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इंदिरा गांधी नहर: राजस्थान के लिए सिर्फ सिंचाई नहीं, हजारों करोड़ की अर्थव्यवस्था का आधार

इंदिरा गांधी नहर: राजस्थान के लिए सिर्फ सिंचाई नहीं, हजारों करोड़ की अर्थव्यवस्था का आधार

राजस्थान के रेगिस्तानी और सीमावर्ती इलाकों की तस्वीर बदलने वाली इंदिरा गांधी नहर परियोजना को अक्सर राज्य की जीवनरेखा कहा जाता है। जिस पश्चिमी राजस्थान में कभी खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहती थी, वहां नहर के पानी ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नहर पर हर साल होने वाला खर्च करीब 500 से 700 करोड़ रुपये के आसपास बताया जाता है, जबकि इससे होने वाला अनाज उत्पादन 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक का आंका गया है।

इंदिरा गांधी नहर परियोजना ने राजस्थान के बड़े हिस्से में सिंचाई की सुविधा पहुंचाकर कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार किया। नहर का पानी पहुंचने से कई ऐसे इलाके, जहां खेती करना बेहद मुश्किल था, वहां किसान नियमित रूप से फसल उत्पादन करने लगे। इसका असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण रोजगार, पशुपालन, व्यापार और स्थानीय बाजारों पर भी पड़ा।

रेगिस्तान में खेती को मिली नई जिंदगी

पश्चिमी राजस्थान का बड़ा हिस्सा कम बारिश और शुष्क जलवायु वाला है। ऐसे क्षेत्रों में सिंचाई के स्थायी साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण खेती जोखिम भरा काम था। इंदिरा गांधी नहर के विस्तार के साथ किसानों को सिंचाई का भरोसेमंद स्रोत मिला।

नहर से मिलने वाले पानी ने गेहूं, सरसों, कपास, चना और अन्य फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया। कृषि गतिविधियां बढ़ने के साथ गांवों में ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, खाद-बीज और मंडियों से जुड़ा कारोबार भी विकसित हुआ।

500 से 700 करोड़ खर्च, हजारों करोड़ का उत्पादन

नहर परियोजना पर हर साल होने वाला खर्च करीब 500 से 700 करोड़ रुपये बताया जाता है। इसके मुकाबले नहर से सिंचित क्षेत्रों में पैदा होने वाले अनाज और कृषि उपज का आर्थिक मूल्य 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। यही वजह है कि इसे केवल पानी पहुंचाने वाली परियोजना के बजाय राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने वाला बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जाता है।

हालांकि इस तरह के आर्थिक आंकड़ों में उत्पादन के मूल्य, वर्ष, फसल और क्षेत्र के आधार पर अंतर हो सकता है। इसलिए इन्हें संबंधित सरकारी आंकड़ों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

खेती के साथ पशुपालन को भी फायदा

नहर के पानी का फायदा पशुपालन क्षेत्र को भी मिला है। सिंचाई उपलब्ध होने से पशुओं के लिए चारा उत्पादन बढ़ा और कई क्षेत्रों में किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत मजबूत हुए। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में खेती और पशुपालन एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण नहर का प्रभाव व्यापक रहा।

नहर के आसपास बसे क्षेत्रों में नई बस्तियां और कृषि आधारित बाजार भी विकसित हुए। पानी की उपलब्धता ने लोगों को रोजगार के लिए दूसरे क्षेत्रों में पलायन करने की जरूरत को कई इलाकों में कम किया।

राजस्थान की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका

इंदिरा गांधी नहर परियोजना राजस्थान के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने राज्य के भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में मदद की। कृषि उत्पादन बढ़ने से किसानों के साथ-साथ परिवहन, मंडी, भंडारण और कृषि व्यापार से जुड़े लोगों को भी लाभ मिला।

इस तरह नहर पर होने वाले खर्च को केवल सरकारी व्यय के रूप में देखने के बजाय उससे पैदा होने वाली कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के व्यापक प्रभाव के रूप में देखना अधिक उचित है। राजस्थान के कई जिलों के लिए इंदिरा गांधी नहर आज भी पानी, खेती और रोजगार का प्रमुख आधार बनी हुई है।

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