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कुंभलगढ़ किला: 500 साल में सिर्फ एक बार टूटा अभेद्य दुर्ग, जानिए इसका गौरवशाली इतिहास

राजस्थान के राजसमंद जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित कुंभलगढ़ किला मेवाड़ की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। विशाल पत्थर की दीवारों, ऊंची पहाड़ियों और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के कारण इसे राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण दुर्गों में गिना जाता है। यह किला न केवल अपनी स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि मेवाड़ के इतिहास और महाराणा प्रताप से भी इसका गहरा संबंध है।  महाराणा कुंभा ने करवाया था निर्माण  कुंभलगढ़ किले का वर्तमान स्वरूप 15वीं शताब्दी में मेवाड़ के शासक महाराणा कुंभा के शासनकाल में विकसित हुआ। इतिहासकारों के अनुसार किले के निर्माण और विस्तार का कार्य लगभग 1443 से 1458 के बीच हुआ। किले का निर्माण अरावली की ऊंची पहाड़ी पर करवाया गया, जिससे यह प्राकृतिक रूप से भी बेहद सुरक्षित था।  महाराणा कुंभा ने मेवाड़ की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई दुर्गों का निर्माण और पुनर्निर्माण कराया था। कुंभलगढ़ इनमें सबसे महत्वपूर्ण दुर्गों में शामिल था।  36 किलोमीटर लंबी दीवार  कुंभलगढ़ की सबसे बड़ी खासियत इसकी विशाल परकोटे की दीवार है। इसे अक्सर करीब 36 किलोमीटर लंबी दीवार के रूप में वर्णित किया जाता है। इसकी चौड़ाई कई स्थानों पर इतनी अधिक है कि लोकप्रचलित रूप से कहा जाता है कि इस पर कई घोड़े एक साथ चल सकते हैं।  यह विशाल दीवार किले की प्राकृतिक पहाड़ी सुरक्षा के साथ मिलकर इसे बेहद मजबूत बनाती थी।  महाराणा प्रताप का जन्म यहीं हुआ  कुंभलगढ़ का इतिहास महाराणा प्रताप से भी जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि महाराणा प्रताप का जन्म 1540 में कुंभलगढ़ में हुआ था। इसलिए यह दुर्ग मेवाड़ के इतिहास में विशेष स्थान रखता है।  महाराणा प्रताप ने मुगल सम्राट अकबर के विरुद्ध मेवाड़ की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। हल्दीघाटी का युद्ध और उसके बाद का संघर्ष राजस्थान के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है।  किले के अंदर कई मंदिर  कुंभलगढ़ केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग नहीं था। इसके परिसर में अनेक मंदिर भी स्थित हैं। इनमें हिंदू और जैन परंपरा से जुड़े मंदिर शामिल हैं। नीलकंठ महादेव मंदिर किले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।  किले के भीतर महल, मंदिर, बावड़ियां और अन्य ऐतिहासिक संरचनाएं इसकी विशालता और तत्कालीन स्थापत्य कौशल को दर्शाती हैं।  दुश्मनों के लिए जीतना आसान नहीं था  कुंभलगढ़ को मेवाड़ की सुरक्षा व्यवस्था में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता था। ऊंची पहाड़ियों पर स्थित होने और मजबूत दीवारों के कारण इस दुर्ग तक पहुंचना और इसे जीतना बेहद कठिन था।  इतिहास में किले पर कई बार आक्रमण हुए। इसके बावजूद इसकी प्राकृतिक और सैन्य सुरक्षा ने इसे लंबे समय तक महत्वपूर्ण दुर्ग बनाए रखा।  विश्व धरोहर का हिस्सा  कुंभलगढ़ किला आज राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल 'Hill Forts of Rajasthan' का हिस्सा है। इस समूह में राजस्थान के छह प्रमुख पहाड़ी किले शामिल हैं।  आज यहां देश-विदेश से पर्यटक किले की विशाल दीवार, महलों, मंदिरों और अरावली के शानदार दृश्यों को देखने पहुंचते हैं।

राजस्थान के राजसमंद जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित कुंभलगढ़ किला मेवाड़ की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। विशाल पत्थर की दीवारों, ऊंची पहाड़ियों और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के कारण इसे राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण दुर्गों में गिना जाता है। यह किला न केवल अपनी स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि मेवाड़ के इतिहास और महाराणा प्रताप से भी इसका गहरा संबंध है।

महाराणा कुंभा ने करवाया था निर्माण

कुंभलगढ़ किले का वर्तमान स्वरूप 15वीं शताब्दी में मेवाड़ के शासक महाराणा कुंभा के शासनकाल में विकसित हुआ। इतिहासकारों के अनुसार किले के निर्माण और विस्तार का कार्य लगभग 1443 से 1458 के बीच हुआ। किले का निर्माण अरावली की ऊंची पहाड़ी पर करवाया गया, जिससे यह प्राकृतिक रूप से भी बेहद सुरक्षित था।

महाराणा कुंभा ने मेवाड़ की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई दुर्गों का निर्माण और पुनर्निर्माण कराया था। कुंभलगढ़ इनमें सबसे महत्वपूर्ण दुर्गों में शामिल था।

36 किलोमीटर लंबी दीवार

कुंभलगढ़ की सबसे बड़ी खासियत इसकी विशाल परकोटे की दीवार है। इसे अक्सर करीब 36 किलोमीटर लंबी दीवार के रूप में वर्णित किया जाता है। इसकी चौड़ाई कई स्थानों पर इतनी अधिक है कि लोकप्रचलित रूप से कहा जाता है कि इस पर कई घोड़े एक साथ चल सकते हैं।

यह विशाल दीवार किले की प्राकृतिक पहाड़ी सुरक्षा के साथ मिलकर इसे बेहद मजबूत बनाती थी।

महाराणा प्रताप का जन्म यहीं हुआ

कुंभलगढ़ का इतिहास महाराणा प्रताप से भी जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि महाराणा प्रताप का जन्म 1540 में कुंभलगढ़ में हुआ था। इसलिए यह दुर्ग मेवाड़ के इतिहास में विशेष स्थान रखता है।

महाराणा प्रताप ने मुगल सम्राट अकबर के विरुद्ध मेवाड़ की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। हल्दीघाटी का युद्ध और उसके बाद का संघर्ष राजस्थान के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है।

किले के अंदर कई मंदिर

कुंभलगढ़ केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग नहीं था। इसके परिसर में अनेक मंदिर भी स्थित हैं। इनमें हिंदू और जैन परंपरा से जुड़े मंदिर शामिल हैं। नीलकंठ महादेव मंदिर किले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।

किले के भीतर महल, मंदिर, बावड़ियां और अन्य ऐतिहासिक संरचनाएं इसकी विशालता और तत्कालीन स्थापत्य कौशल को दर्शाती हैं।

दुश्मनों के लिए जीतना आसान नहीं था

कुंभलगढ़ को मेवाड़ की सुरक्षा व्यवस्था में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता था। ऊंची पहाड़ियों पर स्थित होने और मजबूत दीवारों के कारण इस दुर्ग तक पहुंचना और इसे जीतना बेहद कठिन था।

इतिहास में किले पर कई बार आक्रमण हुए। इसके बावजूद इसकी प्राकृतिक और सैन्य सुरक्षा ने इसे लंबे समय तक महत्वपूर्ण दुर्ग बनाए रखा।

विश्व धरोहर का हिस्सा

कुंभलगढ़ किला आज राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल 'Hill Forts of Rajasthan' का हिस्सा है। इस समूह में राजस्थान के छह प्रमुख पहाड़ी किले शामिल हैं।

आज यहां देश-विदेश से पर्यटक किले की विशाल दीवार, महलों, मंदिरों और अरावली के शानदार दृश्यों को देखने पहुंचते हैं।

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