कनपट्टीमार शंकरिया: जयपुर का वो सीरियल किलर, जिसने 70 से ज्यादा हत्याओं का किया था दावा
राजस्थान के अपराध इतिहास में ‘कनपट्टीमार’ शंकरिया का नाम सबसे खौफनाक अपराधियों में लिया जाता है। जयपुर से जुड़े इस सीरियल किलर ने 1977-78 के दौरान कई लोगों की हत्या करने की बात कबूल की थी। उसका अपराध करने का तरीका इतना अलग था कि उसे ‘कनपट्टीमार’ नाम दिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, शंकरिया ने 70 से ज्यादा लोगों की हत्या करने का दावा किया था, हालांकि इनमें से सभी हत्याओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।
कौन था कनपट्टीमार शंकरिया?
रिपोर्ट के मुताबिक शंकरिया का जन्म 1952 में जयपुर में हुआ था। बेहद कम उम्र में ही वह अपराध की दुनिया में पहुंच गया और 1977-78 के दौरान लगातार हत्याओं के कारण पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया।उसका सबसे चर्चित तरीका था पीड़ित के कान के नीचे गर्दन के हिस्से पर हथौड़े से वार करना। इसी वजह से उसे ‘कनपट्टीमार’ के नाम से जाना जाने लगा। उसके हमलों में अचानक और घातक वार करना प्रमुख था।
70 से ज्यादा हत्याओं का दावा
शंकरिया ने पूछताछ के दौरान 70 से अधिक लोगों की हत्या करने की बात कबूल की थी। हालांकि अपराध से जुड़े ऐसे दावों में सभी मामलों का सत्यापन संभव नहीं हो पाया था। इसलिए उसका वास्तविक शिकार कितना था, इसे लेकर अलग-अलग दावे मिलते हैं।उसके अपराधों ने उस दौर में जयपुर और आसपास के इलाकों में भय का माहौल पैदा कर दिया था। लगातार हो रही हत्याओं के कारण पुलिस पर आरोपी को पकड़ने का दबाव बढ़ता गया।
26 साल की उम्र में गिरफ्तार
रिपोर्ट के अनुसार, शंकरिया को 26 साल की उम्र में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसके खिलाफ मुकदमा चला और 1979 की शुरुआत में उसे दोषी ठहराया गया।अदालत से मौत की सजा मिलने के बाद उसकी कहानी का अंत बेहद भयावह तरीके से हुआ। 16 मई 1979 को जयपुर में उसे फांसी दे दी गई।
आखिरी शब्द भी रहे चर्चा में
शंकरिया के कथित अंतिम शब्द भी लंबे समय से अपराध इतिहास से जुड़ी चर्चाओं का हिस्सा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फांसी से पहले उसने अपने अपराधों पर पछतावा जताते हुए कहा था कि उसने हत्याएं व्यर्थ कीं और किसी को उसके जैसा नहीं बनना चाहिए।
कनपट्टीमार शंकरिया की कहानी भारतीय अपराध इतिहास के उन मामलों में शामिल है, जिनमें अपराधी के अपराध करने का तरीका ही उसकी पहचान बन गया। हालांकि उसके द्वारा किए गए 70 से ज्यादा हत्याओं के दावे को पूरी तरह प्रमाणित मानना उचित नहीं है, लेकिन उसका मामला राजस्थान में सीरियल किलिंग के चर्चित ऐतिहासिक मामलों में आज भी गिना जाता है।

