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आध्यात्म और पर्यटन का नया केंद्र बन रहा राजस्थान का पुष्कर शहर, वीडियो में देखे यहाँ के प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन की लिस्ट 

आध्यात्म और पर्यटन का नया केंद्र बन रहा राजस्थान का पुष्कर शहर, वीडियो में देखे यहाँ के प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन की लिस्ट 

राजस्थान की पवित्र भूमि पर बसा पुष्कर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि पर्यटन के नजरिए से भी यह एक अद्भुत गंतव्य है। अजमेर जिले से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह नगर अपनी दिव्यता, रहस्यमयी परंपराओं और खूबसूरत झीलों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। भारत में ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर यहीं स्थित है, जिसके कारण पुष्कर को "भगवान ब्रह्मा की नगरी" भी कहा जाता है। इसके साथ ही यह शहर उन यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है, जो भक्ति और पर्यटन दोनों का अद्वितीय मेल तलाशते हैं।


आध्यात्म और आस्था का गढ़

पुष्कर का नाम आते ही मन में सबसे पहले पुष्कर सरोवर की छवि उभरती है। मान्यता है कि इस सरोवर की उत्पत्ति स्वयं भगवान ब्रह्मा के कमल पुष्प की पंखुड़ियों से हुई थी। इस सरोवर में डुबकी लगाने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है, यही कारण है कि कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ लाखों श्रद्धालु स्नान करने पहुंचते हैं। सरोवर के चारों ओर करीब 52 घाट और 400 से अधिक मंदिर स्थित हैं, जिनमें हर घाट की अपनी पौराणिक और धार्मिक मान्यता है।

ब्रह्मा मंदिर: एकमात्र अद्वितीय स्थल
पुष्कर में स्थित भगवान ब्रह्मा का मंदिर विश्व का एकमात्र मंदिर है, जहां त्रिदेवों में से सृष्टिकर्ता ब्रह्मा की विधिवत पूजा होती है। संगमरमर से बना यह मंदिर स्थापत्य कला का सुंदर उदाहरण है। यहां तक कि शिव और विष्णु के कई मंदिर देश-विदेश में मौजूद हैं, लेकिन ब्रह्मा जी का मंदिर सिर्फ यहीं पुष्कर में है, जो इसे अत्यंत विशिष्ट बनाता है।

प्रमुख दर्शनीय स्थल – क्या जरूर देखें
पुष्कर सिर्फ धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, यह एक शानदार टूरिस्ट डेस्टिनेशन भी है। यहां कई ऐसे स्थल हैं जो किसी भी पर्यटक को मंत्रमुग्ध कर सकते हैं:
पुष्कर सरोवर – आध्यात्मिक स्नान के लिए विश्व प्रसिद्ध, सूर्यास्त के समय यहाँ की आरती विशेष रूप से देखने योग्य होती है।
ब्रह्मा मंदिर – त्रिदेवों में एकमात्र सृष्टिकर्ता के लिए समर्पित, लाल पत्थर और संगमरमर से बना यह मंदिर हजारों श्रद्धालुओं का केन्द्र है।
सावित्री मंदिर – यह मंदिर ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री को समर्पित है और एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ से पुष्कर का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है।
वराह मंदिर – भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित यह मंदिर पुष्कर के सबसे पुराने मंदिरों में गिना जाता है।
पुष्कर मेला ग्राउंड – हर साल आयोजित होने वाला पुष्कर मेला विश्वप्रसिद्ध है, जिसमें ऊंटों की खरीद-बिक्री से लेकर राजस्थानी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।
रंगजी मंदिर – द्रविड़, राजस्थानी और दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली का अद्भुत मिश्रण इस मंदिर को देखने लायक बनाता है।
पहाड़ी ट्रेकिंग और कैमल सफारी – एडवेंचर प्रेमियों के लिए पुष्कर में पहाड़ी ट्रेकिंग और ऊंट की सवारी जैसे अनुभव भी हैं।
लोकल बाजार – पुष्कर का बाजार पारंपरिक राजस्थानी कपड़ों, गहनों और हस्तशिल्प वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध है।
संगीत और ध्यान केंद्र – यहाँ योग और मेडिटेशन सेंटर भी हैं जो मानसिक शांति और अध्यात्म की तलाश करने वालों के लिए उपयोगी हैं।
पुष्कर योगा गार्डन – यहाँ आकर पर्यटक योग, आयुर्वेद और आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।

विदेशी पर्यटकों का पसंदीदा
पुष्कर विदेशी पर्यटकों के लिए भी एक पसंदीदा स्थल बन चुका है। शांत वातावरण, सुरम्य पहाड़ियाँ और पारंपरिक संस्कृति उन्हें आकर्षित करती है। यहाँ के कैफे, योगा रिट्रीट्स और ऑर्गेनिक भोजनालय वैश्विक पर्यटकों को भारतीय संस्कृति से जोड़ते हैं। यूरोपीय देशों के कई पर्यटक यहां महीनों बिताते हैं।

कैसे पहुंचे पुष्कर?
पुष्कर सड़क और रेल मार्ग से भली-भांति जुड़ा हुआ है।

नजदीकी रेलवे स्टेशन: अजमेर जंक्शन (15 किमी)

नजदीकी हवाई अड्डा: किशनगढ़ एयरपोर्ट (40 किमी) और जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (150 किमी)

सड़क मार्ग: राजस्थान और आसपास के राज्यों से नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं।

निष्कर्ष: भक्ति और शांति का संगम
पुष्कर केवल मंदिरों का नगर नहीं, बल्कि यह आत्मा को छू जाने वाला अनुभव है। यहां हर यात्रा आपको भीतर तक शांत और समृद्ध बना देती है। अगर आप कभी धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के संगम को एक साथ अनुभव करना चाहें, तो पुष्कर आपके लिए एक परिपूर्ण स्थान हो सकता है।

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