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प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं सरिस्का, 3 मिनट के वायरल वीडियो में करे बाघों की इस अनोखी दुनिया की सैर 

प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं सरिस्का, 3 मिनट के वायरल वीडियो में करे बाघों की इस अनोखी दुनिया की सैर 

राजस्थान के दिल में बसा सरिस्का टाइगर रिजर्व उन यात्रियों के लिए स्वर्ग है जो प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवों का रोमांच और ऐतिहासिक महत्व को एक साथ अनुभव करना चाहते हैं। अरावली पर्वतमाला की गोद में फैला सरिस्का न केवल बाघों के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, बल्कि यह जैव विविधता और सांस्कृतिक धरोहरों का अनमोल संगम भी प्रस्तुत करता है।2025 में ट्रैवल ट्रेंड्स के अनुसार, प्रकृति और एडवेंचर आधारित पर्यटन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और ऐसे में सरिस्का टाइगर रिजर्व घूमना एक बेहतरीन विकल्प बन चुका है।


सरिस्का टाइगर रिजर्व का इतिहास और महत्व

सरिस्का का इतिहास केवल प्राकृतिक संरक्षण तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र प्राचीन समय से ही राजाओं का प्रिय शिकार स्थल रहा है। 1955 में इसे वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया और 1978 में "प्रोजेक्ट टाइगर" के तहत इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया।हालांकि एक समय ऐसा भी आया जब यहाँ बाघ पूरी तरह विलुप्त हो गए थे। लेकिन सरकार और संरक्षण संगठनों के अथक प्रयासों से 2004 के बाद यहाँ बाघों की पुनर्स्थापना सफलतापूर्वक की गई। आज सरिस्का में बाघों के अलावा तेंदुआ, नीलगाय, चीतल, सांभर, जंगली सूअर और विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ भी देखने को मिलती हैं।

कैसे पहुँचे सरिस्का?
सरिस्का टाइगर रिजर्व, राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है।
सड़क मार्ग: दिल्ली से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सरिस्का तक आप कार या बस द्वारा आराम से पहुँच सकते हैं।
रेल मार्ग: अलवर रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी बड़ा स्टेशन है, जो सरिस्का से लगभग 37 किलोमीटर दूर है।
हवाई मार्ग: जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सरिस्का से लगभग 110 किलोमीटर दूर है।

सरिस्का में क्या-क्या देखें?
जंगल सफारी:

सरिस्का में ओपन जीप सफारी का रोमांच हर प्रकृति प्रेमी के लिए एक यादगार अनुभव है। सफारी सुबह और शाम के समय आयोजित की जाती है, जब बाघों और अन्य जानवरों को देखने की संभावना अधिक होती है।

किला कंकवारी:
जंगल के बीचों-बीच स्थित कंकवारी किला न केवल स्थापत्य प्रेमियों के लिए रोचक है, बल्कि इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए भी खास है। कहा जाता है कि मुग़ल शासक औरंगजेब ने अपने भाई दारा शिकोह को यहाँ कैद किया था।

पांडुपोल हनुमान मंदिर:
धार्मिक भावना से जुड़े यात्रियों के लिए पांडुपोल एक विशेष आकर्षण है। यहाँ स्थित हनुमान मंदिर और झरना प्राकृतिक शांति का एहसास कराते हैं।

सरिस्का पैलेस:
एक समय में अलवर के महाराजा का शाही निवास रहा यह महल अब एक शानदार हेरिटेज होटल में परिवर्तित हो चुका है। इसकी भव्यता और वास्तुशिल्प शैली पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

बंजर नाले और सिलिसेढ़ झील:
प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए ये स्थान स्वर्ग से कम नहीं। खासकर मानसून के मौसम में इनकी खूबसूरती दोगुनी हो जाती है।

सफारी के लिए ज़रूरी बातें
सफारी के लिए पहले से ऑनलाइन या ऑफलाइन बुकिंग कराना जरूरी है।
जीप सफारी के दौरान प्रशिक्षित गाइड और ड्राइवर आपके साथ रहते हैं।
सफारी के समय शांत रहना, जानवरों को परेशान न करना और पार्क के नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

सरिस्का जाने का सही समय
सरिस्का टाइगर रिजर्व घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच का होता है, जब मौसम सुहावना और वन्यजीव दर्शन के लिए अनुकूल रहता है। गर्मियों में भी यहाँ सफारी की जाती है, लेकिन तापमान अधिक होने के कारण थोड़ी कठिनाई हो सकती है।

ट्रैवल टिप्स
हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें, साथ ही टोपी और सनस्क्रीन अवश्य साथ रखें।
कैमरा और दूरबीन ले जाना न भूलें ताकि आप वन्य जीवन के अद्भुत क्षणों को कैद कर सकें।
पानी की बोतल और कुछ स्नैक्स साथ रखें, लेकिन पार्क के भीतर स्वच्छता बनाए रखें।
कोशिश करें कि सफारी के दौरान तेज आवाज में बात न करें और जानवरों के आसपास फ्लैश फोटोग्राफी न करें।

निष्कर्ष
सरिस्का टाइगर रिजर्व केवल एक सफारी डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि यह जीवन में एक बार किए जाने वाले अनुभवों में से एक है। यहाँ प्रकृति की गोद में बिताए कुछ पल, बाघों की झलक, ऐतिहासिक किलों की यात्रा और शांत झीलों के दृश्य मिलकर यात्रियों को एक अविस्मरणीय स्मृति दे जाते हैं।अगर आप भी प्रकृति के बीच रोमांच और शांति की तलाश में हैं, तो सरिस्का टाइगर रिजर्व की यात्रा 2025 में आपकी बकेट लिस्ट में जरूर शामिल होनी चाहिए। एक ऐसी यात्रा जो आपको शहरों की भीड़-भाड़ से दूर, प्रकृति के सबसे करीब ले जाएगी।

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