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हर साल उमड़ता है देशी-विदेशी पर्यटकों का मेला, वीडियो में झालाना लेपर्ड सफारी की ये 10 बातें जानकर आप भी करने लगेंगे सफर की तैयार
 

हर साल उमड़ता है देशी-विदेशी पर्यटकों का मेला, वीडियो में झालाना लेपर्ड सफारी की ये 10 बातें जानकर आप भी करने लगेंगे सफर की तैयार

पिंक सिटी के नाम से मशहूर जयपुर केवल अपने महलों, किलों और बाजारों के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यहां की झालाना लेपर्ड सफारी भी अब विश्वस्तरीय पहचान बना चुकी है। शहर के बीचोबीच स्थित यह सफारी आज न केवल वाइल्डलाइफ प्रेमियों की पसंद बन चुकी है, बल्कि यहां हर साल हजारों देशी और विदेशी पर्यटक रोमांच का अनुभव लेने आते हैं। लेपर्ड यानी तेंदुए की नज़दीक से झलक पाना जितना रोमांचक है, उतना ही मुश्किल भी — लेकिन झालाना सफारी इसे मुमकिन बनाती है।इस रिपोर्ट में जानते हैं झालाना लेपर्ड सफारी की खासियतें, इसके महत्व और वो वजहें जो इसे राजस्थान की वाइल्डलाइफ टूरिज्म में अनोखा बनाती हैं।


1. शहर के भीतर जंगल – अनोखी लोकेशन
झालाना लेपर्ड सफारी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लोकेशन है। जहां आमतौर पर वाइल्डलाइफ सफारीज शहरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर होती हैं, वहीं झालाना जयपुर शहर के बीचोंबीच स्थित है।महज 15-20 मिनट की दूरी पर स्थित यह जंगल जयपुर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और प्रमुख होटलों से आसानी से पहुंचा जा सकता है।शहर में रहकर भी जंगल का वास्तविक अनुभव लेना — यही वजह है कि ये सफारी तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

2. तेंदुओं की स्थायी मौजूदगी – 40 से ज्यादा लेपर्ड्स
झालाना में आज लगभग 40 से अधिक लेपर्ड्स निवास करते हैं। यह संख्या राजस्थान के अन्य टाइगर रिज़र्व की तुलना में भले कम हो, लेकिन झालाना में खास बात यह है कि यहां लेपर्ड की साइटिंग (दर्शन) की संभावना बेहद अधिक है।यहां तेंदुए खुले इलाकों में, चट्टानों पर या झाड़ियों के बीच अक्सर नज़र आ जाते हैं। यह अनुभव जंगल में मौजूदगी का गहरा अहसास कराता है।

3. सीमित वाहनों की अनुमति – अनुभव होता है शांत और नियंत्रित
झालाना सफारी में प्रतिदिन सीमित जीप्स को ही प्रवेश की अनुमति दी जाती है, जिससे न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि पर्यटकों को भी भीड़भाड़ से दूर एक शांत वातावरण में सफारी का अनुभव मिलता है।सुबह और शाम, दो स्लॉट्स में होने वाली यह सफारी लगभग 2.5 घंटे की होती है।

4. विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद
राजस्थान घूमने आने वाले विदेशी पर्यटक अब केवल आमेर, सिटी पैलेस या हवा महल तक सीमित नहीं हैं। झालाना लेपर्ड सफारी उनके यात्रा कार्यक्रम का खास हिस्सा बन चुकी है।यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान से आने वाले सैकड़ों पर्यटक हर साल झालाना सफारी को अपनी बकेट लिस्ट में शामिल करते हैं।

5. बर्ड वॉचर्स का स्वर्ग
झालाना सिर्फ तेंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि बर्ड वॉचिंग के शौकीनों के लिए भी किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां 150 से अधिक पक्षी प्रजातियां देखने को मिलती हैं, जिनमें फ्लेमिंगो, एशियन पैराडाइज फ्लाईकैचर, ओस्प्रे, शॉर्ट-टूएड ईगल और इंडियन पीफॉwl शामिल हैं।सर्दियों में प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से पूरा जंगल गूंज उठता है।

6. इको-टूरिज्म का बेहतरीन उदाहरण
झालाना लेपर्ड सफारी पर्यावरण-संवेदनशील टूरिज्म का एक शानदार उदाहरण है। यहां सौर ऊर्जा, बायो-टॉयलेट, प्लास्टिक बैन, और स्थानीय गाइड्स की भागीदारी जैसी व्यवस्थाएं इसे एक टिकाऊ और समुदाय-आधारित पर्यटन मॉडल बनाती हैं।स्थानीय युवाओं को सफारी गाइड, ड्राइवर और सहायक के रूप में रोजगार मिल रहा है, जिससे ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा मिला है।

7. फोटोग्राफर्स और फिल्ममेकर्स का पसंदीदा डेस्टिनेशन
पिछले कुछ वर्षों में झालाना सफारी ने नेशनल और इंटरनेशनल डॉक्युमेंट्री प्रोड्यूसर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यहां के प्राकृतिक दृश्य, तेंदुओं की सहजता और खुले रॉकी पाथ्स फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए परफेक्ट माने जाते हैं।

8. पर्यटन सीजन और बुकिंग प्रक्रिया
झालाना सफारी सालभर खुली रहती है, लेकिन अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे बेहतर माना जाता है।पर्यटक राजस्थान टूरिज्म की वेबसाइट या निजी ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। सफारी का शुल्क जीप की श्रेणी, गाइड और सीजन के अनुसार निर्धारित होता है।

9. वन विभाग की निगरानी और सुरक्षा
यह पूरी सफारी राजस्थान वन विभाग के नियंत्रण में है। पर्यटकों को नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है, जैसे – जानवरों को ना छेड़ना, शोर ना करना, प्लास्टिक ना फेंकना आदि।वनकर्मियों और गाइड्स को विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्र में जिम्मेदारी के साथ काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है।

10. झालाना का भविष्य: एक उभरता हुआ अंतरराष्ट्रीय वाइल्डलाइफ हब
राज्य सरकार और जयपुर विकास प्राधिकरण अब झालाना को एक अंतरराष्ट्रीय वाइल्डलाइफ टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। नई एंट्री गेट, कैफे, विज़िटर सेंटर और जंगल ट्रेल्स की योजना निर्माणाधीन है।

निष्कर्ष
झालाना लेपर्ड सफारी न केवल जयपुर के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए एक नायाब शहरी जंगल अनुभव है। यहां न जंगलों का रोमांच कम है और न ही वाइल्डलाइफ का वैभव।हर साल यहां लगने वाला देशी-विदेशी पर्यटकों का मेला इस बात का प्रमाण है कि झालाना अब राजस्थान के पर्यटन नक्शे में एक जरूरी पड़ाव बन चुका है।

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