कनपटीमार शंकरिया की खौफनाक कहानी: हथौड़े से किए 70 कत्ल, वीडियो में जाने दहशत में था राजस्थान
राजस्थान की अपराध की दुनिया में एक ऐसा नाम दर्ज है, जिसे याद करके आज भी लोग सिहर उठते हैं। यह नाम है कनपटीमार शंकरिया का। 1970 के दशक में जयपुर और आसपास के इलाकों में उसकी दहशत इतनी फैल गई थी कि लोग रात में अकेले निकलने से डरने लगे थे। शंकरिया ने महज कुछ महीनों में इतनी हत्याएं कीं कि पुलिस और आम जनता दोनों हैरान रह गए।
कौन था कनपटीमार शंकरिया?
कनपटीमार शंकरिया का जन्म वर्ष 1952 में जयपुर, राजस्थान में हुआ था। शुरुआत में वह अपराध की दुनिया का बड़ा नाम नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे वह चोरी और अपराधों में शामिल होने लगा। साल 1977 से 1978 के बीच उसने लगातार कई हत्याओं को अंजाम दिया। पुलिस रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस पर करीब 70 हत्याओं के आरोप लगे थे।
कैसे बना "कनपटीमार"?
शंकरिया हत्या के लिए एक खास तरीका अपनाता था। वह अपने शिकार के सिर के पीछे कान के नीचे यानी कनपटी के पास हथौड़े से वार करता था। इसी तरीके की वजह से उसे "कनपटीमार" नाम दिया गया।बताया जाता है कि वह अक्सर रात के समय अकेले घूमने वाले लोगों को निशाना बनाता था। वह अचानक हमला करता और पीड़ित को संभलने का मौका तक नहीं मिलता था।
हत्या के बाद बोला- "मारने में मजा आता था"
पुलिस गिरफ्त में आने के बाद जब उससे पूछताछ की गई तो उसके बयानों ने लोगों को और डराया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने कहा था कि उसे हथौड़े से हमला करने में आनंद आता था। उसके इस कबूलनामे ने जांच अधिकारियों को भी चौंका दिया था।
पुलिस के लिए बना था बड़ी चुनौती
शंकरिया के अपराधों की सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि उसके ज्यादातर शिकारों के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं दिखाई देता था। अलग-अलग जगहों पर होने वाली वारदातों ने पुलिस के सामने चुनौती खड़ी कर दी थी।लंबी जांच और सुरागों के बाद आखिरकार पुलिस उसे पकड़ने में सफल रही। गिरफ्तारी के बाद उस पर मुकदमा चला और अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई।
27 साल की उम्र में मिली फांसी
कनपटीमार शंकरिया को 16 मई 1979 को जयपुर में फांसी दी गई। उस समय उसकी उम्र सिर्फ 27 साल थी। फांसी से पहले उसने अपने अपराधों पर पछतावा जताया और कहा था कि किसी को भी उसकी तरह नहीं बनना चाहिए।
अपराध इतिहास में दर्ज हुआ नाम
कनपटीमार शंकरिया की कहानी भारत के सबसे चर्चित सीरियल किलर मामलों में शामिल है। उसकी कहानी सिर्फ अपराध की नहीं, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे एक व्यक्ति गलत रास्ते पर जाकर समाज के लिए खतरा बन सकता है।आज भी राजस्थान के अपराध इतिहास में शंकरिया का नाम एक डरावने अध्याय के रूप में याद किया जाता है।

