वीडियो में देखिये जयपुर सिटी पैलेस की वो 7 अद्भुत राजसी विशेषताएं जो इसे बनाती हैं दुनिया का सबसे अनोखा शाही महल
राजस्थान की राजधानी जयपुर को गुलाबी नगरी के रूप में दुनियाभर में जाना जाता है। यहां की वास्तुकला, संस्कृति और शाही विरासत दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसी गुलाबी शहर के दिल में बसा है — जयपुर सिटी पैलेस, जो केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि भारत की सबसे भव्य और ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। लेकिन क्या आपको पता है कि इस महल की कई विशेषताएं ऐसी हैं जो इसे न केवल भारत में बल्कि दुनिया में भी सबसे अनोखा बनाती हैं?यह महल महज एक पर्यटक स्थल नहीं है, बल्कि यह आज भी जयपुर के शाही परिवार का निवास स्थान है। इसका निर्माण राजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1727 में कराया था, जब उन्होंने जयपुर शहर की स्थापना की थी। वास्तुकला की दृष्टि से यह महल मुगल, राजस्थानी और यूरोपीय शैलियों का दुर्लभ संगम है।चलिए जानते हैं जयपुर सिटी पैलेस की उन खास बातों को, जो दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलतीं:
1. दो हिस्सों में बंटा हुआ शाही परिसर
जयपुर सिटी पैलेस का एक भाग आम जनता के लिए खुला है, जबकि दूसरा भाग आज भी शाही परिवार के निवास स्थान के रूप में उपयोग किया जाता है। आज भी पूर्व महाराजा पद्मनाभ सिंह और उनका परिवार इसी महल में रहते हैं। यह भारत के गिने-चुने राजमहलों में से एक है जहां शाही परिवार आज भी मौजूद है और पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करता है।
2. चार ऋतुओं को दर्शाने वाले दरवाजे
महल के भीतर एक विशेष आंगन है — प्रीतम निवास चौक, जिसमें चार अलग-अलग दरवाजे हैं और ये चारों भारत की चार प्रमुख ऋतुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उत्तर-पूर्व का दरवाजा (पत्तों वाला) — वसंत ऋतु
दक्षिण का दरवाजा (कमल आकृति) — गर्मी
पश्चिम का दरवाजा (मोर आकृति) — मानसून
उत्तर का दरवाजा (शीतकालीन पुष्प) — सर्दी
इन दरवाजों की भव्य नक्काशी और रंगों का संयोजन विश्व स्तरीय कलात्मकता को दर्शाता है।
3. दुनिया की सबसे बड़ी चांदी की कलशें
जयपुर सिटी पैलेस के संग्रहालय भाग में दो विशाल चांदी की कलशें रखी गई हैं, जिनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। इन कलशों का निर्माण महाराजा माधो सिंह द्वितीय ने 1901 में इंग्लैंड यात्रा के दौरान अपने साथ गंगाजल ले जाने के लिए करवाया था। ये कलश करीब 1,000 लीटर जल धारण करने की क्षमता रखते हैं और पूरी तरह से शुद्ध चांदी से बनाए गए हैं।
4. वास्तुकला का अद्भुत मिश्रण
महल की बनावट राजपूताना और मुगल शैली के साथ-साथ यूरोपीय प्रभाव को भी दर्शाती है। चंद्र महल, मुबारक महल, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, और महारानी का महल — ये सभी भवन न केवल इतिहास में डूबे हुए हैं बल्कि स्थापत्य कला की जिंदा मिसाल हैं। प्राचीन संगमरमर, नक्काशीदार खंभे, भित्ति चित्र और रंगीन शीशों का अद्भुत संयोजन किसी अजूबे से कम नहीं।
5. चंद्र महल — महल के भीतर महल
जयपुर सिटी पैलेस का मुख्य आकर्षण है चंद्र महल, जो सात मंज़िलों का है और आज भी शाही निवास के रूप में कार्य करता है। इसकी ऊपरी मंज़िलों से जयपुर शहर का नजारा बेहद लुभावना लगता है। यहां ‘सुख निवास’, ‘रंग मंदिर’ और ‘शोभा निवास’ जैसे नामों से जाने जाने वाले कक्ष, अपनी साज-सज्जा और ऐतिहासिक महत्व के कारण बहुत प्रसिद्ध हैं।
6. पोशाकों और शस्त्रों का भव्य संग्रहालय
महल के एक हिस्से को संग्रहालय में बदला गया है, जहां पर प्राचीन राजसी पोशाकें, अस्त्र-शस्त्र, और चित्रकला का विशाल संग्रह देखने को मिलता है। खास बात यह है कि इन वस्तुओं को इतनी खूबसूरती से संजोया गया है कि दर्शकों को तत्कालीन राजसी जीवनशैली का अहसास होता है।
7. आज भी होते हैं पारंपरिक समारोह
यह महल सिर्फ बीते समय की गवाही नहीं देता, बल्कि आज भी यहां तीज, गंगौर, दशहरा और दीपावली जैसे पारंपरिक पर्वों पर शाही ढंग से आयोजन होते हैं। कई बार विदेशी गणमान्य लोगों और सेलेब्रिटीज़ को यहां विशेष कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है।

