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राजसी वैभव, गुप्त सुरंगें और शीश महल का जादू वीडियो में जाने सिटी पैलेस के रहस्य, जो आपको यहां घूमने के लिए कर देंगे मजबूर 

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राजस्थान का उदयपुर सिटी पैलेस न सिर्फ स्थापत्य कला की एक अद्भुत मिसाल है, बल्कि इसमें छुपे कई रहस्य और ऐतिहासिक घटनाएं इसे और भी रोचक बना देते हैं। पिछोला झील के किनारे स्थित यह भव्य महल राजस्थान की मेवाड़ रियासत का गौरव रहा है, और यह ना केवल अपनी खूबसूरती बल्कि अपनी ऐतिहासिक विरासत, राजसी रहन-सहन और रहस्यमयी गलियारों के कारण भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।


सिटी पैलेस का इतिहास: 400 सालों का शाही सफर

उदयपुर सिटी पैलेस का निर्माण 1553 ई. में महाराणा उदय सिंह द्वितीय द्वारा शुरू किया गया था। इसके बाद लगभग 22 शासकों ने इस महल में कई नए खंड, महल और द्वार जोड़े, जिससे यह आज एक विशाल और भव्य परिसर का रूप ले चुका है। यह महल मेवाड़ राजवंश की समृद्ध संस्कृति, कलात्मक रुचि और रणनीतिक सोच का प्रतीक माना जाता है।

रहस्यमयी सुरंगें और छिपे हुए रास्ते
कहा जाता है कि सिटी पैलेस के अंदर कई ऐसी गुप्त सुरंगें हैं जिनका इस्तेमाल युद्ध या संकट के समय राजपरिवार को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए किया जाता था। इन सुरंगों के रास्ते आम लोगों को नहीं दिखाए जाते और ये आज भी कई लोगों के लिए रहस्य बने हुए हैं।

जहर से बचाव के लिए बने खास कमरे
इतिहासकारों के अनुसार, महल में कुछ विशेष कमरे ऐसे बनाए गए थे जहां भोजन को पहले जानवरों पर परीक्षण कर परोसा जाता था। मेवाड़ के शासकों को जहर देने की कई कोशिशें हुईं, जिससे सीख लेकर राजमहल में सुरक्षा व्यवस्था को अत्यधिक कठोर बनाया गया था। यह दर्शाता है कि महल की रचना केवल खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा रणनीति को ध्यान में रखते हुए भी की गई थी।

शीश महल और रोशनी के अद्भुत खेल
महल के अंदर स्थित शीश महल या 'मोर चौक' एक ऐसी जगह है जो अपने चमकदार कांच के काम और रंगीन रोशनी के प्रभाव से किसी को भी चौंका सकता है। इस महल का कांच और आइनों से किया गया काम इस प्रकार है कि एक दीया जलाने पर पूरा कमरा जगमगाने लगता है। कहा जाता है कि यह वास्तुकला की वो जादूगरी है जो बिजली के बिना भी रातों को रोशन कर देती थी।

महल के अंदर का 'जिन्न दरवाजा'
स्थानीय लोगों की मान्यता है कि सिटी पैलेस के एक कोने में स्थित एक दरवाजा ‘जिन्न दरवाजा’ कहलाता है। यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि कहा जाता है कि इस दरवाजे से होकर गुजरने वाले को अजीब सी ऊर्जा का अनुभव होता है। हालांकि इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन इस रहस्य ने लोगों की जिज्ञासा को हमेशा बनाए रखा है।

राजघराने की खास नीतियाँ और गुप्त बैठकें
इतिहास में वर्णित है कि महाराणा प्रताप जैसे शूरवीर राजा अपनी रणनीति की गुप्त बैठकें इसी महल के अंदर विशेष कक्षों में करते थे। इन कमरों की बनावट ऐसी होती थी कि बाहर कोई आवाज न सुन सके और पूरी गोपनीयता बनी रहे। यह महल केवल एक निवास स्थान नहीं, बल्कि शासकों की शक्ति और चतुराई का भी प्रतीक था।

आर्ट गैलरी और हथियारों का संग्रह
आज सिटी पैलेस में संग्रहालय भी है, जिसमें मेवाड़ शासकों द्वारा उपयोग किए गए हथियार, वस्त्र, चित्रकला और अन्य शाही वस्तुएं संरक्षित की गई हैं। यहां प्रदर्शित तलवारें, भाले और कवच न केवल ऐतिहासिक महत्व रखते हैं, बल्कि इनसे उस युग की युद्ध नीति और तकनीकी प्रगति की झलक भी मिलती है।

विदेशी सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र
सिटी पैलेस न केवल भारतीय बल्कि विदेशी पर्यटकों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण है। यहां की स्थापत्य कला, झील का मनोहारी दृश्य, और शाही जीवनशैली की झलक पाने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं। इसके अलावा, बॉलीवुड फिल्मों और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी इस महल की लोकप्रियता बढ़ी है।

समय और टिकट की जानकारी
सिटी पैलेस हर दिन सुबह 9:30 से शाम 5:30 बजे तक खुला रहता है। टिकट की कीमत भारतीय पर्यटकों के लिए लगभग ₹300 और विदेशी पर्यटकों के लिए ₹700 के करीब है। यदि आप म्यूजियम और आर्ट गैलरी देखना चाहते हैं, तो अलग से शुल्क देना होता है।

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