राजस्थान का 300 साल पुराना रहस्यमयी कुंड, सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रहता है पानी
चंबल नदी उत्तर भारत की प्रमुख नदियों में शामिल है। यह नदी मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से होकर बहती है और इन राज्यों के लिए सिंचाई, पेयजल, जलविद्युत और औद्योगिक जरूरतों का महत्वपूर्ण स्रोत है। चंबल नदी को राजस्थान की प्रमुख बारहमासी नदियों में भी गिना जाता है।
चंबल नदी का उद्गम कहां से होता है?
चंबल नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के पास महू क्षेत्र में स्थित जनापाव पहाड़ियों से माना जाता है। यह समुद्र तल से करीब 854 मीटर की ऊंचाई से निकलती है। शुरुआत में नदी मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र से होकर बहती है और आगे चलकर राजस्थान में प्रवेश करती है।
चंबल की कुल लंबाई लगभग 1,024 किलोमीटर है। यह नदी अंत में उत्तर प्रदेश के इटावा के पास यमुना नदी में मिल जाती है। यमुना आगे चलकर गंगा में मिलती है।
राजस्थान में चंबल का महत्व
चंबल राजस्थान के लिए बेहद महत्वपूर्ण नदी है। यह राज्य के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में बहती है और कोटा, बूंदी, बारां और धौलपुर जैसे जिलों के लिए जल का प्रमुख स्रोत है।
राजस्थान में चंबल नदी पर कई बड़े बांध और जल परियोजनाएं विकसित की गई हैं। इनमें गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज प्रमुख हैं।
इन परियोजनाओं ने राजस्थान और मध्य प्रदेश में सिंचाई तथा बिजली उत्पादन को बढ़ावा दिया है।
चंबल घाटी परियोजना
चंबल नदी पर विकसित चंबल घाटी परियोजना राजस्थान और मध्य प्रदेश की संयुक्त परियोजना है। इसके तहत नदी पर कई बांध बनाए गए।
गांधी सागर बांध
यह चंबल नदी पर बनने वाला प्रमुख बांध है और मध्य प्रदेश में स्थित है। यह चंबल घाटी परियोजना का सबसे ऊपरी प्रमुख बांध है।
राणा प्रताप सागर बांध
यह राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा क्षेत्र के पास स्थित है। इससे जलविद्युत उत्पादन के साथ सिंचाई में भी मदद मिलती है।
जवाहर सागर बांध
यह कोटा और बूंदी क्षेत्र के बीच चंबल नदी पर स्थित है। यहां भी जलविद्युत उत्पादन किया जाता है।
कोटा बैराज
कोटा बैराज मुख्य रूप से सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है। इससे निकलने वाली नहरों के जरिए राजस्थान के बड़े कृषि क्षेत्र में पानी पहुंचाया जाता है।
चंबल नदी की खासियत
चंबल नदी की एक बड़ी खासियत यह है कि यह कई अन्य नदियों की तुलना में अपेक्षाकृत साफ नदी मानी जाती है। इसके बीहड़ क्षेत्र और प्राकृतिक घाटियां भी इसे अलग पहचान देते हैं।
चंबल नदी का क्षेत्र घड़ियाल और मगरमच्छों के संरक्षण के लिए भी प्रसिद्ध है। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के हिस्सों में फैला हुआ है। यहां घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन और कई तरह के पक्षी पाए जाते हैं।
चंबल की प्रमुख सहायक नदियां
चंबल नदी की प्रमुख सहायक नदियों में बनास, कालीसिंध, पार्वती, मेज और शिप्रा शामिल हैं। इनमें बनास नदी राजस्थान के लिए विशेष महत्व रखती है।

