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चित्तौड़गढ़ का ऐतिहासिक विजय स्तंभ देखने का बना रहे हैं प्लान? तो वीडियो में जाने कब जाएं और आसपास के दर्शनीय स्थलों की पूरी सूची ​​​​​​

चित्तौड़गढ़ का ऐतिहासिक विजय स्तंभ देखने का बना रहे हैं प्लान? तो वीडियो में जाने कब जाएं और आसपास के दर्शनीय स्थलों की पूरी सूची

अगर आप भारत के गौरवशाली इतिहास, वीरता और वास्तुकला के अद्भुत नमूनों को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो चित्तौड़गढ़ का विजय स्तंभ आपकी यात्रा सूची में जरूर होना चाहिए। राजस्थान की वीरभूमि चित्तौड़गढ़ न सिर्फ रानी पद्मिनी और राणा रतन सिंह जैसे इतिहास पुरुषों के लिए जानी जाती है, बल्कि यहां का विजय स्तंभ भी भारत के स्वाभिमान और शौर्य की साक्षी है।इस लेख में हम आपको बताएंगे कि विजय स्तंभ घूमने का सही समय क्या है, यहां पहुंचने के साधन कौन-कौन से हैं, और इसके आसपास के कौन-से दर्शनीय स्थल आपकी यात्रा को और भी खास बना सकते हैं।


विजय स्तंभ: एक ऐतिहासिक विरासत

विजय स्तंभ को ‘कीर्ति स्तंभ’ भी कहा जाता है, और यह चित्तौड़गढ़ किले के भीतर स्थित है। इसका निर्माण महाराणा कुम्भा ने 1448 ईस्वी में करवाया था। यह स्तंभ गुजरात के सुल्तान महमूद खिलजी पर विजय के उपलक्ष्य में बनवाया गया था। करीब 37 मीटर ऊँचे इस स्तंभ की वास्तुकला अद्भुत है। इसमें नौ मंजिलें हैं और प्रत्येक मंजिल पर ऐतिहासिक आकृतियाँ, देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और शिलालेख खुदे हुए हैं।इस स्तंभ की सबसे खास बात है इसकी नक्काशी और सीढ़ियों का घुमावदार निर्माण। अगर आप ऊपर तक चढ़ते हैं तो चित्तौड़गढ़ का पूरा नज़ारा आपको 360 डिग्री एंगल से दिखाई देता है।

विजय स्तंभ घूमने का सही समय
चित्तौड़गढ़ एक गर्म और शुष्क क्षेत्र है, इसलिए यहां का मौसम यात्रा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नीचे सही समय की जानकारी दी गई है:
अक्टूबर से मार्च: यह सबसे उपयुक्त समय होता है विजय स्तंभ घूमने का। सर्दी के मौसम में तापमान 10 से 25 डिग्री के बीच रहता है, जिससे घूमना ज्यादा आरामदायक होता है।
सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक: विजिटिंग ऑवर होते हैं। अगर आप सुबह-सुबह पहुंचते हैं तो भीड़ से बच सकते हैं और शांतिपूर्वक हर मंजिल का आनंद ले सकते हैं।
गर्मियों में (अप्रैल-जून): तापमान 40 डिग्री तक चला जाता है, जिससे यात्रा थकाऊ हो सकती है। ऐसे में सुबह जल्दी या शाम के समय ही विजिट करें।

कैसे पहुंचें विजय स्तंभ?
रेल मार्ग: चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन, भारत के प्रमुख शहरों जैसे उदयपुर, जयपुर, दिल्ली और अहमदाबाद से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग: राष्ट्रीय राजमार्गों से चित्तौड़गढ़ जुड़ा हुआ है। उदयपुर से यहां तक की दूरी लगभग 120 किमी है, जिसे टैक्सी या बस द्वारा तय किया जा सकता है।
हवाई मार्ग: निकटतम एयरपोर्ट उदयपुर है, जो करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित है।
आसपास के दर्शनीय स्थल: विजय स्तंभ के पास और क्या देखें?
चित्तौड़गढ़ किला स्वयं ही एक विशाल इतिहास का संग्रह है। विजय स्तंभ के साथ-साथ इन दर्शनीय स्थलों को भी ज़रूर देखें:

1. रानी पद्मिनी महल
झील के बीच में बना यह महल रानी पद्मिनी की सुंदरता और शौर्य की कहानी से जुड़ा है। यहां से झील का दृश्य भी अत्यंत मनोहारी होता है।

2. मीरा मंदिर
यह मंदिर भक्त मीरा बाई को समर्पित है, जो चित्तौड़ के राणा सांगा के पुत्र भोजराज की पत्नी थीं। मंदिर में कृष्ण भक्ति का अद्भुत वातावरण है।

3. कालिका माता मंदिर
यह 8वीं सदी का प्राचीन मंदिर शक्ति की उपासना का केंद्र है और विजय स्तंभ के पास ही स्थित है।

4. राणा कुंभा महल
यह महल इतिहास का जीवंत दस्तावेज़ है, जहाँ से कई ऐतिहासिक घटनाओं की झलक मिलती है।

5. गौमुख जलकुंड
यह प्राकृतिक जल स्रोत चित्तौड़गढ़ किले के भीतर स्थित है और इसका जल कभी नहीं सूखता। स्थानीय लोग इसे पवित्र मानते हैं।

6. कृति स्तंभ (कीर्ति स्तंभ)
यह एक और प्रसिद्ध स्तंभ है, जिसे जैन समाज के राजा जीजाजी ने बनवाया था। यह भी स्थापत्य कला का सुंदर उदाहरण है।

कुछ महत्वपूर्ण सुझाव
यात्रा के दौरान आरामदायक कपड़े और जूते पहनें क्योंकि किले के भीतर काफी चलना होता है।
पानी की बोतल साथ रखें।
गाइड या ऑडियो टूर लेने से इतिहास को बेहतर समझ पाएंगे।
कैमरा ले जाना न भूलें — यहां का हर दृश्य फोटो योग्य है।

निष्कर्ष
चित्तौड़गढ़ का विजय स्तंभ सिर्फ एक स्मारक नहीं, बल्कि भारत के गौरव, शौर्य और संस्कृति का प्रतीक है। यह न केवल वास्तुकला प्रेमियों को आकर्षित करता है, बल्कि इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए भी एक जीती-जागती किताब की तरह है। यदि आप शांति, संस्कृति और इतिहास से जुड़ना चाहते हैं तो विजय स्तंभ की यात्रा आपकी आत्मा को समृद्ध करेगी।तो अगली बार जब आप छुट्टियों की योजना बनाएं, तो चित्तौड़गढ़ को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें और इस ऐतिहासिक गाथा को खुद महसूस करें।

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