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52 दिन तक लगातार बहता रहा जवाई बांध, महाराजा के दौर में शुरू हुआ था निर्माण; राजस्थान के इस बांध की कहानी बेहद खास

52 दिन तक लगातार बहता रहा जवाई बांध, महाराजा के दौर में शुरू हुआ था निर्माण; राजस्थान के इस बांध की कहानी बेहद खास

राजस्थान के पाली जिले में बना जवाई बांध पश्चिमी राजस्थान की पहचान से जुड़ा हुआ है। यह बांध सिर्फ पानी का बड़ा स्रोत नहीं, बल्कि इतिहास, इंजीनियरिंग और प्राकृतिक खूबसूरती का अनोखा संगम भी है। जवाई नदी पर बने इस बांध का निर्माण जोधपुर के महाराजा उम्मेद सिंह के शासनकाल में शुरू हुआ था। करीब 70 साल बाद भी यह बांध पाली और आसपास के इलाकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है।

जवाई बांध के निर्माण का विचार आजादी से कई दशक पहले आया था। वर्ष 1903 में जवाई नदी में आने वाली बाढ़ से पाली और जालोर क्षेत्र में होने वाले नुकसान को देखते हुए नदी के पानी को रोकने की योजना पर विचार किया गया। हालांकि इस योजना को जमीन पर उतारने में कई दशक लग गए। आखिरकार वर्ष 1946 में बांध परियोजना को आकार दिया गया और 12 मई 1946 को निर्माण कार्य शुरू हुआ। करीब एक दशक के निर्माण के बाद वर्ष 1957 में बांध परियोजना पूरी हुई।

इस बांध का मुख्य उद्देश्य पानी को संग्रहित करके सिंचाई और पेयजल की जरूरत पूरी करना था। जवाई नदी लूनी नदी की सहायक नदी है और बांध इसी नदी पर बनाया गया है। पश्चिमी राजस्थान जैसे कम बारिश वाले क्षेत्र में पानी को रोककर उसका उपयोग करने के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।

जवाई बांध की खासियत सिर्फ इसका इतिहास नहीं है। यह बांध अपने विशाल जलाशय और प्राकृतिक वातावरण के कारण पर्यटकों के बीच भी लोकप्रिय है। यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। इसके अलावा जवाई क्षेत्र तेंदुओं के लिए भी प्रसिद्ध है। बांध और आसपास की चट्टानी पहाड़ियों में मगरमच्छों की अच्छी संख्या पाई जाती है। यही वजह है कि जवाई क्षेत्र आज राजस्थान के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में भी अपनी अलग पहचान बना चुका है।

मानसून के दौरान जब जवाई बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ता है और पानी निर्धारित स्तर तक पहुंचता है, तब बांध के गेट खोलकर अतिरिक्त पानी बाहर निकाला जाता है। ऐसे समय में बांध से निकलती जलधारा देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। लंबे समय तक पानी बहने की घटनाएं जवाई के इतिहास में खास मानी जाती हैं।

जवाई बांध की जल क्षमता और इससे जुड़े जलग्रहण क्षेत्र की वजह से पाली जिले की जल व्यवस्था काफी हद तक इस पर निर्भर करती है। पर्याप्त पानी होने पर आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई के लिए भी पानी उपलब्ध कराया जाता है। बांध से जुड़ी जल व्यवस्था का लाभ पाली के साथ जालोर क्षेत्र के कई गांवों को भी मिलता है।

समय के साथ जवाई बांध सिर्फ एक सिंचाई परियोजना नहीं रहा। यह पश्चिमी राजस्थान के लोगों के लिए जल सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बन गया है। साथ ही इसके आसपास विकसित हुआ प्राकृतिक परिवेश इसे पर्यटन के लिहाज से भी खास बनाता है।

करीब सात दशक पुराना जवाई बांध आज भी मजबूती से खड़ा है। महाराजा उम्मेद सिंह के दौर में शुरू हुई यह परियोजना इस बात की मिसाल है कि राजस्थान जैसे शुष्क प्रदेश में जल संरक्षण की दूरदर्शी सोच कितनी महत्वपूर्ण रही है। इतिहास, पानी और वन्यजीवों को अपने भीतर समेटे जवाई बांध आज भी पश्चिमी राजस्थान की सबसे खास जल परियोजनाओं में शामिल है।

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