Samachar Nama
×

Kashi Pind Daan Guide: दिल्ली से बनारस की दूरी, बेस्ट रूट और घाटों की पूरी जानकारी; ऐसे प्लान करें अपनी यात्रा

Kashi Pind Daan Guide: दिल्ली से बनारस की दूरी, बेस्ट रूट और घाटों की पूरी जानकारी; ऐसे प्लान करें अपनी यात्रा

पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। इसके लिए काशी, गया और हरिद्वार जैसे धार्मिक शहरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।अगर आप भी दिल्ली से वाराणसी यानी काशी जाकर पिंडदान करने की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा से पहले वहां पहुंचने के विकल्प और प्रमुख धार्मिक स्थलों के बारे में जानकारी होना जरूरी है। पिंडदान की सही विधि अलग-अलग परिवारों की परंपराओं के अनुसार बदल सकती है, इसलिए स्थानीय पुरोहित या धार्मिक जानकार से सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

दिल्ली से वाराणसी कैसे पहुंचें?

दिल्ली से काशी पहुंचने के लिए ट्रेन, फ्लाइट और बस तीनों विकल्प मौजूद हैं।

ट्रेन से सफर:
नई दिल्ली और दिल्ली के दूसरे प्रमुख रेलवे स्टेशनों से वाराणसी के लिए कई ट्रेनें चलती हैं। कुछ ट्रेनें रात में रवाना होकर सुबह वाराणसी पहुंचाती हैं। हालांकि, यात्रा का समय ट्रेन, रूट और सर्विस के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

फ्लाइट से सफर:
अगर आप कम समय में वाराणसी पहुंचना चाहते हैं तो दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट ले सकते हैं। उड़ान का समय करीब डेढ़ घंटे के आसपास हो सकता है, लेकिन एयरपोर्ट तक पहुंचने और वाराणसी शहर तक आने में लगने वाला अतिरिक्त समय भी ध्यान में रखें।

बस से सफर:
दिल्ली से वाराणसी के लिए बस का विकल्प भी मौजूद है। यह ट्रेन या फ्लाइट की तुलना में ज्यादा समय ले सकता है, लेकिन बजट में यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह एक विकल्प हो सकता है।

काशी में कहां किया जाता है पिंडदान?

1. पिशाच मोचन कुंड

काशी में पिंडदान और त्रिपिंडी श्राद्ध से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थलों में पिशाच मोचन कुंड का नाम लिया जाता है। यहां पितरों से जुड़े कर्मकांड किए जाते हैं और पितरों की शांति के लिए धार्मिक विधियां की जाती हैं।

2. प्रयाग घाट

प्रयाग घाट भी काशी के उन धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां पितरों से जुड़े कर्मकांड किए जाते हैं। श्रद्धालु यहां पूर्वजों की शांति और धार्मिक परंपराओं के अनुसार पिंडदान कर सकते हैं।

3. मणिकर्णिका घाट

मणिकर्णिका घाट काशी के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। इसका संबंध अंतिम संस्कार और काशी की धार्मिक परंपराओं से है। यहां किसी विशेष कर्मकांड के लिए जाने से पहले स्थानीय पुरोहित से विधि और उचित स्थान की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

पितृ पक्ष में काशी जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

पितृ पक्ष के दौरान काशी में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे में अगर आप पिंडदान के लिए जाने वाले हैं तो ट्रेन या फ्लाइट की बुकिंग के साथ रहने की व्यवस्था भी पहले कर लेना बेहतर रहेगा।किसी पुरोहित से पूजा या पिंडदान की व्यवस्था तय करते समय पहले ही पूजा की विधि, सामग्री और दक्षिणा से जुड़ी जानकारी स्पष्ट कर लें।साथ ही भीड़भाड़ वाले इलाकों में अपने मोबाइल, पर्स और जरूरी दस्तावेजों का ध्यान रखें।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पिंडदान और श्राद्ध की विधि अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार किसी स्थानीय और जानकार पुरोहित के मार्गदर्शन में ही करें।

Share this story

Tags