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जयपुर के सिसोदिया रानी बाग में दिखती है राधाकृष्ण की अमर प्रेम गाथा, वायरल फुटेज में करे इस शाही बगिया की वर्चुअल सैर 

जयपुर के सिसोदिया रानी बाग में दिखती है राधाकृष्ण की अमर प्रेम गाथा, वायरल फुटेज में करे इस शाही बगिया की वर्चुअल सैर 

राजस्थान की राजधानी जयपुर अपनी राजशाही विरासत, भव्य महलों और ऐतिहासिक स्मारकों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। परंतु इस रंगीन शहर की हलचल से दूर एक ऐसी जगह भी है, जो न केवल स्थापत्य कला की बेमिसाल मिसाल है, बल्कि जहां राधा-कृष्ण की दिव्य प्रेम लीलाएं भी चित्रों और वास्तुकला के माध्यम से जीवंत हो उठती हैं। हम बात कर रहे हैं ‘सिसोदिया रानी गार्डन’ की — एक ऐसी राजसी बगिया, जो प्रेम, कला और प्रकृति का अद्भुत संगम है।


शाही प्रेम का प्रतीक: सिसोदिया रानी बाग
सिसोदिया रानी गार्डन का निर्माण 1728 में जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा उनकी प्रिय रानी, सिसोदिया वंश की राजकुमारी के लिए करवाया गया था। यह बाग उस प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, जिसे राजा ने अपनी रानी के लिए दिल में संजोए रखा। अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा यह गार्डन न केवल एक ऐतिहासिक स्थल है, बल्कि एक प्रेम कथा का जीवंत दस्तावेज भी है।

बाग में राधा-कृष्ण की प्रेम लीलाओं की झलक
सिसोदिया रानी गार्डन की सबसे खास बात यह है कि यहां की दीवारों और मंडपों पर राधा-कृष्ण की प्रेम लीलाओं को बड़ी ही खूबसूरती से चित्रित किया गया है। पौराणिक दृश्यों से सजे इन भित्ति चित्रों में राधा और कृष्ण की रासलीला, यमुना किनारे की छवियां, और गोपियों संग विहार को इतनी नजाकत से उकेरा गया है कि ये दृश्य किसी मंदिर या चित्रशाला से कम नहीं लगते। इन चित्रों को देखने के बाद ऐसा महसूस होता है मानो यह बाग स्वयं वृंदावन हो, और हर कोना कृष्ण भक्ति से सराबोर हो। इन लीलाओं के माध्यम से यहां आने वाला हर व्यक्ति एक आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव करता है, जहां प्रेम केवल सांसारिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक और दिव्यता से परिपूर्ण लगता है।

स्थापत्य कला और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम
सिसोदिया रानी गार्डन में बहु-स्तरीय छतों, बहती हुई फव्वारों, नक्काशीदार मंडपों और रंगीन दीवार चित्रों का ऐसा मेल है, जो राजस्थान की राजस्थानी शैली और मुग़ल स्थापत्य का खूबसूरत संगम प्रस्तुत करता है। बाग के चारों ओर हरियाली और फूलों की क्यारियां इसे और भी मोहक बनाती हैं।यहां बने जलाशय, छतरियां, झरने और छोटे मंदिर ना केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, बल्कि उस दौर की वास्तुकला और सौंदर्यशास्त्र की समझ को भी दर्शाते हैं। बाग की शांत और सुरम्य हवा हर आने वाले को सुकून देती है, मानो कोई रूहानी अनुभव हो रहा हो।

आज भी खींच लाता है लोगों को यह बाग
सिसोदिया रानी बाग आज जयपुर आने वाले पर्यटकों के लिए एक दर्शनीय स्थल बन चुका है, जहां न केवल इतिहास प्रेमी बल्कि प्रेमी युगल, फोटोग्राफर और कला के विद्यार्थी भी खिंचे चले आते हैं। यह स्थल उन लोगों के लिए विशेष रूप से आकर्षक है जो इतिहास और संस्कृति को सिर्फ किताबों में नहीं बल्कि ज़मीन पर महसूस करना चाहते हैं।

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