीच और भी लोकप्रिय हो गई।
लेकिन आखिर पैंगोंग त्सो का पानी बार-बार अपना रंग क्यों बदलता है? यहां घूमने का सही समय कौन सा है और झील तक कैसे पहुंचा जा सकता है? आइए जानते हैं।
क्यों बदलता है पैंगोंग त्सो का रंग?
पैंगोंग त्सो समुद्र तल से करीब 14,270 फीट यानी लगभग 4,350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खारे पानी की झील है। झील का रंग किसी एक वजह से नहीं बदलता। सूरज की रोशनी किस कोण से पानी पर पड़ रही है, आसमान में बादल कितने हैं और आसपास के पहाड़ों की परछाई किस तरह पानी पर पड़ रही है, इन सभी चीजों का असर इसके रंग पर दिखाई देता है।
दिन के अलग-अलग समय में रोशनी का एंगल बदलने से झील कभी नीली, कभी हरे और कभी फिरोजी रंग की नजर आ सकती है। मौसम बदलने के साथ भी इसके रंग और रूप में काफी अंतर दिखाई देता है।
सर्दियों में तापमान बहुत नीचे जाने पर झील का बड़ा हिस्सा जम जाता है और इसका नजारा बिल्कुल अलग दिखाई देता है।
134 किलोमीटर लंबी है झील
पैंगोंग त्सो करीब 134 किलोमीटर लंबी है। इसका लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा चीन के तिब्बत क्षेत्र में और बाकी हिस्सा भारत में स्थित है। इसकी अधिकतम चौड़ाई करीब 5 किलोमीटर तक बताई जाती है।
झील का खारा पानी इसे दूसरी मीठे पानी की झीलों से अलग बनाता है। यहां मछलियों की संख्या बहुत कम है, लेकिन प्रवासी पक्षियों के लिए यह इलाका महत्वपूर्ण है। खासकर गर्मियों के मौसम में यहां कई तरह के पक्षी दिखाई दे सकते हैं।
मई से सितंबर तक घूमना माना जाता है बेहतर
पैंगोंग त्सो की यात्रा के लिए आमतौर पर मई से सितंबर के बीच का समय बेहतर माना जाता है। इस दौरान लद्दाख का मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल रहता है और कई प्रमुख सड़क मार्ग पर्यटकों के लिए खुले रहते हैं।
गर्मियों के महीनों में झील का पानी अलग-अलग नीले और फिरोजी शेड्स में दिखाई देता है, जिससे इसका नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है।
सर्दियों में झील जमने लगती है और जनवरी से मार्च के बीच यहां का तापमान बेहद कम हो सकता है। जमी हुई झील देखना रोमांचक अनुभव हो सकता है, लेकिन इस दौरान मौसम काफी कठिन रहता है और आसपास ठहरने की सुविधाएं भी सीमित हो सकती हैं।
लेह से कैसे पहुंचें पैंगोंग त्सो?
पैंगोंग त्सो झील लेह से करीब 150 से 170 किलोमीटर दूर स्थित है। सड़क मार्ग से यहां पहुंचने में रास्ते और मौसम की स्थिति के अनुसार लगभग 5 से 6 घंटे या उससे अधिक समय लग सकता है।
लेह से पैंगोंग जाने वाला लोकप्रिय रास्ता चांग ला दर्रे से होकर गुजरता है। यह बेहद ऊंचाई वाला इलाका है और रास्ते में लद्दाख के शानदार पहाड़ी दृश्य देखने को मिलते हैं। कुछ यात्री नुब्रा वैली की तरफ से होते हुए भी पैंगोंग पहुंचने का रूट चुनते हैं।
लेह में कुशोक बकुला रिनपोछे एयरपोर्ट है, जहां देश के कई प्रमुख शहरों से उड़ानें उपलब्ध होती हैं। इसके बाद पैंगोंग त्सो तक सड़क मार्ग से जाना पड़ता है।
परमिट और सुरक्षा का रखें ध्यान
पैंगोंग त्सो संवेदनशील सीमा क्षेत्र के करीब स्थित है, इसलिए यात्रा से पहले मौजूदा परमिट और प्रवेश संबंधी नियमों की जानकारी लेना जरूरी है। आवश्यक अनुमति स्थानीय प्रशासन के नियमों के अनुसार लेनी पड़ सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात है यहां की ऊंचाई। करीब 14,000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर होने के कारण कुछ लोगों को कम ऑक्सीजन की वजह से ऊंचाई से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। इसलिए लेह पहुंचने के बाद शरीर को ऊंचाई के अनुसार ढलने का पर्याप्त समय देना चाहिए।
यात्रा के दौरान गर्म कपड़े, जरूरी दवाइयां, पानी और अन्य आवश्यक सामान साथ रखें। मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए निकलने से पहले सड़क और मौसम की ताजा स्थिति की जानकारी लेना भी जरूरी है।
एक बार जरूर देखें पैंगोंग का बदलता रंग
नीले आसमान, बर्फीले पहाड़ों और अलग-अलग रंगों में नजर आती पैंगोंग त्सो का नजारा इसे लद्दाख की सबसे खास जगहों में शामिल करता है। दिन के अलग-अलग समय में बदलता इसका रंग और आसपास का शांत वातावरण इस जगह को यादगार बना देता है। यही वजह है कि लद्दाख जाने वाले पर्यटकों की सूची में पैंगोंग त्सो का नाम अक्सर सबसे ऊपर रहता है।

