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हाथी भी थक जाए जिसे खींचते-खींचते... राजस्थान के इस किले में रखी है दुनिया की सबसे भारी तोप, वीडियो में जानिए इसकी कहानी 

हाथी भी थक जाए जिसे खींचते-खींचते... राजस्थान के इस किले में रखी है दुनिया की सबसे भारी तोप, वीडियो में जानिए इसकी कहानी 

जयपुर के जयगढ़ किले में कई ऐतिहासिक चीजें हैं। लेकिन, सबसे कीमती है जयबाण तोप। इसे देखने के लिए हजारों पर्यटक यहां आते हैं। इस तोप को इतनी मजबूती से तैयार किया गया है कि सालों बाद भी इसमें जंग नहीं लगी है। यह तोप आज भी वैसी ही दिखती है। जय तोप जयपुर के राजाओं के लिए किसी ब्रह्मास्त्र से कम नहीं थी। यही वजह है कि आज भी राजपरिवार द्वारा त्योहारों पर इस जयबाण तोप की पूजा की जाती है।

प्राचीन काल से ही युद्ध में हथियारों का बोलबाला रहा है। सेना के पास जो हथियार होते हैं, उसी के हिसाब से युद्ध लड़ा जाता है। कुछ हथियार ऐसे होते हैं, जो लगभग हर युद्ध में अहम होते हैं। जैसे तोप, जिसके एक गोले से कितने ही लोग मारे जाते हैं। प्राचीन काल में तोप युद्ध का अहम हिस्सा हुआ करती थी और आज भी तोप सेनाओं पर हावी है। पहली बार बाबर ने तोप का प्रभावी इस्तेमाल किया था। ऐसी ही एक अनोखी तोप, जो आज भी सुरक्षित अवस्था में रखी गई है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी तोप कहा जाता है।

जयपुर के जयगढ़ किले में आज भी जयबाण तोप सुरक्षित रखी गई है। जयबाण तोप का निर्माण महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय (1699-1743) के शासनकाल में जयगढ़ में हुआ था। उन्होंने इसे अपने राज्य की रक्षा के लिए बनवाया था। यह एकमात्र विशाल तोप है जिसे युद्ध के लिए बनाया गया था। लेकिन, इस तोप का इस्तेमाल कभी युद्ध के लिए नहीं किया गया।

जयबाण तोप की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस विशाल तोप को एक हाथी ही एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकता है। जयबाण तोप की बैरल की लंबाई 6.15 मीटर (20.2 फीट) है। और इसका वजन 50 टन है। बैरल की नोक के पास की परिधि 2.2 मीटर (7.2 फीट) और पीछे की परिधि 2.8 मीटर (9.2 फीट) है। बैरल के बोर का व्यास 11 इंच है। नोक पर बैरल की मोटाई 8.5 इंच है। इस तोप का निर्माण किले के अंदर ही किया गया था।

जयबाण तोप को विशाल आकार के दो पहियों पर बनाया गया था। इसमें एक पहिया करीब 1.37 मीटर (4.5 फीट) व्यास का है। इसके अलावा गाड़ी में परिवहन के लिए दो हटाए जा सकने वाले अतिरिक्त पहिये लगे हैं, जिनका व्यास करीब 9 फीट है। 50 किलो के गोले बनाने में करीब 100 किलो बारूद का इस्तेमाल किया गया था। इसे ट्रायल के तौर पर एक बार दागा गया था। माना जाता है कि जयबाण तोप का परीक्षण सिर्फ एक बार ही किया गया था। और जब इसे दागा गया तो गोला करीब 35 किलोमीटर दूर चाकसू नामक कस्बे में गिरा और वहां एक तालाब बन गया।

जयपुर के जयगढ़ किले में कई ऐतिहासिक चीजें हैं। लेकिन, सबसे कीमती है जयबाण तोप। इसे देखने के लिए यहां हजारों पर्यटक आते हैं। जयबाण तोप को देखने के लिए 50 रुपये का टिकट लगता है। इस तोप को इतनी मजबूती से तैयार किया गया है कि सालों बाद भी इसमें अभी तक जंग नहीं लगी है। यह तोप आज भी वैसी ही दिखती है। जय तोप जयपुर के राजाओं के लिए किसी ब्रह्मास्त्र से कम नहीं थी। इसीलिए आज भी राजपरिवार द्वारा त्योहारों पर इस जयबाण तोप की पूजा की जाती है।

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