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राजस्थान का भानगढ़ किला: दिन में पर्यटकों से गुलजार, वीडियो में जाने रात में क्यों लगती है पाबंदी? जानिए भूतिया रहस्य की पूरी कहानी

राजस्थान का भानगढ़ किला: दिन में पर्यटकों से गुलजार, वीडियो में जाने रात में क्यों लगती है पाबंदी? जानिए भूतिया रहस्य की पूरी कहानी

राजस्थान के अलवर जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित भानगढ़ किला देश के सबसे चर्चित ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है। किले की टूटी दीवारें, वीरान हवेलियां, पुराने मंदिर और आसपास का सन्नाटा इसे रहस्यमयी माहौल देते हैं। यही वजह है कि भानगढ़ को लेकर भूत-प्रेत और श्राप से जुड़ी कई कहानियां लंबे समय से लोगों के बीच प्रचलित हैं।

हालांकि, इन कहानियों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। भानगढ़ की पहचान मूल रूप से एक ऐतिहासिक किले और पुरातात्विक स्थल के रूप में है। किले और उसके आसपास मौजूद अवशेष राजस्थान के मध्यकालीन इतिहास और स्थापत्य की झलक देते हैं।

क्यों मशहूर है भानगढ़ का किला?

भानगढ़ कभी एक आबाद नगर था। किले के आसपास बाजार, मंदिर, हवेलियां और आवासीय क्षेत्र होने के प्रमाण मिलते हैं। आज यहां इन संरचनाओं के अवशेष दिखाई देते हैं। मंदिरों और पुराने भवनों के खंडहरों के बीच फैला यह इलाका पर्यटकों को आकर्षित करता है।

समय के साथ भानगढ़ का अधिकांश हिस्सा वीरान हो गया। खंडहरों और सुनसान वातावरण ने इस जगह को रहस्यमयी छवि दे दी। सोशल मीडिया और पर्यटन से जुड़ी कहानियों ने भी इसकी ‘भूतिया किले’ वाली पहचान को और लोकप्रिय बनाया।

श्राप की कहानी कितनी सच?

भानगढ़ से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता एक साधु के कथित श्राप की है। लोककथा के अनुसार, किले और नगर के निर्माण से पहले एक साधु ने शर्त रखी थी कि यहां बनने वाली इमारतों की छाया उसके निवास स्थान तक नहीं पहुंचनी चाहिए।

कहा जाता है कि बाद में निर्माण बढ़ने के कारण यह शर्त टूट गई और साधु ने नगर को उजड़ने का श्राप दे दिया। एक दूसरी कहानी में किले की राजकुमारी और एक तांत्रिक का जिक्र मिलता है। हालांकि, ये कथाएं लोकविश्वास का हिस्सा हैं और इन्हें प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।

रात में प्रवेश को लेकर क्या है नियम?

भानगढ़ को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की होती है कि सूर्यास्त के बाद यहां प्रवेश क्यों नहीं किया जाता। संरक्षित ऐतिहासिक स्मारकों में सुरक्षा और संरक्षण से जुड़े नियम लागू होते हैं। इसलिए पर्यटकों के लिए निर्धारित समय के बाद प्रवेश प्रतिबंधित रहता है।

इसे केवल भूतिया गतिविधियों से जोड़ना सही नहीं होगा। किसी संरक्षित पुरातात्विक स्थल पर अंधेरा होने के बाद पर्यटकों की आवाजाही रोकने के पीछे सुरक्षा, स्मारक संरक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे व्यावहारिक कारण भी होते हैं।

खंडहरों में आज भी दिखता है पुराने शहर का वैभव

भानगढ़ में प्रवेश करने पर सबसे पहले पुराने शहर के अवशेष नजर आते हैं। कई मंदिरों की संरचनाएं आज भी मौजूद हैं। इनके अलावा बाजार क्षेत्र, हवेलियों और अन्य इमारतों के खंडहर किले के पुराने वैभव की कहानी बताते हैं।

किले की प्राकृतिक स्थिति भी इसे खास बनाती है। चारों ओर अरावली की पहाड़ियां और उनके बीच फैले पुराने अवशेष पर्यटकों को इतिहास और प्रकृति दोनों का अनुभव कराते हैं।

रहस्य से ज्यादा इतिहास महत्वपूर्ण

भानगढ़ को ‘भूतिया किला’ कहकर लोकप्रिय किया जाता है, लेकिन इसके पीछे मौजूद ऐतिहासिक विरासत कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। किले से जुड़ी डरावनी कहानियां लोकविश्वास और लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा हैं, जबकि यहां मौजूद स्थापत्य अवशेष वास्तविक ऐतिहासिक धरोहर हैं।

इसलिए भानगढ़ की यात्रा के दौरान लोककथाओं को रोमांच के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन उन्हें प्रमाणित इतिहास या वैज्ञानिक तथ्य मानने से बचना चाहिए। संरक्षित स्मारक होने के कारण यहां प्रशासन और पुरातत्व विभाग के नियमों का पालन करना भी जरूरी है।

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