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राजस्थान की रेत को हरियाली में बदलने वाली क्रांतिकारी योजना, वायरल वीडियो में देखे इंदिरा गांधी नहर के 10 अनसुने रहस्य

राजस्थान की रेत को हरियाली में बदलने वाली क्रांतिकारी योजना, वायरल वीडियो में देखे इंदिरा गांधी नहर के 10 अनसुने रहस्य

राजस्थान जो कभी तपते रेगिस्तान, सूखे और जल संकट के लिए जाना जाता था, अब उसी धरती पर हरियाली की नई इबारत लिख रहा है। इस चमत्कार के पीछे एक ऐतिहासिक परियोजना है- इंदिरा गांधी नहर, जो न केवल भारत की सबसे लंबी नहर प्रणाली है, बल्कि रेगिस्तान में जीवन की नई उम्मीद भी बन गई है। 800 किलोमीटर लंबी इस नहर ने पश्चिमी राजस्थान की किस्मत बदल दी है। आइए जानते हैं इस अद्भुत परियोजना से जुड़ी 10 अनसुनी बातें, जो इसे इंजीनियरिंग, सामाजिक और पर्यावरणीय चमत्कार बनाती हैं।


1. भारत की सबसे लंबी नहर प्रणाली

इंदिरा गांधी नहर, जिसे पहले राजस्थान नहर परियोजना के नाम से जाना जाता था, भारत की सबसे लंबी नहर प्रणाली है। इसकी कुल लंबाई करीब 9,206 किलोमीटर है, जिसमें मुख्य नहर के अलावा सहायक नहरों का जाल बिछा हुआ है।

2. पंजाब से शुरू होता है पानी
इस नहर का पानी पंजाब के हरिके बैराज से लिया जाता है, जो सतलुज और व्यास नदियों के संगम पर स्थित है। वहां से नहर राजस्थान के गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर जैसे जिलों तक पहुंचती है।

3. एकता और विकास की मिसाल
इस परियोजना के लिए पानी का बंटवारा पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच एक समझौते के तहत किया गया था, जो देश में राज्यों के बीच संसाधन-बंटवारे का एक बेहतरीन उदाहरण है।

4. रेगिस्तान में जीवन की शुरुआत
इंदिरा गांधी नहर के आने से पहले जैसलमेर और बाड़मेर जैसे इलाके पूरी तरह सूखे और रेगिस्तानी थे। आज इन इलाकों में खेती होती है, घने पेड़ दिखते हैं और नदियों का बहाव दिखता है।

5. जल क्रांति की नींव
इस परियोजना की वजह से राजस्थान में करीब 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई संभव हो पाई है। इसने राज्य को फसल उत्पादन और खाद्य सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

6. मूल नाम और बदलाव
शुरू में इसे सिर्फ “राजस्थान नहर परियोजना” कहा जाता था, लेकिन साल 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौत के बाद इस नहर का नाम बदलकर इंदिरा गांधी नहर परियोजना कर दिया गया।

7. भारत-पाक सीमा तक पहुंच
इस नहर की एक खास बात यह है कि यह भारत-पाक सीमा के बहुत करीब से गुजरती है। इससे न केवल सिंचाई को लाभ मिलता है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी इसका सामरिक महत्व है।

8. पानी के साथ विकास भी हुआ
इंदिरा गांधी नहर केवल खेतों को पानी देने तक सीमित नहीं थी। इसने सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और गांवों के विकास में भी योगदान दिया। यह परियोजना पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार बनी।

9. रोजगार और स्थिरता
इस परियोजना ने हजारों लोगों को स्थायी रोजगार दिया, खासकर निर्माण के दौरान। और आज भी यह सिंचाई, कृषि और जल प्रबंधन के क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए आजीविका का एक प्रमुख स्रोत बना हुआ है।

10. जल संरक्षण की चुनौती
हालांकि यह नहर चमत्कारी है, लेकिन इसके साथ जल संरक्षण की बड़ी जिम्मेदारी भी है। इसमें रिसाव, अव्यवस्थित जल वितरण और अतिदोहन जैसी समस्याएं अब उभर रही हैं, जिन्हें आधुनिक तकनीक और नीति से दूर किया जा सकता है।

बदलती तस्वीर
इंदिरा गांधी नहर ने राजस्थान में सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि संभावनाओं की लहर भी ला दी है। आज वह इलाका जिसे कभी रेगिस्तान कहा जाता था, वहां अब गेहूं, चना, सरसों, कपास जैसी फसलें उगती हैं। जलवायु परिवर्तन, वनस्पति वृद्धि और जनसंख्या पुनर्वास इसके प्रमाण हैं।

यह नहर उन चुनौतियों का भी प्रतीक है, जिन्हें कोई राष्ट्र मिलकर हल कर सकता है। यह परियोजना बताती है कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और जन भागीदारी एक साथ आती है, तो असंभव भी संभव हो जाता है।

निष्कर्ष: मानवीय संकल्प से जन्मा चमत्कार
इंदिरा गांधी नहर सिर्फ जल प्रबंधन परियोजना नहीं है, बल्कि एक ऐसा आंदोलन है, जिसने रेगिस्तान को खेत, प्यास को तृप्ति और निराशा को उम्मीद में बदल दिया है। यह प्रकृति की सीमाओं को लांघने और विकास के नए रास्ते बनाने की भारत की क्षमता का एक उदाहरण है। अगर आपने इसे अब तक सिर्फ नक्शों पर ही देखा है, तो अगली बार जब आप राजस्थान जाएं, तो इस मानव निर्मित चमत्कार को करीब से देखें- क्योंकि यह सिर्फ नहर नहीं, जीवन की धारा है।

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