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राजस्थान की भागीरथी’ कैसे बनी Indira Gandhi नहर ? वायरल डॉक्यूमेंट्री में करे भारत की सबसे लंबी नहर का ऐतिहासिक सफर

राजस्थान की भागीरथी’ कैसे बनी Indira Gandhi नहर ? वायरल डॉक्यूमेंट्री में करे भारत की सबसे लंबी नहर का ऐतिहासिक सफर

राजस्थान की भागीरथी के नाम से मशहूर इंदिरा नहर देश की सबसे बड़ी नहर मानी जाती है। राजस्थान में आज भी लोग इसकी पूजा करते हैं। इस नहर से एक रोचक इतिहास जुड़ा हुआ है, जिसे राजस्थान के निवासी अपना गौरव मानते हैं।

 

इंदिरा नहर से जुड़ी कुछ खास बातें
1. इंदिरा नहर एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित नहर है।
2. नहर की वजह से पश्चिमी राजस्थान के लोगों की स्थिति बदल गई।
3. यह नहर 17.41 करोड़ हेक्टेयर भूमि को सींचने का काम करती है।
4. इंदिरा नहर राजस्थान में रेगिस्तान की गंगा साबित हुई है।
5. नहर की वजह से लाखों लोगों को रोजगार मिला है।

नहर से जुड़ा इतिहास
आपको बता दें कि इंदिरा गांधी नहर के निर्माण से पहले यहां के लोगों को पानी लाने के लिए मीलों दूर पैदल जाना पड़ता था। 1899 में उत्तर भारत में आए अकाल ने यहां के लोगों का जीना दूभर कर दिया था। विक्रम संवत 1956 के कारण इस अकाल को 'छप्पनिया अकाल' के नाम से भी जाना जाता है। ब्रिटिश गजेटियर में भी इस अकाल को 'द ग्रेट इंडियन फेमिन 1899' के नाम से दर्ज किया गया था।महाराजा गंगा सिंह ने रेगिस्तान में नदी बनवाई थी अकाल से हो रही मौतों को देखते हुए बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने रेगिस्तान में पानी पहुंचाने का जिम्मा उठाया। राजा ने ऐसे इलाके में पानी पहुंचाने का जिम्मा उठाया, जहां दूर तक सिर्फ रेत ही रेत दिखाई देती थी।

मुफ्त में दी थी जमीन
राजा गंगा सिंह चाहते थे कि पंजाब की सतलुज नदी से एक नहर निकाली जाए जो जैसलमेर तक पहुंच सके और राजस्थान के लोगों को पानी मुहैया करा सके। गंगा सिंह से बातचीत के बाद पंजाब पानी देने के लिए राजी हो गया और सतलुज नदी से नहर निकाली गई। राजा के प्रयासों को देखते हुए नहर का नाम गंगा नहर रखा गया। पानी तो आ गया लेकिन सूखी और रेतीली जमीन पर खेती करने के लिए कोई तैयार नहीं था। जिसके बाद राजा ने लोगों को मुफ्त में जमीन बांटी। साल 1983 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस नहर का दौरा किया, जिसके बाद से इस नहर को इंदिरा गांधी नहर के नाम से जाना जाने लगा।

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